नई दिल्ली। भारत पिछले कई दशकों से पाकिस्तानी आतंकवाद का सामना कर रहा है और अब चीन भी उसका नतीजा भुगत रहा है। पाकिस्तान में चीन के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और चीनी नागरिकों पर बार बार हमले हो रहे हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पिछले महीने ऑपरेशन हेरोफ 2.0 लॉन्च किया था।
इस दौरान बलूचिस्तान के 12 जिलों में एक साथ हमले किए गये। इसके बाद चीनी एक्सपर्ट्स ने कहना शुरू कर दिया है कि इस हिंसा ने पाकिस्तान में चीनी निवेश को खतरे में ला दिया है और क्या पाकिस्तान इसे बचा पाएगा, उसकी काबिलियत पर अब शक है। पाकिस्तान में पिछले पांच सालों में कम से कम 20 चीनी नागरिक हमलों में मारे गये हैं।
चीन के एक और पॉलिटिकल कमेंटेटर ने कहा कि पाकिस्तान की प्रतिक्रिया अकसर रिएक्टिव, बिखरा हुआ और कम रिसोर्स वाले होते हैं, जिससे चीनी हितों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। “क्या चीन कोई एक्शन लेगा?” इस सवाल पर चीनी कमेंटेटर ने संयम पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बीजिंग बॉर्डर पार सैनिक नहीं भेजेगा या पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा। उन्होंने जोर दिया कि चीनी नागरिकों और प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
पाकिस्तान की हथियारों से मदद करेगा चीन
चीनी एक्सपर्ट के मुताबिक बीजिंग के पास कुछ विकल्प हैं। जैसे ज्यादा खतरे वाले इलाकों से लोगों को निकालना, ऑन-साइट प्रोटेक्शन को मजबूत करना, सैटेलाइट और ड्रोन के जरिए रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयर करना, एडवांस्ड एंटी-टेररिज्म इक्विपमेंट देना और पाकिस्तान की काबिलियत बढ़ाने के लिए काउंटर-टेररिज्म ट्रेनिंग बढ़ाना शामिल है। दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक एक चीनी कमेंटेटर ने कहा कि चीन को पाकिस्तान की सीधी मदद से बचना चाहिए। इससे खुद चीन निशाना बन सकता है। एनालिस्ट बताते हैं कि चीनी इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके पाकिस्तानी सेना ने पूरे बलूचिस्तान में नेटवर्क बंद करने के ऑपरेशन में एलीट यूनिट्स को इकट्ठा किया।
इसके अलावा पाकिस्तान की स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट को बनाने को भी चीनी एनालिसिस में चीनी लोगों और प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक, इंस्टीट्यूशनल उपाय के तौर पर देखा गया है, खासकर ग्वादर और दासू जैसे हाई-रिस्क एरिया में। यह यूनिट इंटेलिजेंस, पेट्रोलिंग, एस्कॉर्ट्स, रैपिड इमरजेंसी रिस्पॉन्स और चीन के साथ जॉइंट काउंटर-टेररिज्म ट्रेनिंग पर फोकस करती है।
चीन से लगातार पाकिस्तान को दी जा रही चेतावनी
दिप्रिंट की एक लेख में चीन-ताइवान मामलों की जानकार सना हाशमी ने लिखा है कि चीन में अब पाकिस्तान को चेतावनी दी जाने लगी है। कहा जाने लगा है कि रिश्ते भले ही कितने भी मजबूत क्यों ना हो, लेकिन एकतरफा हमले बर्दाश्त से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सामने एक विकल्प है। या तो वह अपनी तथाकथित राष्ट्रीय गरिमा से चिपका रहे और देश को और डूबने दे या सच्ची ईमानदारी दिखाए और सुरक्षा समस्या को हल करने के लिए चीन के साथ सहयोग करे।
चीनी एनालिस्ट यह भी कहते हैं कि पाकिस्तान का काउंटर-टेररिज्म सिस्टम ठहराव के संकट में पड़ गया है। ग्लोबल टाइम्स के पूर्व एडिटर-इन-चीफ हू ज़िजिन ने कुछ महीने पहले चेतावनी दी थी कि चीन-पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं और चीनी निवेश से पाकिस्तान का इकोनॉमिक डेवलपमेंट हो रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और US के बीच किसी भी कोलेबोरेशन से चीन के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसे नजरअंदाज़ करने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सना हाशमी के मुताबिक चीनी एनालिस्ट BLA के एडवांस्ड कामकाज पर ज्यादा ज़ोर दे रहे हैं। वे इसके एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, नाइट-विजन गियर और विदेशी ट्रेनिंग के इस्तेमाल को हाईलाइट करते हैं। ये हमले ग्वादर और बड़े CPEC को डिस्टर्ब करने के लिए सावधानी से प्लान किए गए लगते हैं। चीन में चिंता की जगह बेसब्री लेती दिख रही है। हर नया हमला बीजिंग के विश्वास को तोड़ता है। चीन पहले से ही कॉरिडोर के लिए भारी कीमत चुका रहा है। फिर भी, जैसे-जैसे आतंकी हमले बढ़ रहे हैं, पाकिस्तान की सीमित क्षमता और चीनी प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा करने और आतंकवाद पर रोक लगाने में उसकी हिचकिचाहट की वजह से बीजिंग के पास बहुत कम ऑप्शन बचे हैं।







