नई दिल्ली। अनुसूचित जातियों, जनजातियों और संविधान के अपमान की घटनाओं के खिलाफ एक बहुत ही गंभीर मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने युवा समानता फाउंडेशन और आरक्षण विरोधी पार्टी के कार्यकर्ता कृष्ण मोहन राय और आशुतोष कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। नौ अगस्त 2018 को विरोध प्रदर्शन में इन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर आरक्षण मुर्दाबाद, संविधान मुर्दाबाद, एससी-एसटी एक्ट मुर्दाबाद, अंबेडकर मुर्दाबाद आदि के नारे लगाए थे और विरोध प्रदर्शन के दौरान संविधान की प्रतियां फाड़ कर जला दी थी। संसद मार्ग पर यह विरोध प्रदर्शन किया गया था।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के लिए एलजी से मांगी अनुमति
इस बाबत 10 अगस्त 2018 को विभिन्न धाराओं के तहत इन आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। आरोपितों पर मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 196 के तहत पुलिस ने उपराज्यपाल से स्वीकृति मांगी थी ताकि मुकदमे को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाया जा सके। प्रारंभिक प्राथमिकी अखिल भारतीय भीम सेना के राष्ट्रीय प्रभारी अनिल तंवर की शिकायत पर दर्ज की गई थी।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के इरादे से किया था प्रदर्शन
आरोपितों ने विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और शांति भंग करने के इरादे से विरोध प्रदर्शन के वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर अपलोड किए थे। मामले में शामिल अन्य लोगों में अभिषेक शुक्ला, श्रीनिवास पांडे, संतोष शुक्ला और दीपक गौर शामिल थे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। वे सभी दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत पर बाहर हैं।एलजी ने मंजूरी देते हुए कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने पर आरोपित कृष्ण मोहन राय व आशुतोष कुमार के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।







