विकाश शुक्ला
उमरिया (मध्य प्रदेश)। जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक गंभीर मामला उजागर हुआ है। मध्यप्रदेश डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि जांच के दौरान हुई है। इस प्रकरण ने सरकारी धन की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह प्रकरण न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि यह बताता है कि निगरानी तंत्र में चूक किस तरह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
मामले में मिशन के जिला प्रबंधक (कृषि) एवं प्रभारी जिला प्रबंधक (वित्त) महेंद्र कुमार बारसकर के विरुद्ध गबन के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि प्रशिक्षण व्यय और मानदेय के भुगतान में नियमों का पालन नहीं किया गया और सरकारी राशि का गलत तरीके से उपयोग किया गया।
बिना स्वीकृति और दोहरे भुगतान का मामला
विभागीय जांच की गई। जांच में यह सामने आया कि पहले स्वीकृत राशि का भुगतान किए जाने के बाद उसी स्वीकृति आदेश का उपयोग कर दोबारा भुगतान कर दिया गया। इस दोहरे भुगतान के कारण सरकारी खजाने को 1 लाख 43 हजार 4 सौ चालीस रूपये का नुकसान हुआ। वहीं जांच के दौरान यह भी पाया गया कि 1 लाख 36 हजार 6 सौ तिरासी रूपये की राशि बिना किसी सक्षम स्वीकृति के भुगतान कर दी गई। इस तरह कुल मिलाकर दो लाख अस्सी हजार एक सौ तेईस (2,80,123/-) रुपये के गबन का मामला सामने आया है।
दस्तावेज़ों की जांच में खुली पोल
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 से जुड़े बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच दल ने भुगतान प्रक्रिया में कई अनियमितताएँ पाई, जिनमें एक ही बिल पर दो बार भुगतान और बिना वैध आदेश राशि निकालने जैसे मामले शामिल हैं।
एफआईआर दर्ज, पुलिस कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। सूत्रों के अनुसार उमरिया पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है, और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आम लोगों तक लाभ पहुँचाना होता है, लेकिन इस तरह के मामलों से व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। अब देखना यह है कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।







