विकाश शुक्ला
उमरिया(मध्यप्रदेश)। नगर के शहरी विकास को लेकर एक गंभीर प्रशासनिक विवाद सामने आया है। नगर पालिका परिषद उमरिया ने वन विभाग पर अपनी स्वीकृत सीमा से आगे बढ़कर नगर पालिका क्षेत्र में पक्की बाउंड्रीवाल एवं फेंसिंग निर्माण कराने का आरोप लगाया है। परिषद द्वारा जिला प्रशासन को भेजे गए संयुक्त प्रस्ताव में इसे नगरीय नियमों के विपरीत बताया गया है।

शहरी विकास पर संकट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए नगर पालिका उमरिया द्वारा प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कलेक्टर को दिए गए प्रस्ताव पत्र के माध्यम से की गई है।प्रस्ताव के अनुसार डीएफओ बंगला, डीएफओ कार्यालय एवं अस्पताल रोड स्थित वन विभागीय कर्मचारी आवास परिसर में किया जा रहा यह निर्माण नगर पालिका की पूर्व निर्मित नालियों, सड़क संधारण कार्य तथा भविष्य की शहरी विकास योजनाओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।
नहीं ली गई नगर पालिका की मंजूरी
नगर पालिका परिषद उमरिया ने स्पष्ट किया है, कि उक्त निर्माण कार्य नगर पालिका से पूर्व अनुमति अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना किया जा रहा है। यह नगरीय प्रशासन से जुड़े नियमों एवं प्रक्रियाओं का उल्लंघन माना जा रहा है। परिषद का कहना है, कि यह निर्माण नगर पालिका की सीमा के साथ-साथ सार्वजनिक भूमि एवं मार्ग को भी प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में बढ़ती जनसंख्या और नगरीय विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में नई पाइपलाइन, नाली एवं फुटपाथ निर्माण प्रस्तावित हैं, जिन्हें यह निर्माण बाधित कर सकता है।

वन क्षेत्र नहीं, फिर भी विस्तृत फेंसिंग
प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित क्षेत्र वन क्षेत्र न होकर कार्यालय एवं आवासीय उपयोग में लिया जा रहा क्षेत्र है। ऐसे में परिषद ने मांग की है कि सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए निर्माण सीमित बाउंड्रीवाल के रूप में तथा नियमों के अनुरूप ही किया जाए। नगर पालिका परिषद ने जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की अनुशंसा का हवाला देते हुए कहा है, कि अस्पताल रोड पर पहले से ही यातायात का दबाव एवं दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में सड़क की चौड़ाई को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय के पश्चात ही लिया जाना चाहिए।

संयुक्त सीमांकन और स्थल निरीक्षण की मांग
परिषद ने मांग की है कि नगर पालिका, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति में सीमांकन एवं स्थल निरीक्षण कराया जाए तथा अभिलेखों में दर्ज मूल स्वीकृत सीमा के अनुरूप स्थिति को यथावत बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। परिषद ने प्रस्ताव के माध्यम से कलेक्टर उमरिया को पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अब उमरिया कलेक्टर के निर्णय पर निगाहें टिकी हुई हैं, अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद में शहरी विकास और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देता है या विभागीय दावों को।







