स्पेशल डेस्क/पटना : बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(RV)] के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी रणनीति बिहार में किंगमेकर बनने की है, और इसके लिए उनकी नजर सूबे की 33 विधानसभा सीटों पर टिकी है, जहां उनकी पार्टी का प्रभाव माना जाता है। इन सीटों पर उनका मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और महागठबंधन के साथ होगा। यह विश्लेषण चिराग की रणनीति, इन 33 सीटों के महत्व, और बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर आधारित है आइए इस विशेष विश्लेषण में एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।
चिराग पासवान और उनकी रणनीति
8 जून 2025 को, चिराग पासवान ने आरा (भोजपुर जिला, शाहबाद क्षेत्र) में नव संकल्प सभा रैली में घोषणा की कि वे 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा, “मैं बिहार के लोगों के लिए विधानसभा चुनाव लड़ूंगा।”
चिराग ने स्पष्ट किया कि “उनका लक्ष्य राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मजबूत करना है, न कि मुख्यमंत्री पद की दावेदारी करना। हालांकि, उनकी रैलियों में समर्थकों के नारे “चिराग फॉर बिहार” और “बिहार का भविष्य” उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। उनकी पार्टी LJP(RV) ने सभी 243 विधानसभा सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन उनकी मांग 33 से 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की है। यह मांग NDA के भीतर सीट-बंटवारे को जटिल बना रही है।
क्या है 33 सीटों का महत्व !
ये 33 सीटें ऐसी हैं जहां पासवान (दुसाध) समुदाय का प्रभाव माना जाता है, जो बिहार की आबादी का 5.31% है। ये सीटें मुख्य रूप से शाहबाद, मगध, और मिथिलांचल क्षेत्रों में हैं। इन सीटों पर चिराग की पार्टी का प्रभाव 2024 के लोकसभा चुनाव में दिखा, जहां LJP(RV) ने सभी 5 आवंटित सीटों (हाजीपुर, समस्तीपुर, वैशाली, जमुई, खगड़िया) पर जीत हासिल की, जिसमें चिराग ने हाजीपुर से 1.70 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
इन सीटों पर पासवान समुदाय के साथ-साथ अन्य दलित, युवा, और गैर-यादव OBC मतदाताओं को जोड़कर चिराग अपनी पार्टी का आधार बढ़ाना चाहते हैं।
RJD और महागठबंधन का चुनौती
राष्ट्रीय जनता दल (RJD), तेजस्वी यादव के नेतृत्व में, बिहार में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में RJD ने 4 सीटें जीतीं और 9 सीटों पर बढ़त बनाए रखी, जो महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, CPI(ML), और अन्य) की ताकत को दर्शाता है।
RJD की ताकत यादव (14.26%), मुस्लिम (17%), और कुछ EBC (अति पिछड़ा वर्ग) मतदाताओं में है, जो बिहार की 20% वोट हिस्सेदारी के साथ मजबूत आधार रखते हैं। तेजस्वी यादव ने युवाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जोर देकर महागठबंधन को आक्रामक बनाया है। उन्होंने दावा किया कि 2024 में इंडिया गठबंधन 25 से अधिक सीटें जीतेगा, हालांकि यह दावा पूरा नहीं हुआ।
महागठबंधन की रणनीति
महागठबंधन ने शाहबाद और मगध क्षेत्रों में 2024 में 10 लोकसभा सीटें जीतीं, जिसमें स्वतंत्र उम्मीदवार पप्पू यादव की पूर्णिया सीट भी शामिल है। RJD ने हाल ही में पशुपति कुमार पारस को NDA से तोड़कर अपनी ओर करने की कोशिश की, जो चिराग के चाचा हैं और रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत पर दावा करते हैं। यह कदम चिराग के पासवान वोट बैंक को कमजोर करने की रणनीति हो सकती है। तेजस्वी और चिराग के बीच आपसी सम्मान की बातें सामने आई हैं, और RJD ने चिराग को 8 लोकसभा सीटों का ऑफर भी दिया था, जिसे चिराग ने ठुकरा दिया।
NDA के भीतर तनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में NDA ने बिहार में 30 सीटें जीतीं (BJP: 12, JD(U): 12, LJP(RV): 5, HAM: 1)। 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए सीट-बंटवारे की बातचीत चल रही है। JD(U) और BJP 100-100 सीटों पर दावा कर रहे हैं, जबकि चिराग ने 70 सीटों की मांग की है, जो बाद में 33-40 सीटों तक कम हो सकती है। चिराग की मांग ने NDA के भीतर तनाव पैदा किया है, खासकर JD(U) के साथ, क्योंकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली JD(U) बिहार में NDA का चेहरा है।
चिराग और नीतीश का इतिहास
चिराग और नीतीश कुमार के बीच पुराना तनाव है। 2020 में, चिराग ने LJP को NDA से अलग कर 143 सीटों पर चुनाव लड़ा था, खासकर JD(U) के खिलाफ, जिससे नीतीश की सीटें कम हुईं। चिराग ने तब नारा दिया था, “मोदी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं,” जिससे उनकी नीतीश-विरोधी छवि बनी। हालांकि, 2024 में चिराग ने नीतीश और PM मोदी की तारीफ की और NDA को मजबूत करने की बात कही, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा JD(U) को संशय में डाल रही है।
चिराग की ताकत और चुनौतियां !
चिराग पासवान समुदाय (5.31%) के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और दलितों में उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है।LJP(RV) ने 2024 में 100% स्ट्राइक रेट के साथ 5 लोकसभा सीटें जीतीं, जिसमें शंभवी चौधरी (समस्तीपुर) सबसे युवा महिला सांसद बनीं।
LJP(RV) का वोट शेयर 2005 में 11% से घटकर 2020 में 6% हो गया। नीतीश कुमार का महादलित समुदाय (10%) पर प्रभाव है, जिसने LJP के वोट बैंक को सीमित किया। RJD की मजबूत सामाजिक गठबंधन और तेजस्वी की युवा अपील चिराग के लिए चुनौती है।
क्या है वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य ?
बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने हैं। NDA और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है। नीतीश कुमार की सेहत और नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे चिराग के लिए अवसर बन रहा है।
चिराग पासवान की 33 सीटों पर नजर और किंगमेकर बनने की रणनीति बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला रही है। उनकी ताकत पासवान समुदाय और युवाओं में है, लेकिन RJD और महागठबंधन की मजबूत सामाजिक गठजोड़ और नीतीश का महादलित प्रभाव उनकी राह में चुनौती हैं। NDA के भीतर सीट-बंटवारे का तनाव और चिराग की महत्वाकांक्षा 2025 के चुनाव को रोमांचक बना रही है। अगर चिराग इन 33 सीटों पर प्रभाव डाल पाए, तो वे वाकई किंगमेकर बन सकते हैं, लेकिन RJD की रणनीति और नीतीश की विरासत इसे कठिन बना रहे हैं।







