अरुण कुमार साहू
क्या अभ्यर्थियों की जिंदगी में यही होता रहेगा। आखिरकार! कब तक अभ्यर्थी पारदर्शी इंतिहान का इंतजार करें और कब तक यह संभव हो सकेगा की अभ्यर्थी अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के बाद दावे से कहेंगे की वह उक्त पद का आगत समय अधिकारी होगा। या दी हुई प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम अनुसार अपना पद पा सकेगा। अरे! पद पाने की तो बात तो बहुत दूर ही है यहां तो परीक्षा आयोजन में बहुत से रार खड़े हो जाते हैं ढ्ढआधुनिक तकनीकी व कड़े प्रबंधन के बावजूद जिस तरह से प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंधमारी हो रही है ढ्ढ ऐसे में यही लगता है की सब पैसों का खेल बचा है ढ्ढ आयोजन तो बस एक बहाना है ढ्ढ अभी हाल ही में शिक्षक पात्रता परीक्षा को ही ले लीजिए किस तरह से परीक्षा में सेंधमारी हुई इसके प्रमाण भी मिले हैं। प्रमाण स्वरूप शिक्षक पात्रता परीक्षा में सेंधमारी का मामला मेरठ से मिला दूसरा स्थान आप इलाहाबाद के झूसी को ही ले लीजिए। सवाल यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की सेधमारी कब बंद होगी।
आज प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर का लीक होना आम बात हो गया है। आज ही नहीं पूर्ववर्ती सरकारों में भी पेपर लीकेज के मामले आए हैं। पूर्ववर्ती अखिलेश माया के सरकार में भी पेपर लीक की खबरें आती रही है। वर्तमान उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी शिक्षक पात्रता जैसे ही परीक्षा में पेपर लीक का मामला आया है। भले ही सत्ता में आसीन योगी सरकार गैंगस्टर के तहत उन पर कार्रवाई कर रही है। इत्यादि प्रकार से विद्रोहियों पर शिकंजा कसे जा रहे हैं।सवाल यह है कि क्या इस तरह की कार्रवाइयों से आगामी परीक्षाओं में नकेल लग पाएगी। क्या संभव है कि आगामी परीक्षाओं में सेंधमारी बंद हो जाएगी। यह कहना बहुत मुश्किल होगा। मैं इस अपने संपादकीय लेख में कुछ महत्वपूर्ण परीक्षाओं का भी उल्लेख कर रहा हूं। जिसके परीक्षा आयोजन से लेकर उनके परिणाम तक में भी सेंधमारी मामले आए थे। सवाल यह है कि यूपी की सत्ताधारी सरकार परीक्षा में बदमाशों का यह खेल करना कब तक रोक पा रही है। जालसाजी का यह खेल कितनी परीक्षा में हुआ इसका अंदाजा हम जैसे आप विद्यार्थी का लगाना असंभव ही है। इसका अंदाजा मेरे इस संपादकीय लेख का पाठक भी नहीं लगा सकता। क्योंकि यह बहुत ही दुष्कर कार्य है। लेकिन इस बार के उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में आखिरकार जालसाज पूरी तरह सफल नहीं हो पाए। अंतत: पेपर लीक मामला आते ही परीक्षा निरस्त की घोषणा कर दी गई। अब सवाल यह है कि और योग्य और होनहार विद्यार्थियों का क्या होगा जिनके लिए समय रहते अंतिम परीक्षा थी। उन अभ्यर्थियों के लिए यह एक गहरे सदमे की बात हो सकती है।
बहुत से विद्यार्थी ऐसी स्थिति से उबर ना पाने के कारण तनावग्रस्त में पड़ जाते हैं। आखिरकार अभ्यर्थियों के साथ यह खेल कब तक चलता रहेगा इससे पहले भी एक आध परीक्षाओं में जालसाज पूरी तरह सफल नहीं हो पाए और परीक्षा भी रद्द कर दी गई हैं। जैसे 2016 में सब इंस्पेक्टर का पेपर लीक हुआ। 2018 में यूपीपीसीएल का पेपर लीक हुआ। 2018 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक का मामला सामने आया। और बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती अभी तक ऐसे मामले सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं में देखे जाते थे । लेकिन अब इन्हें जालसाजों का खेल इतना लंबा हो गया है की एकेडमिक परीक्षाओं में भी सेंधमारी करने लगे हैं। सन 2022 में यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों को परीक्षा हाल में बैठने के बाद उनको सूचना दी गई कि आज आपका अंग्रेजी का प्रश्न पत्र 24 महकमो में रद्द कर दिया गया है। अत: कहा जा सकता है जालसाजों का धंधा दिन प्रतिदिन फलता फूलता जा रहा है। एक शोधार्थी छात्र होने के नाते शिक्षा जगत से जुड़ी हर पहलू पर लेख लिखना अब तो शौक बन गया है। अभी हाल ही में आयोजित लेखपाल राजस्व की परीक्षा में भी कई जगह पर पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। मेरे इस संपादकीय पृष्ठ में इतने सारे प्रूफ दिए गए हैं जिन को पढक़र लगने लगता है। कि जालसाजी का खेल केंद्र / राज्य की सरकारों के लिए रोक पाना टेढ़ी खीर जैसा ही लगने लगा है।
(लेखक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी हैं)






