हिमाचल में बागियों के खिलाफ बीजेपी का कड़ा फैसला लिया है. बीजेपी ने पांच बागियों को पार्टी से निकाल दिया है. बीजेपी के इन नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है. पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर इन नेताओं ने बीजेपी के खिलाफ बागी रुख अख्तियार करते हुए इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है. निष्कासित पांच नेताओं में से चार पूर्व विधायक हैं और एक बीजेपी का प्रदेश उपाध्यक्ष हैं.
काफी मान मनाउल के बाद जब ये नेता नहीं मानें तो बीजेपी ने ये कड़ा फैसला लिया है. किन्नौर से पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी को बीजेपी ने छह साल के लिए निष्कासित किया है. इंदौरा के पूर्व विधायक मनोहर धीमान को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है. आनी के पूर्व विधायक किशोरी लाल को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है. नालागढ़ के पूर्व विधायक केएल ठाकुर को छह साल के लिए निष्कासित किया गया है. फतेहपुर से निर्दलीय पर्चा भरने वाले बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है.
पार्टी अध्यक्ष से लेकर गृहमंत्री तक ने मनाने की कोशिश की
बताया जा रहा है कि कार्रवाई से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर गृहमंत्री अमित शाह और सीएम जयराम ठाकुर तक ने इन बागियों को मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन ये नहीं माने. नेताओं के इसी रवैये से पार्टी हाईकमान काफी नाराज था. जब ये नेता अपना नाम वापस लेने को तैयार नहीं हुए तो निष्काषित करने की कार्रवाई की गई. सभी को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया है.
कांग्रेस ने 6 नेताओं को पार्टी से निकाला था
बता दें, इससे पहले कांग्रेस ने पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी. कांग्रेस ने छह नेताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था. जिन नेताओं पर गाज गिरी थी, उनमें सुलाह से पूर्व विधायक जगजीवन पाल, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर, चौपाल से पूर्व विधायक डॉ. सुभाष मंगलेट, जयसिंहपुर से सुशील कौल, आनी से परस राम और ठियोग से विजय पाल खाची का नाम शामिल था.







