नई दिल्ली। नया वित्त वर्ष शुरू हुए दूसरा हफ्ता भी बीतने लगा है, अभी तक कई विधायकों ने योजना विभाग को अपनी प्राथमिकताएं नहीं दी हैं। इनमें कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के विधायक शामिल हैं। विधायक प्राथमिकता योजनाओं को बजट पारित होने से पहले ही देना होता है, लेकिन कई विधायकों से ये नहीं मिलीं ताे बजट बुक में दिए खानों को योजना विभाग को खाली छोड़ना पड़ा। केवल सांकेतिक तरीके से इन योजनाओं के लिए 25-25 हजार रुपये का टोकन बजट डाल दिया गया।
नव व्यय अनुसूचित के परिशिष्ट में वास्तविक नई योजनाओं के खानों को खाली छोड़कर इसमें केवल यही लिखा गया है कि विधायक से स्कीम प्राप्त होने पर शामिल किया जाएगा। लघु सिंचाई योजनाओं की बात करें तो इसके लिए डलहौजी, चुराह, हमीरपुर, नूरपुर, जसवां, परागपुर, कुल्लू, आनी, मनाली, करसोग, नाचन, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, मंडी, रामपुर, कसुम्पटी, शिमला ग्रामीण, पच्छाद और दून के विधायकों से प्राथमिकताएं नहीं मिलीं। इसी तरह सड़कों और पुलों की नई योजनाओं के रूप में नूरपुर, जसवां परागपुर, कुल्लू, आनी, करसोग, नाचन, रामपुर, कसुम्पटी और शिमला ग्रामीण से प्राथमिकताएं नहीं आईं।
जलापूर्ति योजनाओं या सीवरेज स्कीमों में भी डलहौजी, चुराह, हमीरपुर, जसवां परागपुर, जयसिंहपुर, कुल्लू, आनी, करसोग, नाचन, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, कसुम्पटी, शिमला ग्रामीण, पच्छाद और कसौली के विधायकों से प्राथमिकताएं नहीं मिलीं। परिवहन की योजनाओं में डलहौजी, चुराह, हमीरपुर, भोरंज, सुजानपुर, नूरपुर, ज्वालामुखी, धर्मशाला, फतेहपुर, देहरा, जसवां परागपुर, जयसिंहपुर, किन्नौर, कुल्लू, बंजार, आनी, मनाली, करसोग, नाचन, सुंदरनगर, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, बल्ह, मंडी, रामपुर, जुब्बल-कोटखाई, शिमला, कसुम्पटी, शिमला ग्रामीण, पच्छाद, शिलाई, दून, नालागढ़, कसौली, चिंतपूर्णी, कुटलैहड़ और हरोली से योजनाएं नहीं मिल सकी हैं। हालांकि, योजना विभाग के संबंधित अधिकारी कहते हैं कि यह प्राथमिकताएं विधायकों की ओर से बाद में भी आती रहती हैं।
इस वित्त वर्ष के लिए विधायक प्राथमिकता की लिमिट पांच करोड़ ही बढ़ी
कई योजनाओं में विधायक प्राथमिकता योजनाओं के वित्तपोषण की सीमा पूरा हो चुकी है। इससे भी कई विधायक अभी नई प्राथमिकताओं को डालने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने इस वित्तपोषण की सीमा को केवल पांच करोड़ रुपये ही बढ़ाया है। यह 195 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये किया है। कई विधायकों की 195 करोड़ रुपये की यह लिमिट पिछले वित्त वर्ष में ही पूरी हो चुकी थी। अब उन्हें 5 करोड़ रुपये की सीमा में रहकर ही नई योजनाएं डालनी होंगी।







