नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट में खुद को मध्यस्थ दिखाने की कोशिशों में लगे पाकिस्तान को अमेरिका ने ठेंगा दिखा दिया है।अमेरिका के जियोपॉलिटिकल रिस्क एडवाइजर और पूर्व अमेरिकी आर्मी के अधिकारी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने पाकिस्तान की साख पर सवाल उठा दिया है। डगलस ने कहा है कि पाकिस्तान खुद में एक प्रॉब्लम है और इजरायल भी उस पर भरोसा नहीं करता है। डगलस के अलावा भारत के भीतर और बाहर भी कई राजनयिक ऐसे हैं, जो पीएम मोदी को मानते हैं कि वह युद्ध के संकट से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
पाकिस्तान के बारे में डगलस ने क्या कह दिया
अमेरिका के वॉर एक्सपर्ट डगलस ने कहा कि पाकिस्तान खुद आर्थिक समेत कई आंतरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। पाकिस्तान से मदद मांगना ऐसा होगा जैसे ऐसे किसी व्यक्ति से खाली कमरा मांगना, जो खुद जलते हुए घर में रह रहा हो। यहां तक कि इजरायल भी इस्लामाबाद के मध्यस्थता की बात पर खिल्ली उड़ाएगा। उसे पाकिस्तान पर कतई भरोसा नहीं होगा कि वह न्यूट्रल रह सके।
अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान पर संकेतों में तंज कसते हुए कहा है कि पीएम मोदी और मैं ही काम पूरा करते हैं। ज्यादातर लोग यह काम पूरा नहीं कर पाते हैं। इससे पहले भी मंगलवार को ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया था।
कर्नल डगलस बोले-भारत निभा सकता है भरोसेमंद भूमिका
डगलस ने सुझाव दिया कि भारत बातचीत को बढ़ावा देकर एक भरोसेमंद भूमिका निभा सकता है, क्योंकि इसके अलग-अलग जियोपॉलिटिकल ब्लॉक्स में अलग-अलग रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान को खुद एक प्रॉब्लम के तौर पर देखता है। डगलस ने कहा-भारत बहुत अच्छी स्थिति में है।
पाकिस्तान को खुद में एक प्रॉब्लम है। प्रधानमंत्री मोदी ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें पूरी दुनिया में सम्मान और विश्वास के साथ देखा जाता है। वह रूस के साथ संबंधों को भी सहज रख सकते हैं। भारत पर इजरायल और अमेरिका सबको भरोसा है।
कर्नल डगलस मैकग्रेगर, US वॉर एक्सपर्ट
डगलस ने पीएम मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा
डगलस ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी वाकई में असली मदद करने की पोजिशन में हैं। उनका दुनिया में सम्मान है और उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं से संबंधों को बरकरार रखने पर काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें पूरी दुनिया में सम्मान और विश्वास के साथ देखा जाता है। वह रूस के साथ संबंधों को भी सहज रख सकते हैं।
यूएई ने भी माना-मोदी के एक फोन से रुकेगा युद्ध
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी युद्ध रुकवाने में पीएम मोदी पर ही भरोसा जताया है। भारत में यूएई के राजदूत रह चुके हुसैन हसन मिर्जा ने कहा है कि अगर पीएम मोदी एक फोन कर दें तो यह संकट दूर हो सकता है।
अमेरिका-ईरान के युद्ध में खाड़ी के कई देश जैसे यूएई, कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब को भी भुगतना पड़ रहा है। मिर्जा का कहना है कि पीएम मोदी ऐसे वर्ल्ड लीडर हैं, जो इजरायल-ईरान दोनों से बात करके इस युद्ध को रोकने की क्षमता रखते हैं।
इजरायली राजदूत ने भी भारत की भूमिका मानी
हाल ही में भारत में इजरायल के राजदूत रुविन अजार ने न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में भी कहा था-पश्चिम एशिया युद्ध रुकवाने में भारत की भूमिका हो सकती है।
उन्होंने कहा था-कूटनीति की तरफ हम जा सकते हैं और भारत की भूमिका का स्वागत करते हैं। पश्चिम एशिया में भारत का बहुत स्टेक है, पश्चिम एशिया में बहुत भारतीय रहते हैं। भारत एक इकनॉमिक पावर है और भारत पश्चिम एशिया में सहयोग के बहुत प्रोजेक्ट का ऑफर दे सकता है।
मोदी पर भरोसा, इसीलिए बार-बार फोन कर रहे ट्रंप
एक मीडिया इंटरव्यू में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया था। यह फोन तब किया गया, जब ट्रंप ने ईरान के एनर्जी ठिकानों पर हमले पांच दिन के लिए रोक दिए थे।
सर्जियो गोर ने कहा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस इलाके की गहरी समझ है। अमेरिका मध्य पूर्व संकट में मध्यस्थ के रूप में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका का स्वागत करता है। उन्होंने साफ किया कि दोनों के बीच बातचीत होर्मुज को खुलवाने को लेकर हुई।
ईरान को भी पीएम मोदी पर ही भरोसा
बीते 21 मार्च को भारत में ईरान के दूतावास ने भी ईरानी राष्ट्रपति और पीएम मोद के बीच टेलीफोन चर्चा के बारे में बताया। इसमें कहा गया है कि पीएम मोदी ने कई वर्ल्ड लीडरों से बातचीत की है और उन्होंने जोर दिया है कि युद्ध का रास्ता चुनना किसी के हित में नहीं है। ऐसे में सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के लिए पहल करनी होगी।
देश में भी पार्टियों का भरोसा मोदी पर
कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने कहा है कि भारत को पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म कराने के लिए सबसे आगे रहना चाहिए।
आंध्र प्रदेश में माकपा के सेंट्रल कंट्रोल कमीशन के चेयरमैन डॉ. के नारायण ने सलाह दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए कोशिश करनी चाहिए। इस मामले में भारत को न्यूट्रल नहीं रहना चाहिए।







