नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को वैश्विक एकजुटता और सहयोग के लिए ‘विश्व मित्र’ के रूप में भारत की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया है और बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की वैश्विक पहुंच और व्यापक योगदान को दुनिया के सामने रखा है।
भारतीय विदेश मंत्री ने यह भी कहा, कि दुनिया असमानता के नए रूपों का सामना कर रही है और एक संशोधित संयुक्त राष्ट्र के साथ एक बहुध्रुवीय दुनिया की अत्यधिक आवश्यकता है। युगांडा में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement-NAM) शिखर सम्मेलन में बोलते हुए जयशंकर ने भारत को दुनिया का ‘विश्वमंत्र’ बताया है।
भारतीय विदेश मंत्री ने क्या कहा?
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि “भारत 78 देशों में 600 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का पूरी प्रतिबद्धता के साथ संचालन करता है और उनमें से हर एक प्रोजेक्ट, हमारे भागीदारों पसंद और उनके सम्मान पर आधारित है। जहां तक अफ्रीका का सवाल है, 300 परियोजनाएं और 45,000 प्रशिक्षण स्लॉट हमारी एकजुटता की अभिव्यक्ति बयां करती हैं। यह दुनिया के लिए हमारी एक मित्र के तौर पर या “विश्व मित्र” के रूप में भारत की भूमिका पर जोर देता है, जो आपसी प्रगति के लिए अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों को साझा करने के लिए तैयार है।
भारतीय विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था को बदलने की दिशा में भारत के कदमों के बारे में विस्तार से बताया, जिसमें उन्होंने जी20 में अफ्रीकी संघ (एयू) को शामिल कराने का जिक्र किया, जिससे बहुपक्षवाद का विस्तार हुआ है।
भारतीय विदेश मंत्री ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, कि “जब कोविडका हमला हुआ, तो हमने दुनिया के 100 से ज्यादा देशों को टीका उपलब्ध करवाई। प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में, हम अक्सर विकासशील दुनिया के लिए सबसे पहले मदद के लिए पहुंचते हैं। जी20 की अध्यक्षता करते हुए, हमने ग्लोबल साउथ से ताकत हासिल करने और बुलाने का फैसला किया। विश्व मित्र के रूप में भारत हमेशा मदद साझा करने के लिए मौजूद रहेगा।”
असमानता के नये रूपों से जूझ रही है दुनिया
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि दुनिया “असमानता और वर्चस्व के नए रूपों” से संघर्ष कर रही है और उन्होंने एक संशोधित संयुक्त राष्ट्र के साथ एक बहुध्रुवीय दुनिया का आह्वान किया। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम, दुनिया एक परिवार है” में विश्वास से प्रेरित होकर भारत का दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, कि “कोविड महामारी ने हम सभी को तबाह कर दिया है, जिसके घाव भरने में पीढ़ियां लग जाएंगी। ऐसे संघर्ष चल रहे हैं, जिनका असर दूर-दूर तक महसूस किया जा रहा है। गाजा, विशेष रूप से, हमारी चिंता का केंद्र है।”
उन्होंने कहा, कि “ये परिवर्तन लगातार और नियमित रूप से विघटनकारी होते जा रहे हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने इसका प्रभाव महसूस नहीं किया है।
जयशंकर ने कहा, कि “कर्ज, मुद्रास्फीति और विकास चुनौतियों की तिकड़ी भी विकास पर भारी पड़ रही है… हमने उपनिवेशवाद के जुए को उखाड़ फेंका हो सकता है, लेकिन हम असमानता और वर्चस्व के नए रूपों के साथ संघर्ष कर रहे हैं।”
इजराइल-हमास युद्ध पर क्या बोले जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने टिप्पणी करते हुए कहा, कि इजराइल-हमास युद्ध के मद्देनजर गाजा पट्टी में पैदा हुए मानवीय संकट के लिए एक “स्थायी समाधान की आवश्यकता है जो सबसे कमजोर आबादी को तत्काल राहत दे”। उन्होंने यह भी रेखांकित किया, कि आतंकवाद और बंधक बनाना अस्वीकार्य कृत्य हैं।
युगांडा में गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा, “फिलहाल, गाजा में संघर्ष हमारे दिमाग में स्पष्ट रूप से ऊपर है। इस मानवीय संकट के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है, जो सबसे अधिक प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दे।”
हालांकि, विदेश मंत्री ने आगे बोलते हुए ये भी कहा, कि “यह भी स्पष्ट होना चाहिए, कि आतंकवाद और बंधक बनाना अस्वीकार्य है। साथ ही, सभी राज्यों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि संघर्ष क्षेत्र के भीतर या बाहर न फैले।”







