प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
पंजाब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सरकारी हेलीकॉप्टर के उपयोग को लेकर दिसंबर 2025 में एक विवाद सामने आया। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब मुख्यमंत्री दिसंबर के पहले सप्ताह में जापान और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक विदेश यात्रा पर थे।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा के दौरान सोशल मीडिया, विशेषकर फेसबुक पर, कुछ पोस्ट वायरल हुईं। इन पोस्ट में दावा किया गया कि “सीएम के राज्य से बाहर होने के बावजूद पंजाब सरकार का हेलीकॉप्टर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अनधिकृत या संदिग्ध तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। ये दावे कथित तौर पर फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा की गलत व्याख्या पर आधारित थे और हेलीकॉप्टर के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।
सरकार और प्रशासन का पक्ष
पंजाब सरकार के सिविल एविएशन विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि हेलीकॉप्टर का उपयोग एक संवैधानिक पदाधिकारी (constitutional authority) द्वारा आधिकारिक कार्यों के लिए किया गया था, जो पूरी तरह अधिकृत था। सरकार का कहना है कि “सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट भ्रामक, तथ्यहीन और अपमानजनक थीं, जिनका उद्देश्य अफवाह फैलाकर सार्वजनिक अशांति और सामाजिक वैमनस्य पैदा करना था।
लुधियाना साइबर सेल में FIR
- 12 दिसंबर 2025 को लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इस मामले में FIR दर्ज की गई।
- यह शिकायत SHO इंस्पेक्टर सतबीर सिंह द्वारा दर्ज कराई गई, जिसमें सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल से प्राप्त इनपुट का हवाला दिया गया।
- FIR में करीब 10 लोगों और संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है, जिनमें कुछ पत्रकार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, RTI एक्टिविस्ट मनीक गोयल और एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
लगाए गए कानूनी प्रावधान
- मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्न धाराएं लगाई गई हैं।
- धारा 353(1): झूठी अफवाहें फैलाकर सार्वजनिक अशांति पैदा करना।
- धारा 353(2): विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना।
- धारा 61(2): आपराधिक साजिस
फिलहाल मामले की जांच जारी है और सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री की समीक्षा की जा रही है। अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास
RTI एक्टिविस्ट मनीक गोयल ने FIR को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का प्रयास बताया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई हेलीकॉप्टर के उपयोग से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हेलीकॉप्टर का उपयोग पूरी तरह वैध था, तो सरकार इस मुद्दे पर सवाल उठाए जाने से क्यों असहज है।
यह मामला सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत जानकारी के खिलाफ सरकारी कार्रवाई के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितना दम है और किन पर आगे की कानूनी कार्रवाई होती है।







