नई दिल्ली : अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी ने 18 जुलाई को कहा है कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट कंपनी की छवि को खराब करने के इरादे से जानबूझकर लाई गई थी. उन्होंने कंपनी की 2023 की एनुअल जनरल मीटिंग के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा कि कंपनी का फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका था, लेकिन FPO की लिस्टिंग से पहले ही अमेरिका की शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग ने एक भ्रामक रिपोर्ट जारी की. जिसका मकसद कंपनी की छवि को खराब करना था. निवेशकों को किसी तरह का कोई नुकसान ना हो, इसलिए हमने FPO वापस ले लिया.
इससे पहले, हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में अडानी ग्रुप पर अकाउंटिंग घोटाले और गलत तरीके से शेयरों के दाम बढ़ाने का आरोप लगाया था. हिंडनबर्ग एक शॉर्ट सेलर कंपनी है. यानी ऐसी कंपनी जो शेयरों में गिरावट के जरिए कमाई करती है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप के शेयरों में 145 अरब डॉलर यानी करीब 12 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ था. जब रिपोर्ट आई थी तब भी अडानी ग्रुप ने हिंडनबर्ग के आरोपों को आधारहीन बताया था.
इधर, 18 जुलाई को गौतम अडानी ने कहा कि रिपोर्ट आते ही ग्रुप की तरफ से इसका एक व्यापक खंडन जारी किया गया था. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने रिपोर्ट के दावों के आधार पर अपना फायदा बनाने की कोशिश की. कई न्यूज चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गलत नैरेटिव फैलाने की कोशिश की गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई. इस कमेटी ने जांच की और उसे कंपनी के अंदर नियामकीय खामी नहीं मिली.
उन्होंने आगे कहा कि इस रिपोर्ट की वजह से संभावित नुकसान को कम करने के लिए कंपनी ने कुछ उपाय भी किए थे. अडानी ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन उपायों से निवेशकों का कंपनी पर दोबारा भरोसा बन सका. इसके अलावा गौतम अडानी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट को भारतीय बाजार में अस्थिरता लाने के लिए भी लाया गया था. बकौल अडानी, कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अडानी समूह के अंदर सभी नियमों का पालन किया गया है और जनता से कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई है. सेबी की रिपोर्ट भी जल्द ही आ जाएगी.







