नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि देव को न्यायाधीश और कर्मफल दाता का दर्जा प्राप्त है. शनि लोगों को उनके कर्मों के अनुसार, फल और दंड प्रदान करते हैं. शनि को सबसे क्रूर ग्रह माना गया है. यही कारण है कि जन्म कुंडली में शनि की अशुभ या खराब स्थिति जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है. कुंडली में 12 भाव होते हैं.
ज्योतिषविद शनि को तीन भावों में सबसे अशुभ मानते हैं. इन तीन भावों में बैठकर शनि जातक को अशुभ फल प्रदान किया करते हैं. आइए जानते हैं इन तीन भावों के बारे में. साथ ही जानते हैं कि शनि जब यहां बैठे हों तो क्या उपाय करें?
लग्न भाव में
कुंडली के प्रथम भाव को लग्न भाव के रूप में भी जाना जाता है. इस भाव का कारक ग्रह सूर्य को माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि और सूर्य में शत्रुता का भाव है. ऐसे में पहले भाव में शनि का बैठना व्यक्ति को प्रतिकूल फल दे सकता है. इस भाव में बैठे शनि साहस को कम करते हैं. आलसी और लापरवाह बनाते हैं और शारीरिक परेशानियां देते हैं.
चौथे भाव में
कुंडली के चौथे भाव का कारक ग्रह चंद्रमा को माना जाता है. शनि की इनके साथ भी शत्रुता मानी जाती है. इसलिए चतुर्थ भाव में भी शनि का बैठना अशुभ माना जाता है. इस भाव में बैठे शनि माता के साथ संबंधों को खराब करते हैं. इस भाव में बैठे शनि के कारण करियर क्षेत्र में भी दिक्कतें आती हैं. पारिवारिक जीवन में सुख की कमी हो सकती है.
एकादश भाव में
एकादश भाव को लाभ का भाव भी कहा जाता है. इस भाव के कारक ग्रह गुरु माने जाते हैं. इस भाव में बैठे शनि जातक को आर्थिक परेशानियां देते हैं. रोजगार के लिए कड़ी मेहनत करवाते हैं. परिवार में भी दिक्कतों का सामना करवाते हैं. प्रेम जीवन में बार-बार उतार-चढ़ाव लाते हैं.
शनि के उपाय
शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द और लोहे से बनी चीजों का दान करें. हनुमान चालीसा का निरंतर जप करें. जरूरतमंदों की सेवा करें. शनि के मंत्रों का जप करें. मान्यता है कि इन उपयों को करने से शनि के प्रतिकूल प्रभावों से राहत मिलती है.







