प्रकाश मेहरा
विशेष डेस्क
नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के बाद अब दुनिया एक नए वैश्विक संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी जंग की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच रही हैं। इससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहराने लगा है और कई देशों ने पहले ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर एयरलाइंस, ट्रांसपोर्ट और आम जनता पर पड़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है, वहीं ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो दुनिया को कोविड के बाद सबसे बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
एशिया के कई देशों ने स्थिति को गंभीर मानते हुए फ्यूल राशनिंग और ऊर्जा बचत के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जापान और दक्षिण कोरिया ने ईंधन बचाने और ऊर्जा उपयोग कम करने की रणनीति तैयार की है, जबकि बांग्लादेश में फ्यूल राशनिंग और बिजली कटौती जैसे कदम लागू किए जा रहे हैं। इन फैसलों का मकसद ऊर्जा संकट से बचना है, लेकिन आम लोगों के लिए यह स्थिति लॉकडाउन जैसी महसूस हो सकती है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है !
इस बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया के देशों के लिए 10-पॉइंट प्लान जारी किया है। इस प्लान में ईंधन की बचत, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा, वर्क फ्रॉम होम, कार शेयरिंग, कम दूरी की फ्लाइट्स को घटाना और ऊर्जा उपयोग कम करने जैसे सुझाव दिए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पारंपरिक लॉकडाउन नहीं होगा, बल्कि ऊर्जा नियंत्रण के रूप में सामने आ सकता है। ट्रांसपोर्ट सीमित किया जा सकता है, उड़ानें कम हो सकती हैं, ईंधन की खपत पर नियंत्रण लगाया जा सकता है और बिजली उपयोग पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं। सरकारें इसे एनर्जी सिक्योरिटी और आर्थिक स्थिरता के कदम के रूप में पेश करेंगी, लेकिन आम जनता के लिए इसका असर लॉकडाउन जैसा हो सकता है।
युद्ध का खतरा और सप्लाई चेन पर दबाव
सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव, युद्ध का खतरा और सप्लाई चेन पर दबाव अचानक बड़े फैसलों को जन्म दे सकता है। ऐसे में दुनिया को बिना चेतावनी के नए ऊर्जा प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर मध्य पूर्व के हालात और तेल बाजार पर बनी हुई है। अगर तनाव बढ़ता है तो आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर यात्रा, ट्रांसपोर्ट और ऊर्जा उपयोग पर कड़े नियम लागू हो सकते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या कोविड के बाद दुनिया एक नए तरह के लॉकडाउन की ओर बढ़ रही है, या यह केवल एहतियाती तैयारी है। आने वाले दिनों में हालात पूरी तरह साफ हो जाएंगे।







