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Home राजनीति

चुनाव आयोग और विपक्ष में आर-पार की लड़ाई, CEC के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 18, 2025
in राजनीति, राष्ट्रीय
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Election Commission- rahul gandhi
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स्पेशल डेस्क/ भारत में हाल के दिनों में चुनाव आयोग (Election Commission of India) और विपक्षी दलों, खासकर इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। यह विवाद मुख्य रूप से बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित “वोट चोरी” के आरोपों को लेकर शुरू हुआ है।

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर विचार शुरू कर दिया है। आइए इस मामले की पूरी जानकारी और इसकी प्रक्रिया, और चुनौतियों पर विस्तृत रिपोर्ट विस्तार में एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते है।

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विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के आरोप

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि “महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर “वोट चोरी” हुई है। उन्होंने बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि “वहां कथित तौर पर 1,00,250 फर्जी वोट दर्ज किए गए।”

राहुल ने आरोप लगाया कि “भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में वोटर डेटा में हेरफेर किया गया और इसमें चुनाव आयोग की मिलीभगत शामिल है।” बिहार में SIR अभियान के तहत मतदाता सूची से करीब 65 लाख नाम हटाए गए, जिसे विपक्ष ने “वोट चोरी” और मतदाताओं के अधिकारों का हनन बताया।

चुनाव आयोग का जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के आरोपों को “बेहूदा, निराधार और संविधान का अपमान” करार दिया। उन्होंने राहुल से चुनौती दी कि वे अपने आरोपों के समर्थन में शपथपत्र देकर सबूत पेश करें या देश से माफी मांगें।

आयोग ने कहा कि “SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में त्रुटियों को ठीक करना है, और यह प्रक्रिया पार टी है। आयोग ने 1 अगस्त से 1 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समयसीमा दी है, जिसमें अब तक 28,370 मतदाताओं ने भाग लिया।”

Press Conference by the Election Commission of India today

🗓️ Date & Time: Sunday, August 17, 2025 | 3:00 PM

📍 Venue: National Media Centre, New Delhi

▶️ Watch live at : https://t.co/tmFx5kRMTg

— Election Commission of India (@ECISVEEP) August 17, 2025

विपक्ष का पलटवार

राहुल गांधी ने आयोग पर चयनात्मक कार्रवाई का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि “जब BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने इसी तरह के आरोप लगाए थे, तब उनसे कोई सबूत नहीं मांगा गया।”

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि “CEC का बयान किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के प्रमुख का नहीं, बल्कि BJP प्रवक्ता जैसा लग रहा था।”

ज्ञानेश कुमार गुप्ता जी ने प्रेस वार्ता में फ़रमाया: ‘तो क्या हुआ अगर एक ही व्यक्ति कई जगह वोटर लिस्ट में दर्ज है, वोट तो फिर भी एक ही बार डालेगा।’

अब हमारा सीधा सवाल है — क्या गुप्ता जी यही दलील अदालत में शपथ पत्र पर लिखकर देने को तैयार हैं? pic.twitter.com/td7VLJ3fqX

— Pawan Khera 🇮🇳 (@Pawankhera) August 17, 2025

महाभियोग प्रस्ताव की चर्चा

18 अगस्त को संसद भवन में इंडिया गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर चर्चा हुई। कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि “अभी तक इस पर औपचारिक विचार-विमर्श नहीं हुआ है, लेकिन जरूरत पड़ने पर गठबंधन संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह कदम उठा सकता है।

विपक्ष का तर्क है कि “चुनाव आयोग की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसका रवैया BJP के पक्ष में होने का संकेत देता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।”

क्या हैं विपक्ष की शिकायतें

बिहार में SIR अभियान के दौरान मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने को विपक्ष ने अलोकतांत्रिक बताया। राहुल गांधी ने 7 अगस्त को एक शोध प्रस्तुत किया, जिसमें दावा किया गया कि वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट नाम मौजूद हैं।

कई वोटरों के गलत पते दर्ज हैं। एक ही पते पर 80 से ज्यादा वोटरों का पंजीकरण है। चुनाव आयोग CCTV फुटेज को केवल 45 दिन तक सुरक्षित रखता है, जिससे साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं। विपक्ष ने 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति अधिनियम पर भी सवाल उठाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को नियुक्ति समिति से हटा दिया गया।

Please Read #Bihar SIR DAILY BULLETIN: 1st Aug(3 PM) till 18th Aug (1 PM)at https://t.co/pj8N5tawnD

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— Election Commission of India (@ECISVEEP) August 18, 2025

महाभियोग की प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित है और यह सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया के समान है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है, यदि उन पर दुर्व्यवहार (Misbehaviour) या अक्षमता (Incapacity) का आरोप सिद्ध हो। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जजों के लिए लागू नियमों के समान है।

प्रस्ताव पेश करना

महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जाता है। इसमें हटाने के कारण (दुर्व्यवहार या अक्षमता) स्पष्ट करने होते हैं। प्रस्ताव को उस सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना जरूरी है। प्रस्ताव को दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से दो-तिहाई बहुमत से पारित होना अनिवार्य है। दोनों सदनों से पास होने के बाद, प्रस्ताव राष्ट्रपति के पास जाता है, जिनकी मंजूरी के बाद CEC को हटाया जा सकता है।

क्या है अब चुनौतियां ?

महाभियोग की प्रक्रिया अत्यंत कठिन है, क्योंकि इसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। वर्तमान संसद में विपक्ष के पास इतना संख्याबल नहीं है कि वह अकेले यह प्रस्ताव पारित कर सके। इसके लिए सत्तारूढ़ दल या अन्य दलों का समर्थन जरूरी होगा, जो व्यवहारिक रूप से मुश्किल है।

अब तक भारत में किसी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग के जरिए नहीं हटाया गया है, जो इस प्रक्रिया की जटिलता को दर्शाता है।

विपक्ष की रणनीति

विपक्ष इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक ले जा रहा है। इंडिया गठबंधन ने “वोट चोरी” और SIR के खिलाफ मेगा मार्च और संसद में हंगामे की योजना बनाई है। विपक्ष का उद्देश्य चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर जनता के बीच अपनी बात को मजबूत करना और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में इसे एक प्रमुख मुद्दा बनाना हो सकता है।

हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि महाभियोग प्रस्ताव लाना केवल प्रतीकात्मक कदम हो सकता है, क्योंकि इसे पास करने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना मुश्किल है।

चुनाव आयोग की स्थिति

आयोग ने अपनी निष्पक्षता का बचाव करते हुए कहा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष में काम नहीं करता और उसका उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है।आयोग ने SIR को मतदाता सूची को शुद्ध करने की सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि इससे कोई पक्षपात नहीं किया जा रहा।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आयोग ने SIR के दौरान हटाए गए 65 लाख नामों की सूची अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है।

क्या पड़ेगा राजनीतिक प्रभाव ?

यह विवाद बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को और गरमा सकता है। विपक्ष इसे BJP के खिलाफ एक बड़े मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। BJP और उसके सहयोगी दलों, जैसे LJP (रामविलास) के नेता चिराग पासवान, ने राहुल गांधी के आरोपों को आधारहीन और संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।

कानूनी और संवैधानिक चुनौतियां

मुख्य चुनाव आयुक्त को संवैधानिक रूप से मजबूत सुरक्षा प्राप्त है, जिसके कारण उन्हें हटाना लगभग असंभव है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार, जैसे एस.एस. धनोआ बनाम भारत संघ (1991) और टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) के मामलों में, आयोग की स्वतंत्रता और मजबूती।

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