नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इजरायल दौरा शुरू हो गया है। तेलअवीव पहुंचे पीएम मोदी का इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर रेड कार्पेट स्वागत किया। पीएम मोदी बेन-गुरियन एयरपोर्ट के टारमैक से नेसेट (इजरायली संसद) के हॉल, जेरूसलम इनोवेशन शोकेस और याद वाशेम के हॉल ऑफ रिमेंबरेंस पहुंचेंगे।
2017 के बाद मोदी का ये दूसरा इजरायल दौरा है। लेकिन ये दौरान भारत और इजरायल के बीच के डिफेंस समझौते के लिए याद रखा जाएगा। इजरायली अखबार हेरात्ज की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल और भारत के बीच कुछ ऐसे एडवांस हथियारों के लिए समझौते हो सकते हैं, जो अभी तक इजरायल ने किसी को नहीं दिए हैं।
जुलाई 2017 में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल का अपना पहला दौरा किया था तो उन्होंने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैटेलाइट डेवलपमेंट, खेती और पानी के लिए 13 मिलियन डॉलर के एग्रीमेंट पर साइन किए थे। इसके अलावा 40 मिलियन डॉलर का जॉइंट इन्वेस्टमेंट फंड भी बनाया था। लेकिन इस बार अरबों डॉलर का डिफेंस एग्रीमेंट होने वाला है। ये अहम इसलिए है क्योंकि पिछले साल पाकिस्तान के साथ संघर्ष के बाद भारत में युद्ध को लेकर एक धारणा बनी है कि चीन या पाकिस्तान के साथ कभी भी जंग छिड़ सकती है, लिहाजा हर वक्त तैयार रहना चाहिए।
भारत-इजरायल के बीच किन हथियारों का सौदा?
इजरायली अखबार हेरात्ज ने उच्च सुरक्षा सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि पांच एडवांस हथियारों का सौदा प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे के दौरान हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार और गुरुवार को एयर-डिफेंस सिस्टम के लिए बड़े खरीद एग्रीमेंट पर साइन होने की उम्मीद है, जिसमें राफेल और एल्बिट द्वारा बनाए गए लेजर-बेस्ड सिस्टम, इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज की तरफ से बनाए गये एरो सिस्टम और राफेल द्वारा बनाए गए डेविड्स स्लिंग और आयरन डोम शामिल हैं।
यानि भारत की कोशिश अलग अलग रेंज वाले एयर डिफेंस सिस्टम के लिए समझौता करने की है। हेरात्ज के मुताबिक, भारतीय अधिकारी काउंटर-ड्रोन सिस्टम, खासकर ड्रोन झुंडों से बचाव के लिए आयरन बीम चाहते हैं। ऑटोनॉमस गार्ड ग्रुप में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर निर बर-नतन ने कहा कि “करीब एक साल पहले पाकिस्तान के साथ भारत की 48 घंटे की छोटी-सी लड़ाई से एक बदलाव आया। वे जागने लगे और उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें नई टेक्नोलॉजी पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।”
सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस सिस्टम- इस दौरे का एक अहम हिस्सा “सुदर्शन चक्र” डील को फाइनल करना है। इसमें इजरायल की दुनिया भर में मशहूर आयरन डोम और डेविड्स स्लिंग टेक्नोलॉजी को भारत के देसी एयर डिफेंस ग्रिड में शामिल करना शामिल है। यानि भारत और इजरायल के बीच आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और Arrow सिस्टम के लिए समझौता हो सकता है, जो लंबी दूरी की एडवांस बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में माहिर है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ फतह-2 मिसाइल लॉन्च किया था जिसे हरियाणा के सिरसा के ऊपर बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम से रोका गया था। ये भी इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ही है।
नेक्स्ट-जेन ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम- भारत और इजरायल के बीच एडवांस्ड UAV (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) की खरीद और जॉइंट प्रोडक्शन पर बाचतीच होने की संभावना है। जिसमें भारत की सीमाओं पर ऊंचाई पर निगरानी के लिए हेरॉन TP ड्रोन के लेटेस्ट वर्जन शामिल हैं। भारत इजरायल से एडवांस Heron TP और Heron Mk2 ड्रोन की खरीद और उनके भारत में निर्माण पर समझौता कर सकता है। ये ड्रोन 45 घंटे तक लगातार उड़ान भरने और सीमा पर निगरानी के साथ-साथ हमला करने में भी सक्षम हैं।
आयरन बीम लेजर एयर डिफेंस सिस्टम- मोदी के दौरे के समय इजरायल की नई ‘आयरन बीम’ तकनीक काफी चर्चा में है। ये सिस्टम लेजर के जरिए दुश्मन के रॉकेट और ड्रोन को नष्ट कर देती है। भारत इस अत्याधुनिक लेजर-आधारित हथियार प्रणाली के लिए सहयोग चाहता है क्योंकि यह पारंपरिक मिसाइलों के मुकाबले काफी सस्ती (प्रति शॉट मात्र कुछ डॉलर) पड़ती है। ये ड्रोन स्वार्म से निपटने में माहिर है।
मैरीटाइम सिक्योरिटी और सबमरीन डील- इस डील में नेवल टेक्नोलॉजी में अहम सहयोग होने की संभावना है। खासकर सबमरीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइलों और इलाके के नेवल खतरों का मुकाबला करने के लिए एडवांस्ड सोनार सिस्टम पर फोकस किया जा सकता है।
लंबी दूरी की मिसाइलें- भारत इजरायल के साथ Rampage और Air LORA मिसाइलों को लेकर भी समझौता कर सकता है। रैम्पेज एक हवा से जमीन पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे भारतीय वायुसेना अपने सुखोई-30 और मिग-29 में तैनात करना चाहती है। वहीं, Air LORA हवा से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 400 किमी तक सटीक वार कर सकती है। इन मिसाइलों के भारत में ही ‘को-प्रोडक्शन’ पर बात हो सकती है।
खबर आइसब्रेकर मिसाइल सिस्टम को लेकर भी है। यह भी इजरायल की अगली पीढ़ी की मिसाइल है जो 300 किमी की रेंज तक जमीन और समुद्र दोनों पर लक्ष्य भेद सकती है। यह मिसाइल AI और एडवांस सेंसर से लैस है, जो दुश्मन के रडार को चकमा देने में माहिर है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे में इजरायल और भारत के बीच नेक्स्ट जेनरेशन सुरक्षा समझौता हो सकता है जो भारत के डिफेंस सेक्टर को काफी हद तक बदलकर रख देगा।







