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Home राष्ट्रीय

क्या AMCA प्रोजेक्ट से HAL की छुट्टी हो गई? जानिए सही जवाब

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 5, 2026
in राष्ट्रीय
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AMCA project
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नई दिल्ली: “फिलहाल, मैं HAL पर भरोसा नहीं कर रहा हूं, जो कि बहुत गलत बात है. HAL हमारी अपनी कंपनी है, हम सबने वहां काम किया है. मैंने खुद वहां सेवाएं दी हैं. पर मुझे लगता है कि हम मिशन मोड में नहीं हैं. HAL बस ‘सब कुछ हो जाएगा’ वाले ढर्रे पर चल रही है.” ये बयान है वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का. फरवरी 2025 में एयरो इंडिया के दौरान ये कहा था. लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों कहा? क्यों एयरफोर्स के चीफ अपनी ही कंपनी से इतना खफा लग रहे थे?

जवाब है लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी तेजस की डिलीवरी में ‘भयंकर’ देरी. और तो और इस समय जहां दुनिया पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर की ओर बढ़ चुकी है, वहीं भारत जैसा बड़ा देश अभी अपने AMCA का प्रोटोटाइप तक नहीं बना पाया है. और अब कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि HAL से ये प्रोजेक्ट लेकर किसी प्राइवेट कंपनी को सौंपा जा सकता है.

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तमाम मीडिया रिपोर्ट्स जैसे आजतक, बिजनेस स्टैण्डर्ड और एनडीटीवी में ऐसी खबरें हैं कि AMCA को HAL से वापस ले लिया गया है. अब इस प्रोजेक्ट के लिए टाटा, कल्याणी और एल एंड टी जैसी प्राइवेट कंपनियों के बीच कॉम्पिटीशन है. हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद खूब हल्ला कट रहा है. और अब इस मामले पर खुद HAL ने चुप्पी तोड़ी है. HAL ने एक्स पर पोस्ट कर कहा,

एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के बारे में विभिन्न मीडिया रिपोर्टें HAL के ध्यान में आई हैं. HAL को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है. इसलिए, HAL इन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है. HAL सभी हितधारकों को सभी डेवलपमेंट्स के बारे में सूचित रखने के लिए प्रतिबद्ध है. HAL दोहराना चाहता है कि उसके पास एक मजबूत ऑर्डर बुक है, जो ये दिखाता है कि उसके पास मजबूत रेवेन्यू है. HAL के पास 2032 तक प्रोडक्शन और एग्जीक्यूशन पाइपलाइन है.

HAL एक साथ कई स्ट्रेटेजिक प्रोग्राम्स को आगे बढ़ा रहा है. इनमें इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर , एलसीए मार्क2 और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम शामिल हैं, जो इसकी तकनीकी क्षमताओं और लंबे समय तक विकास की संभावनाओं को और मजबूत करेंगे. इन प्रोग्राम्स के 2032 के बाद प्रोडक्शन में आने की उम्मीद है. HAL ध्रुव NG, हिंदुस्तान 228 और SJ100 जैसे प्लेटफार्मों के साथ सिविल एविएशन में भी अपने पोर्टफोलियो में भी विविधता ला रहा है.  HAL के पास मजबूत बुनियादी सिद्धांत हैं और वह लगातार प्रदर्शन के माध्यम से वो लगातार साल-दर-साल विकास प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है.

HAL के बड़े प्रोजेक्ट्स

HAL ने अपने बयान में कहा है कि वो एक साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. इनमें इंडियन मल्टीरोल (IMRH) हेलीकॉप्टर, LCA तेजस Mk2 वेरिएंट और कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS Warrior) सिस्टम शामिल हैं. CATS वॉरियर सिस्टम को तो भविष्य के वॉरफेयर की चाबी माना जाता है. ये एक ऐसा सिस्टम है जिसमें एक फाइटर जेट के साथ कई मानव रहित विमान होंगे. फाइटर जेट एक तय सीमा तक जाकर रुक जाएगा. बाकी मानव रहित विमान होंगे जिन्हें Loyal Wingman कहा जाएगा. पायलट के आदेश पर ये जाकर स्ट्राइक करेंगे. ऐसे में पायलट की सुरक्षा सुनिश्चित होगी. और ये क्रिटिकल प्रोजेक्ट HAL के जिम्मे है.

ये सभी प्रोजेक्ट्स न सिर्फ HAL की ऑर्डर बुक, बल्कि कंपनी की तकनीक को मजबूत बनाएंगे. 2032 के बाद इनके प्रोडक्शन में आने की उम्मीद है. वहीं मिलिट्री के अलावा अब HAL सिविल एविएशन में भी आगे बढ़ रही है. ध्रुव नेक्स्ट जेनरेशन (NG) हेलीकॉप्टर, हिंदुस्तान-228 और SJ100 विमान पर काम चल रहा है. कंपनी का लक्ष्य आय बढ़ाना और लंबे समय तक स्थिर ग्रोथ पाना है.

AMCA क्यों जरूरी है?

AMCA भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है. इस पीढ़ी के विमानों की खासियत है इनका रडार क्रॉस सेक्शन काफी कम होता है. यानी ये रडार पर मुश्किल से दिखते हैं, या बहुत छोटे दिखते हैं. इसे ऐसे समझिए कि हाथी के आकार का विमान रडार पर चिड़िया की तरह दिखेगा. इसलिए एयरस्पेस में बिना हाईटेक रडार के इनकी मौजूदगी का पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है.

इस प्रोजेक्ट को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के तहत आने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) लीड कर रही है. भारत का AMCA भी स्टेल्थ विमान होगा. इसमें इंटर्नल वेपन बे उन्नत सेंसर और बेहतर एवियॉनिक्स होंगे. साथ ही ये विमान सुपरक्रूज यानी बिना आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल किए भी सुपरसॉनिक रफ्तार पर जाने की क्षमता से लैस होगा. यह प्रोजेक्ट भारत को अमेरिका, रूस, चीन जैसे चुनिंदा देशों में शामिल करेगा जो स्टेल्थ फाइटर ऑपरेट कर रहे हैं.

इस प्रोजेक्ट को लेकर HAL से सबको उम्मीद थी क्योंकि HAL भारत की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी है. तेजस, सुखोई Su-30MKI जैसे विमान, ध्रुव और प्रचंड जैसे हेलीकॉप्टर्स को HAL ही बनाती है. सेनाओं के लिए इस कंपनी ने अब तक शानदार काम किया है. इसलिए माना जा रहा था कि AMCA में भी HAL की बड़ी भूमिका होगी. लेकिन जब HAL के बाहर होने की खबरें आईं, तो सब हैरान रह गए.

AMCA की बोली कैसे लगाई गई?

एनडीटीवी की रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने AMCA के लिए इस बार नया तरीका अपनाया है. इस बार प्राइवेट कंपनियों को भी मौका दिया गया जिसकी मांग काफी पहले से की जा रही थी. 2025 में ADA ने इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) जारी किया. आसान भाषा में ये पूछा गया कि कौन कंपनियां हैं जो AMCA बनाने में इंट्रेस्टेड हैं. कुल सात लोग बोली लगाने मैदान में उतरे. इनमें सरकारी और निजी कंपनियां, दोनों शामिल थीं.

कहते हैं कि यहीं पर HAL की गरारी अटक गई. क्योंकि EOI में एक शर्त रखी गई थी कि कंपनी की ऑर्डर बुक उसकी सालाना कमाई से तीन गुना ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर यह सीमा पार होती है, तो उस पैरामीटर में जीरो मार्क्स मिलते हैं. HAL की सालाना कमाई लगभग 30,000 करोड़ रुपये है. उसकी ऑर्डर बुक 2.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह रेशियो तय सीमा से बहुत ज्यादा है. इसी वजह से बिडिंग में HAL को पूरे अंक नहीं मिले और शॉर्टलिस्ट नहीं हो पाई.

दूसरी तरफ सरकार भी नहीं चाहती कि AMCA प्रोजेक्ट में देरी क्योंकि HAL पहले से कई बड़े और अहम प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है. लिहाजा एक ऐसी कंपनी चुनी जा रही है, जिसका वर्कलोड कम हो और जो अपना पूरा फोकस AMCA पर दे सके. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि HAL इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर नहीं हुई है. क्योंकि अभी तो सिर्फ प्रोटोटाइप की बात चल रही है. भविष्य में प्रोडक्शन के समय HAL की भूमिका फिर सामने आ सकती है. HAL पहले से AMCA के कुछ डिजाइन कामों में शामिल है. साथ ही HAL के पास नासिक प्लांट में विमान प्रोडक्शन का एक इकोसिस्टम पहले से मौजूद है. इसलिए ये कहना सही नहीं होगा की उसे इस प्रोजेक्ट से अलग रखा जाएगा. हां, ये संभव है कि अब अधिकतर काम कोई दूसरी कंपनी करेगी.

इंडियन एयरफोर्स हमेशा से HAL पर ही निर्भर रही है. HAL की ओर से कोई भी देरी देश की सुरक्षा पर असर डालती है. क्योंकि भारत की स्थिति ऐसी है कि हर तरफ, चाहे वो पाकिस्तान हो, चीन हो या बांग्लादेश हो; हर जगह एक भारत विरोधी भावना न सिर्फ मौजूद है, बल्कि बढ़ती जा रही है. पाकिस्तान लगातार अपने फाइटर जेट के बेड़े चीन की मदद से अपग्रेड कर रहा है. चीन खुद J-35 स्टेल्थ फाइटर के साथ ऑपरेट कर रहा है. ऐसे में ये काफी जरूरी हो जाता है कि भारत की सेनाओं को जरूरी साजो-सामान, विमान, हथियार वगैरह समय पर मिलें. क्योंकि पड़ोसी का हमला ये देख कर नहीं होगा कि प्रोजेक्ट HAL को मिला या किसी प्राइवेट प्लेयर को.

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