सोहना: सोहना क्षेत्र में हिलालपुर गांव के शिव मंदिर और मठ के महंत स्वामी रामेश्वरानंद की देह त्याग के बाद गद्दी खाली चली आ रही थी। अग्नि अखाड़े से जुड़े अनंत बोध चैतन्य को सभी ग्रामवासियों और साधु संतों के सामने चादरपोशी की गई है। स्वामी विवेकानंद के आदर्श “आत्मनो मोक्षार्थम जगत हिताय च” को ध्यान में रख कर बीते दो दशकों से अनंत बोध चैतन्य यूरोपीय देशों में आध्यात्मिकता का प्रचार प्रसार करने में लगे रहे हैं।
सोहना क्षेत्र के लोगों के विनम्र आग्रह का परिणाम है कि पिछले महीने स्वदेश लौटे। पिछले दिनों हिलालपुर मे भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन के साथ ताजपोशी का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया है। इस अवसर पर स्वामी दिनेश्वरानंद जी महाराज के सान्निध्य में अनेक संत-महंतों की उपस्थिति दर्शनीय थी।
गुप्त नवरात्रि के समापन अवसर पर सम्पन्न हुए इस आयोजन से हिलालपुर मंदिर व मठ में अनंतबोध चैतन्य जी महाराज की महंताई का अनुष्ठान पूरा होता है। इस अनुष्ठान में चादर विधि, शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की कथा के बाद इसकी पूर्णाहुति वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न होती है। इस अवसर पर एकादश वैदिक ब्राह्मणों द्वारा स्वस्ति मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक क्रियाएं पूर्ण की गई। कार्यक्रम के उपरांत हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद भी ग्रहण किया।
हरियाणा के पानीपत जिले में 1980 में जन्मे सतीश कुमार शर्मा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला में स्नातक की पढ़ाई कर आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में निकल गए थे। अंतर्राष्ट्रीय योग एलायंस से जुड़े अलख योग केन्द्र से हाथ योग की शिक्षा ली। हिमालय के विभिन्न स्थानों में सिद्ध योगियों की संगत कर अनंत बोध चैतन्य हो गए। उनके जीवन दर्शन में पूरब की आध्यात्मिकता के साथ पश्चिम के विज्ञान का समन्वय दिखता है। प्राचीन ज्ञान की उनकी सरल, तार्किक, सहज व्याख्या में आधुनिक विज्ञान की बुनियादी समझ साफ दिखती है। स्वास्थ्य, सद्भाव, खुशी, शांति, समृद्धि और सफलता उनके व्याख्यान का मूल मंत्र है। सदियों पुरानी यह समझ जीने का एक नया तरीका ढूंढती है। ये तनाव, दुख और समस्याओं से परे जीवन जीने के लिए खुद को खोजने में मदद करता है।
इक्कीसवीं सदी के आरंभ में उत्तर-पूर्वी यूरोप में बाल्टिक सागर के किनारे स्थित बाल्टिक देश लिथुआनिया को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। यहां उन्होंने हज़ारों लोगों पर अपने ज्ञान का इस्तेमाल कर पूरी समझ विकसित करने का उल्लेखनीय काम किया। इन प्रोग्राम में सभी तरह के लोग शामिल होते रहे।
इस सूची में एग्जीक्यूटिव, ब्यूरोक्रेट, डिप्लोमैट, मैनेजर, इंजीनियर, स्टूडेंट और टीचर, होम मेकर, आर्मी के लोग शामिल हैं। साथ ही यह लिस्ट शायद कभी खत्म नहीं होगी। 2015 में उन्होंने लिथुआनिया के जोनवा में अनंतबोध योग स्टूडियो आरंभ किया। बीते एक दशक से उनके प्रोग्राम लगातार चल रहे हैं। समझने और सीखने का जुनून इस केंद्र की पहचान साबित हुई है। इसके साथ ही ऑनलाइन काउंसलिंग के ज़रिए दुनिया भर के लोगों को आकर्षित किया है। इसमें यूरोप के देशों के साथ अमेरिका, माल्टा, रूस ही नहीं बल्कि इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।
सोहना क्षेत्र का हिलालपुर गांव आज मेवात में चर्चा का विषय है। आधुनिक और प्राचीन ज्ञान का यह संगम पूरब और पश्चिम को भी जोड़ने का काम करता है। योग और अध्यात्म की शिक्षा के साथ उन्होंने न्याय और मीमांसा की बेहतर शिक्षा के केंद्र के रूप में इस तीर्थ का विकास करना उनकी प्राथमिकता में है। मेवात का जल संकट, अरावली संरक्षण और राष्ट्रीय गोसेवा नीति के प्रति उनकी संजीदगी देश दुनिया में व्यापक परिवर्तन का संकेत है।






