नई दिल्ली : दिल्ली में एम्स अस्पताल के सर्वर को निशाना बनाने के बाद अब साइबर अपराधियों ने अब ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के सर्वर को हैक करने की कोशिश की है. साइबर अपराधियों ने यह कोशिश 30 नवंबर को की थी. हैरान करने वाली बात ये है कि आईसीएमआर सर्वर को हैक करने के लिए अपराधियों ने एक या दो बार नहीं बल्कि 6 हजार से ज्यादा बार कोशिश की. हालांकि, हैकर्स अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाए.
आईसीएमआर के सर्वर पर लगातार हमलों के बावजूद हैकर्स उसे हैक नहीं कर पाए. सूत्रों की मानें तो आईसीएमआर के सर्वर को हैक करने की कोशिश हॉन्ग कॉन्ग के एक ब्लैक लिस्टेड आईपीए एड्रेस 103.152.220.133. से की गई है. फिलहाल हैकिंग के इस मामले में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) एक डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार कर रहा है.
दिल्ली एम्स और सफदरगंज भी था हैकर्स के निशाने पर
23 नवंबर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उस समय खलबली मच गई थी, जब उसका सर्वर 9 घंटों तक डाउन रहा. एम्स अधिकारियों ने अपने बयान में कहा था कि साइबर अपराधियों ने एम्स के सर्वर पर अटैक किया, जिस वजह से सर्वर पूरी तरह डाउन हो गया.
इसके बाद 2 दिसंबर को अस्पताल के पांच मुख्य सर्वर पर भी फिर साइबर अटैक हुआ. इन साइबर हमलों को लेकर आशंका जताई गई कि यह चीनी हैकरों ने किया है. अभी दिल्ली एम्स का मसला चल ही रहा था कि चार दिसंबर को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल से भी साइबर अटैक की खबरें सामने आईं. हालांकि, यह दिल्ली एम्स की तरह गंभीर अटैक नहीं था.
दिल्ली एम्स को दो कर्मचारी हो चुके हैं सस्पेंड
अस्पतालों के पास काफी संख्या में मरीजों का पर्सनल डाटा होता है. ऐसे में हैकर्स उस डाटा को चुराने की कोशिश कर सकते हैं. दिल्ली एम्स के मामले में 2 कर्मचारियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है. यह दोनों कर्मचारी दिल्ली एम्स में सिस्टम एनालिस्ट का काम करते थे. पहले इन दोनों ही कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. हालांकि दोनों का जो जवाब था उससे अस्पताल प्रशासन संतुष्ट नहीं था, जिसके बाद दोनों को सस्पेंड कर दिया गया.
दूसरी ओर, सफदरगंज पर साइबर अटैक को लेकर अस्पताल के निदेश डॉक्टर बी एल शेरवाल ने बयान जारी किया था. डॉक्टर बी एल शेरवाल ने कहा था कि सफदरगंज पर हुआ अटैक ज्यादा प्रभावी नहीं था. उन्होंने बताया कि इस अटैक से अस्पताल का कुछ तकनीकी हिस्सा सिर्फ प्रभावित हुआ, जिसकी वजह से एक दिन के लिए सर्वर डाउन रहा था.
वहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि हमले में किसी भी मरीज के डाटा को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है. उन्होंने कहा कि एनआईसी और अस्पताल प्रशासन की टीम की मदद से तकनीकी परेशानियों को तुरंत ठीक कर लिया गया था.







