योगेश नौटियाल
उत्तराखंड डेस्क
देहरादून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में जागर और मंगल गीतों की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देवी-देवताओं की स्तुतियों से लेकर मांगलिक अवसरों तक, इन लोक विधाओं के माध्यम से भावनाओं की अभिव्यक्ति की जाती है। इसी परंपरा को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं चमोली जिले के सवाड़ गांव की जागर और लोकगीत गायिका बसंती मेहरा।
बसंती मेहरा न केवल लोक गायिका हैं, बल्कि अपने गांव की महिला मंगल दल की अध्यक्ष भी हैं। किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, धार्मिक आयोजन या सामाजिक मंच पर उनकी भागीदारी हमेशा सक्रिय रही है। वे कहती हैं, “अपने पहाड़, अपनी संस्कृति” के महत्व को समझना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनका उद्देश्य है।
संस्कृति से जुड़ी हर भूमिका में सक्रिय
गांव में जब भी कोई शुभ कार्य होता है- विवाह, नामकरण या धार्मिक अनुष्ठान – बसंती मेहरा अपनी आवाज़ से उसे संगीतमय बना देती हैं। पारंपरिक रिंगाल की टोकरी बनाना हो, कपड़े सिलना हो या नाटक की प्रस्तुति, वे हर कार्य में निपुण हैं। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि एक महिला पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी लोकसंस्कृति की वाहक बन सकती है।
अभी तक नहीं मिला उचित मंच
बसंती मेहरा को अब तक वह मंच नहीं मिला जिसकी वे हकदार हैं। लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं। वे मानती हैं कि उत्तराखंड की लोक विधाओं को जीवित रखने में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है। उनका कहना है, “हम न सिर्फ खुद इस संस्कृति को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित करते रहेंगे।”
एक प्रेरणादायी जीवन यात्रा
बसंती की जीवन यात्रा प्रेरणा से भरी हुई है। बचपन से ही उन्हें कुछ अलग करने की चाह थी। उन्होंने न केवल गायन और नाट्य प्रस्तुतियों में अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि हर जिम्मेदारी को पूरे समर्पण के साथ निभाया।
पंचायती चुनाव को लेकर जागरूकता !
1 जुलाई को एक अहम गोष्ठी एवं (बैठक) ग्राम सभा सवाड के विवेक पर बुलाई गई जिस बैठक की अध्यक्षता बसंती देवी महिला मंगल दल अध्यक्ष कीअध्यक्षता में मतदान के प्रति जन जागरूकता तथा निर्विरोध उम्मीदवार के चयन को लेकर चर्चा की गई जिसमें तमाम गणमान्य एवं बुद्धिजीवीयों ने बढ़ चढ़कर भागीदारी ले लेते हुए अपने-अपने विचार रखें जिसमें लगभग पूरे ग्राम सभा के मत अनुसार ग्राम प्रधान के लिए पूर्व जिला पंचायत सदस्य आशा धपोला को लेकर सहमति बनी जो कि स्वागत् योग्य निर्णय रहा। बसंती मेहरा की अध्यक्षता जन-जागरूकता, एकजुटता और “सबका साथ सबका विकास” को दर्शाता है जो प्रदेश के लिए एक मिशाल है।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
उत्तराखंड की पहली महिला जागर गायिका बसंती बिष्ट के बाद अब बसंती मेहरा भी एक नया अध्याय लिखने को तैयार हैं। यदि उन्हें उचित मंच और अवसर मिलें, तो वे निश्चित ही राज्य में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनेंगी और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज में एक सकारात्मक सोच का संचार करेंगी।






