हिमाचल डेस्क/शिमला। बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) के अध्यक्ष पद के चुनाव से बाहर किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसने BFI की चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश बॉक्सिंग एसोसिएशन (HPBA) के कार्यकारी सदस्य के रूप में BFI के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था। BFI के अध्यक्ष अजय सिंह ने 7 मार्च 2025 को एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि केवल विधिवत निर्वाचित राज्य इकाई के प्रतिनिधि ही चुनाव में भाग ले सकते हैं। इस नोटिस के आधार पर ठाकुर का नामांकन रद्द कर दिया गया।
हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला !
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ठाकुर के नामांकन को रद्द करने के BFI के आदेश पर रोक लगा दी थी। HPBA ने तर्क दिया कि BFI का नोटिस नियमों और राष्ट्रीय खेल संहिता का उल्लंघन करता है। चुनाव प्रक्रिया पर रोक बाद में, हिमाचल हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकारिता के आधार पर BFI की चुनाव प्रक्रिया को स्थगित कर दिया, जिसे ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
अनुराग ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट का चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालता है। उन्होंने दावा किया कि HPBA एक मान्यता प्राप्त राज्य इकाई है, और उनका नामांकन वैध था। ठाकुर ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय अधिकारिता को गलत आधार बनाया। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार, यदि मामला आंशिक रूप से किसी राज्य से जुड़ा है, तो हाईकोर्ट को सुनवाई का अधिकार है। ठाकुर और दिल्ली एमेच्योर बॉक्सिंग एसोसिएशन (DABA) ने आरोप लगाया कि BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची में हेराफेरी की और चुनिंदा प्रतिनिधियों को बाहर किया।
दिल्ली हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को BFI के 7 मार्च के नोटिस पर रोक लगा दी, जिसमें ठाकुर सहित कई प्रतिनिधियों को मतदाता सूची से हटाया गया था। कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय खेल संहिता और BFI नियमों का उल्लंघन माना। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि BFI की चुनाव प्रक्रिया जारी रहेगी, और परिणाम घोषित किए जाएंगे। अगली सुनवाई अगस्त 2025 में होगी।
सुप्रीम कोर्ट में अनुराग ठाकुर की याचिका पर सुनवाई बाकी है। यह याचिका हिमाचल हाईकोर्ट के चुनाव प्रक्रिया पर रोक के आदेश को चुनौती देती है। ठाकुर का दावा है कि BFI की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है और इसका उद्देश्य उन्हें और अन्य प्रतिनिधियों को चुनाव से बाहर करना है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने ठाकुर की उम्मीदवारी को फिर से पटरी पर ला दिया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस मामले में निर्णायक होगा।
ठाकुर ने हाईकोर्ट के रोक को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है। BFI पर मनमाने ढंग से नियम लागू करने और चुनाव में हेराफेरी के आरोप लगे हैं। यह मामला भारतीय खेल प्रशासन में राजनीतिक प्रभाव और विवादों को उजागर करता है।







