नैनीताल : आठ फरवरी की रात जब उपद्रवियों ने बनभूलपुरा थाना घेरने के साथ आगजनी शुरू की, तब इसमें कई अधिकारी और कर्मचारी फंस गए थे। उपद्रवी थाने में घुसने की कोशिश में थे। पर उनकी ओर से थाने के बाहर की गई आगजनी ही दीवार बन गई, जिसे वे लांघ नहीं सके और थाने में नहीं पहुंच सके।
अगर वे थाने के अंदर पहुंचने के साथ थाने में मौजूद असलहा पाने में सफल हो जाते, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी, क्योंकि थाने से कुछ कदमों की दूरी पर बाजार समेत दूसरे इलाके थे, जहां तक उपद्रव कर आग पहुंच सकती थी।
सूत्रों के अनुसार, बिगड़ते इन हालात और आशंकाओं के मद्देनजर आखिरकार गोली चलाने का फैसला किया गया। आठ फरवरी को टीम मलिक के बगीचा में अतिक्रमण हटाने को पहुंची थी। इसके बाद करीब साढ़े चार बजे से कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया।
विरोध ने देखते-देखते हुए उग्र रूप धारण कर लिया। विरोध की यह आग अतिक्रमण स्थल से लेकर बनभूलपूरा थाने तक पहुंच गई। थाने के बाहर खड़े वाहनों में आग लगाना शुरू कर दिया। इसमें प्रशासनिक, पुलिस के अधिकारी के अलावा पुलिस कर्मी फंस गए।
उपद्रवी थाने में घुसने की कोशिश करने लगे। इससे कर्मियों की जान पर संकट उत्पन्न हो गया। इसके अलावा चिंता भी हुई कि अगर उपद्रवियों के हाथ में थाने में पुलिस का असलहा लग गया तो स्थिति क्या होगी। थाने से कुछ दूरी पर ही दूसरे अन्य क्षेत्र थे। ऐसे में असलहे के साथ उपद्रवियों पर काबू पाना और मुश्किल हो जाता।
बनभूलपुरा हिंसा के मास्टर माइंड का नाम आया सामने
वहीं, बनभूलपुरा हिंसा का मास्टर माइंड बताया जा रहा अब्दुल मलिक पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगी हैं। हिंसाग्रस्त क्षेत्र में पुलिस ने भारी फोर्स के साथ सर्च ऑपरेशन चलाकर दो निर्वतमान पार्षद समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। 60 लोग हिरासत में भी लिए गए हैं। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं।







