नई दिल्ली: देश में डिजिटल लोन देने वाले मोबाइल ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आसान प्रक्रिया और तुरंत पैसे मिलने का लालच उपभोक्ताओं को खींच रहा है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी नहीं बरती गई तो ऐसे ऐप्स वित्तीय परेशानी और डेटा लीक जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. लेकिन क्या ये वाकई सुरक्षित हैं? एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सावधानी नहीं बरती गई तो ऐसे लोन बड़ी परेशानी बन सकते हैं.
सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि जिस ऐप से आप लोन ले रहे हैं, वह किसी बैंक या आरबीआई से रजिस्टर्ड एनबीएफसी से जुड़ा हो. रिजर्व बैंक अपनी वेबसाइट पर अधिकृत डिजिटल लेंडर्स और लोन सर्विस प्रोवाइडर्स की लिस्ट जारी करता है. किसी भी अनजान ऐप या ऑफिशियल स्टोर से बाहर डाउनलोड किए गए ऐप से बचना चाहिए, क्योंकि ये आपके डेटा और पैसे दोनों को खतरे में डाल सकते हैं.
ऐप की रिव्यू और रेटिंग जरूर पढ़ें
लोन लेने से पहले ऐप की रिव्यू और रेटिंग जरूर पढ़ें. देखें कि यूजर्स ने कहीं छिपे हुए चार्ज, प्राइवेसी के उल्लंघन या हेरासमेंट की शिकायत तो नहीं की है. साथ ही ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी और कस्टमर केयर की डिटेल्स भी जांचें.
बहुत कम ब्याज दर का लालच है रेड फ्लैग
अगर कोई ऐप बिना ज्यादा डॉक्युमेंटेशन के बेहद तेज लोन देने या बहुत कम ब्याज दर का लालच दे रहा है, तो यह रेड फ्लैग है. असली लेंडर हमेशा सही तरीके से केवाईसी करता है और सभी चार्जेस की जानकारी साफ-साफ देता है.
लोन एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें
कई फर्जी ऐप्स शॉर्ट-टर्म लोन पर भारी ब्याज और पेनल्टी लगाकर ग्राहकों को कर्ज के जाल में फंसा देते हैं. इसलिए लोन एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें और कुल लागत समझें.
आरबीआई के Sachet पोर्टल या साइबरक्राइम सेल में करें रिपोर्ट
अगर कभी किसी ऐप से धमकी, हेरासमेंट या दबाव झेलना पड़े, तो इसे तुरंत आरबीआई के Sachet पोर्टल या साइबरक्राइम सेल में रिपोर्ट करें.







