Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

दफ्तर में झपकी ले सकते हैं या नहीं… हाईकोर्ट के फैसले से हो गया साफ

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 26, 2025
in राज्य
A A
सरकारी दफ्तर
23
SHARES
752
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

बेंगलुरु: क्या दफ्तर में काम के दौरान आपको झपकी आती है, क्या आपके साथी या बॉस आपको ऑफिस में काम के दौरान झपकी लेने पर परेशान करते हैं? अगर ऐसा है तो हाईकोर्ट का यह फैसला आपको जरूर पढ़ना चाहिए. कर्नाटक के एक कांस्टेबल चंद्रशेखर के पावरनैप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उसे नौकरी से निलंबित कर दिया. फिर कोर्ट में उस कांस्टेबल ने जो दलीलें दी उस पर हाईकोर्ट के जज ने कहा कि संविधान के तहत लोगों के सोने और आराम करने के अधिकार की मान्यता दी है और समय-समय पर आराम और नींद के महत्व पर जोर दिया है. जज ने आगे कहा कि इसलिए, इस मामले में याचिकाकर्ता के ड्यूटी के दौरान सोने में कोई गलती नहीं मानी जा सकती है.

कर्नाटक राज्य परिवहन निगम (केकेआरटीसी) के एक ट्रांसपोर्ट कांस्टेबल चंद्रशेखर, जिसे लगातार दो महीने तक 16 घंटे की शिफ्ट करने के बाद 10 मिनट की झपकी लेने के लिए निलंबित कर दिया गया था. इस मामले में अब कांस्टेबल को हाईकोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने केकेआरटीसी द्वारा जारी निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा कि केकेआरटीसी प्रबंधन ने ही गलती की थी, क्योंकि उन्होंने कांस्टेबल को बिना ब्रेक के दो महीने तक एक दिन में दो शिफ्ट में काम करने के लिए मजबूर किया था.

इन्हें भी पढ़े

leader

केरल चुनाव: कितने उम्मीदवार दागी और कितने करोड़पति?, जानिए

April 5, 2026
भू-माफिया

उत्तराखंड में बड़ा खेल, जाति छिपाकर बेच दी 1.170 हेक्टेयर जमीन

April 4, 2026
getting rewards for giving garbage

प्लास्टिक बोतल दो, इनाम लो! कचरा देने पर मिल रहा रिवॉर्ड, जानिए क्या है ये अनोखी पहल?

April 3, 2026
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

BHU में जाति पूछकर सपा नेता ने ब्राह्मण छात्र को थप्पड़ मारा, केस दर्ज

April 2, 2026
Load More

हाईकोर्ट ने दिया क्या आदेश?

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को वेतन सहित सभी लाभ मिलेंगे. यदि याचिकाकर्ता ने एक शिफ्ट में ड्यूटी के दौरान सोया होता, तो यह निश्चित रूप से गलत होता. जज ने कहा कि इस मामले में, याचिकाकर्ता को बिना ब्रेक के 60 दिनों तक एक दिन में 16 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया गया था. चंद्रशेखर को 13 मई 2016 को कोप्पल डिवीजन में कर्नाटक राज्य परिवहन कांस्टेबल के रूप में नौकरी ज्वाइन की. 23 अप्रैल 2024 को एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता को काम पर सोते हुए पाया गया था. 1 जुलाई, 2024 को चंद्रशेखर को निलंबित कर दिया गया.

क्या थी कोर्ट में कांस्टेबल की दलीलें

इसे आदेश को चुनौती देते हुए कांस्टेबल चंद्रशेखर ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसे सोने का मौका तक नहीं दिया जा रहा था, क्योंकि उन्हें लगातार दो महीने तक बार-बार शिफ्ट में काम करने के लिए मजबूर किया गया था और इसलिए काम पर सो गए. केकेआरटीसी ने तर्क दिया कि ड्यूटी पर सोते हुए याचिकाकर्ता के वीडियो ने निगम की बदनामी की है.

जज काम के घंटे पर क्या बोले?

न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने नोट किया कि एक केएसटी कांस्टेबल के काम के घंटे एक दिन में आठ घंटे होते हैं. भारी काम के बोझ के कारण चंद्रशेखर को दो शिफ्ट करने के लिए कहा गया था. मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद 24 में कहा गया है कि सभी को आराम और छुट्टी का अधिकार है, जिसमें काम के घंटों की उचित सीमा और वेतन के साथ समय-समय पर छुट्टियां शामिल हैं. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन, जिसका भारत एक हिस्सा है उसमें भी काम और जीवन के संतुलन को मान्यता दी गई है. काम के घंटे एक हफ्ते में 48 घंटे और एक दिन में 8 घंटे से अधिक नहीं होने चाहिए, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के.

जज ने आगे कहा कि केकेआरटीसी की अपनी गलती के लिए निलंबन की कार्रवाई निस्संदेह एक ऐसी कार्रवाई है जो सद्भावना की कमी से ग्रस्त है. जज ने कहा कि इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए. याचिकाकर्ता को सेवा की निरंतरता और निलंबन की अवधि के लिए वेतन सहित सभी परिणामी लाभ प्राप्त करने का अधिकार है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

वेकोलि ने मनाया सोल्लास ‘विश्व पर्यावरण दिवस’

June 5, 2024
khap leader

आए थे पहलवानों का समर्थन करने, आपस में झगड़ बैठे खाप नेता

June 2, 2023

शर्मनाक यह जो सब बेमतलब!

June 11, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • फ्यूल की कमी नहीं होने देगी सरकार! कोल इंडिया तैयार
  • 48 घंटे बाद क्या करेगा अमेरिका? ट्रंप ने ईरान को दी है धमकी
  • दिल्ली में LPG की कालाबाजारी पर एक्शन, FIR दर्ज

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.