प्रकाश मेहरा
विशेष डेस्क
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 29-30 अगस्त को जापान की दो दिवसीय यात्रा ने भारत-जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। यह पीएम मोदी का जापान का आठवां दौरा था और सात साल बाद पहला स्वतंत्र (standalone) दौरा। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर आयोजित 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में गहन चर्चा की।
यात्रा के दौरान 15 से अधिक समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जो अगले दशक के लिए एक रोडमैप तैयार करते हैं। पीएम मोदी ने टोक्यो पहुंचते ही भारतीय डायस्पोरा का गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां टोक्यो स्काई ट्री को तिरंगे के रंगों से सजाया गया। यात्रा का समापन बुलेट ट्रेन सवारी और सेमीकंडक्टर फैक्ट्री दौरे से हुआ, जो दोनों देशों की साझेदारी की गति और गहराई को दर्शाता है।
क्या है यात्रा का मुख्य उद्देश्य ?
पीएम मोदी की यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50% टैरिफ नीतियों के बीच महत्वपूर्ण साबित हुई, जहां भारत ने अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए जापान जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ संबंध मजबूत किए। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह दौरा “सहयोग के नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करने” के लिए था।
भारत-जापान संबंध 6ठी शताब्दी से बौद्ध धर्म के माध्यम से जुड़े हैं, लेकिन 2006 से विशेष रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं। 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 22.85 अरब डॉलर तक पहुंचा, हालांकि भारत का व्यापार घाटा 10.8 अरब डॉलर रहा। जापान भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दानदाता है, जिसने 40 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है। पीएम मोदी ने कहा, “जापान की तकनीक और भारत का टैलेंट मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति ला सकते हैं।”
प्रमुख कार्यक्रम और हाइलाइट्स
पीएम मोदी की यात्रा व्यस्त रही, जिसमें आर्थिक फोरम से लेकर बुलेट ट्रेन सवारी तक कई महत्वपूर्ण गतिविधियां शामिल रहीं। 29 अगस्त (दिन 1) टोक्यो पहुंचना, भारतीय डायस्पोरा से मुलाकात, इंडिया-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधन, शिगेरु इशिबा के साथ शिखर वार्ता, पूर्व जापानी पीएम योशिहिदे सुगा और फुमियो किशिदा से भेंट, जापानी संसद स्पीकर फुकुशिरो नुकागा से चर्चा, टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री दौरा। इकोनॉमिक फोरम में पीएम मोदी ने भारत को “ग्लोबल साउथ का स्प्रिंगबोर्ड” बताया। जापानी कंपनियों ने पिछले दो सालों में 13 अरब डॉलर निवेश किया। 80% जापानी कंपनियां भारत में विस्तार चाहती हैं।
30 अगस्त (दिन 2) 16 जापानी प्रांतों के गवर्नरों से बैठक, बुलेट ट्रेन से सेंडाई यात्रा, ईस्ट जापान रेलवे कंपनी में भारतीय ट्रेन ड्राइवरों से मुलाकात, सेमीकंडक्टर प्लांट दौरा, यात्रा समापन। बुलेट ट्रेन सवारी (शिंकानसेन) में पीएम मोदी और इशिबा ने E10 मॉडल पर चर्चा की। सेंडाई में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री दौरे ने AI और चिप निर्माण सहयोग को बढ़ावा दिया।
इकोनॉमिक फोरम का महत्व
टोक्यो में आयोजित इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम में पीएम मोदी ने कहा, “भारत में पूंजी न केवल बढ़ती है, बल्कि गुणन करता है।” उन्होंने भारत की राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता, 18% वैश्विक विकास योगदान और 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का जिक्र किया। जापान ने भारत को “सबसे आकर्षक निवेश गंतव्य” बताया।
पीएम मोदी और इशिबा ने टोक्यो से सेंडाई (370 किमी) तक शिंकानसेन बुलेट ट्रेन में सफर किया। यहां भारतीय लोको पायलटों से मुलाकात हुई, जो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। जापान ने E10 श्रृंखला (320 किमी/घंटा गति, भूकंप-रोधी) की आपूर्ति का वादा किया, जो मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर (JICA से 88,000 करोड़ रुपये ऋण) को अपग्रेड करेगा। भारत 7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का लक्ष्य रखता है।
प्रमुख समझौते और घोषणाएं
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दशक के लिए “इंडिया-जापान जॉइंट विजन” जारी किया, जो आठ स्तंभों (आर्थिक संबंध, आर्थिक सुरक्षा, मोबिलिटी, तकनीक-नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता, स्वास्थ्य, लोगों के बीच आदान-प्रदान, राज्य-प्रांत सहयोग) पर आधारित है।
जापान ने अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब डॉलर) का निजी निवेश भारत में करने का लक्ष्य रखा। यह 2022 के 5 ट्रिलियन येन लक्ष्य से दोगुना है, जो पहले ही हासिल हो चुका। फोकस: ग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, AI, सेमीकंडक्टर। 2008 के सिक्योरिटी कोऑपरेशन डिक्लेरेशन को अपग्रेड किया। “यूनिकॉर्न” रडार-कम्युनिकेशन प्रोजेक्ट और साइबर सिक्योरिटी में सहयोग बढ़ेगा। क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) पर चर्चा हुई, जो हिंद-प्रशांत में चीन के प्रभाव को संतुलित करेगा।
तकनीक और नवाचार
डिजिटल पार्टनरशिप 2.0 लॉन्च। AI कोऑपरेशन इनिशिएटिव, सेमीकंडक्टर और दुर्लभ खनिजों पर फोकस। टोक्यो इलेक्ट्रॉन फैक्ट्री दौरे में पीएम मोदी ने कहा, “भारत ने सेमीकंडक्टर में बड़ी प्रगति की है, युवा इसमें जुड़ रहे हैं।” ISRO-JAXA चंद्रयान-5 मिशन के लिए पार्टनरशिप। लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) में भारतीय स्टार्टअप्स जापानी तकनीक का उपयोग करेंगे।
स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण
जॉइंट क्रेडिट मैकेनिज्म पर समझौता। बांस बायोफ्यूल प्रोजेक्ट के लिए 60 अरब येन फंडिंग। भारत के 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य 2030 में जापान का सहयोग। अगले 5 वर्षों में 5 लाख लोगों का एक्सचेंज। राज्य-प्रांत इनिशिएटिव लॉन्च, जहां गुजरात-जापान जैसे स्थानीय सहयोग बढ़ेंगे। SME फोरम और स्टार्टअप सहयोग पर जोर। ह्यूमन रिसोर्स एक्सचेंज एक्शन प्लान, मिनरल रिसोर्स कोऑपरेशन, कल्चरल एक्सचेंज। 2025-26 को “इंडिया-जापान ईयर ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन” घोषित।
भारत-जापान संबंधों पर प्रभाव
यह दौरा अमेरिकी टैरिफ तनाव के बीच भारत की “मल्टी-पोलर” रणनीति को मजबूत करता है। जापान के 1,400+ कंपनियां भारत में सक्रिय हैं, और यह निवेश भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेगा। पीएम मोदी ने कहा, “हमारी साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।” जापानी पीएम इशिबा ने भारत को “समाधान साझेदार” बताया। यात्रा ने हिंद-प्रशांत में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत किया, जहां दोनों देश चीन के प्रभाव को बैलेंस करने पर सहमत हैं।
भारत-जापान साझेदारी का स्वर्णिम अध्याय
30 अगस्त को यात्रा समाप्त कर पीएम मोदी चीन के तियानजिन रवाना हो गए, जहां 31 अगस्त-1 सितंबर को SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय बैठकें होंगी। पीएम मोदी ने कहा, “यह दौरा भारत-जापान साझेदारी का स्वर्णिम अध्याय है।” कुल मिलाकर, यह यात्रा न केवल आर्थिक रफ्तार बढ़ाएगी, बल्कि रक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक बंधनों को मजबूत कर एशियाई सदी की नींव रखेगी।
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