नई दिल्ली: नोएडा के गांवों में किसानों को बीते 13 वर्षों में बांटे गए मुआवजे से जुड़ी फाइलों को एसआईटी (विशेष जांच दल) ने खंगालना शुरू कर दिया है। एसआईटी के एक प्रतिनिधि ने प्राधिकरण दफ्तर में आकर फाइलों की जांच शुरू की। एक सप्ताह के अंदर एसआईटी के सभी सदस्यों के भी नोएडा आने की उम्मीद है। इसके बाद जांच में और तेजी आएगी। इस साल सितंबर में प्रदेश सरकार ने गेझा मुआवजा से संबंधित प्रकरण में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। इनमें बोर्ड ऑफ रेवन्यू के चेयरमैन हेमंत राव, एडीजी मेरठ राजीव सभरवाल और मेरठ मंडल की कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे को जांच की जिम्मेदारी दी गई।
एसआईटी ने चार दिन तक नोएडा प्राधिकरण में रहकर मामले की जांच की थी। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एसआईटी के सदस्यों ने तय किया है कि पहले खुद आकर जांच करने के बजाए इस प्रकरण से जुड़ी फाइलों का डाटा तैयार कर लिया जाए, ताकि चीजों को समझने में आसानी हो। इसी क्रम में मेरठ मंडल की कमिश्नर के प्रतिनिधि के रूप में अपर आयुक्त बच्चू सिंह को नोएडा भेजा गया है। प्राधिकरण अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि अपर आयुक्त की तरफ से मुआवजा प्रकरण से संबंधित ग्राम वार और वर्ष वार के हिसाब से जो फाइलें मांगी जा रही हैं, उनको मुहैया कराना शुरू कर दिया है। प्राधिकरण के बोर्ड रूम में अधिकारी ने जांच शुरू की है।
अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी ने अभी वर्ष 2010 से बांटे गए मुआवजा से संबंधित फाइलों की जांच शुरू की है। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मुआवजा से संबंधित जो मामले अलग-अलग न्यायालय में चल रहे हैं, ऐसी करीब 1000 से 1500 तक फाइलें हैं जो जांच के दायरे में आएंगी। ये फाइलें प्राधिकरण के लॉ विभाग के जरिए मुहैया कराई जा रही हैं। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण के बदले बांटे गए मुआवजे से संबंधित फाइलों को भूलेख विभाग से मांगा जा रहा है।
जमीन अधिग्रहण के बदले दी गई मुआवजा राशि को क्रॉस चेक करने के लिए वित्त विभाग से भी रिकॉर्ड मांगना शुरू कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि अगले तीन-चार दिन में मुआवजा से संबंधित इस पूरे रिकार्ड की डिटेल बन जाएगी। इसके बाद कभी भी एसआईटी के सभी सदस्य नोएडा प्राधिकरण आकर जांच शुरू कर देंगे। गौरतलब है कि बीते सालों में किसानों को मुआवजा पहली बार में जमीन अधिग्रहण के तौर पर दिया गया। इसके बाद 64.7 प्रतिशत राशि के रूप में अतिरिक्त मुआवजा दिया। यही नहीं, न्यायालय के आदेश पर भी प्राधिकरण ने काफी गांवों के किसानों को बढ़ाकर मुआवजा दिया।
दो साल पहले एसआईटी गठित
वर्ष 2021 में गेझा गांव में हुए मुआवजा गड़बड़ी का मामला इस साल उच्चतम न्यायालय में पहुंच गया था। उच्चतम न्यायालय ने 14 सितंबर 2023 को प्राधिकरण और शासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह गड़बड़ी सिर्फ विधि अधिकारी स्तर के नहीं कर सकते। इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। न्यायालय की फटकार के बाद इस मामले में प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद दोबारा जांच
उच्चतम न्यायालय की फटकार के बाद एसआईटी ने दोबारा से जमीन अधिग्रहण के बदले बांटे गए मुआवजा से जुड़े मामलों की जांच शुरू की है। न्यायालय ने 24 नवंबर को सुनवाई के दौरान करीब 10-15 साल में बांटे गए मुआवजों के प्रकरणों की जांच का आदेश दिया था। यह रिपोर्ट एसआईटी को चार सप्ताह के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। उस दिन शासन ने सिर्फ गेझा गांव से संबंधित मुआवजा प्रकरण में हुई एसआईटी की जांच रिपोर्ट न्यायालय में रखी थी। सिर्फ एक गांव की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर न्यायालय ने असंतोष जाहिर किया था।
गेझा गांव से गड़बड़ी का मामला खुला
मुआवजा बांटने में गड़बड़ी का सबसे पहले खुलासा वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद गांव में हुआ था। अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश न्यायालय ने एक मामले में दिया था, लेकिन प्राधिकरण के अफसरों ने सांठगांठ कर न्यायालय का लाभ अन्य किसानों को भी दे दिया। प्राधिकरण ने वर्ष 2015 में गेझा तिलपताबाद के किसान रामवती को पात्र न होते हुए भी 7 करोड़ 26 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया। वर्ष 2021 में यह मामला उजागर होने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने प्राधिकरण के दो अधिकारियों व किसान के खिलाफ कोतवाली सेक्टर-20 में मामला दर्ज कराया था। उस समय सहायक विधि अधिकारी वीरेंद्र नागर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद 11 अन्य प्रकरण में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ।







