वॉशिंगटन: अमेरिका समेत दुनिया के 22 देशों में कोरोना वायरस के नये वेरिएंट के फैलने का पता चला है। वैज्ञानिकों को पता चला है कि Covid-19 के इस नये वेरिएंट में म्यूटेशन की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा देखी जा रही है। इसने दुनिया भर के पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सर्विलांस रिपोर्ट के मुताबिक इस वेरिएंट का नाम BA.3.2 है और अब अमेरिका के आधे हिस्सों और कम से कम 22 अन्य देशों में इसे पाया गया है।
रिसर्चर्स ने इस वेरिएंट को अनौपचारिक रूप से ‘Cicada’ नाम दिया है। यह उस कीड़े का नाम है जो जमीन के नीचे लंबे समय तक रहने के बाद बाहर निकलता है। वैज्ञानिकों ने वैक्सीन बनाकर कोविड पर करीब करीब नियंत्रण पा लिया है लेकिन एक बार फिर से ये वायरस नये रूप में लौट आया है। यह वेरिएंट सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था। लेकिन उसके बाद यह लंबे समय तक गायब रहा। अब अचानक 2026 की शुरुआत में इसके मामले फिर से बढ़ने लगे हैं इसलिए विशेषज्ञों ने इसे ‘सिकाडा’ नाम दिया है।
कोविड के नया वेरिएंट ‘सिकाडा’ पर क्या पता चला है?
- सिकाडा वेरिएंट में लगभग 70 से 75 म्यूटेशन हैं जो पिछले वेरिएंट्स जैसे JN.1 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हैं।
- इनमें से कई बदलाव स्पाइक प्रोटीन में होते हैं। यह वायरस का वह हिस्सा है जो उसे इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है और यह वैक्सीनेशन या पिछले संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज का मुख्य निशाना होता है।
- यानि इतने ज्यादा म्यूटेशन होने की वजह से यह वैक्सीन या पिछली संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज को चकमा देने में ज्यादा सक्षम हो सकता है।
- अच्छी बात यह है कि अब तक के डेटा के मुताबिक यह पिछले वेरिएंट्स की तुलना में ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा नहीं कर रहा है। अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।
वैज्ञानिकों को अभी तक के रिसर्च से पता चला है कि BA.3.2 में ‘इम्यून एस्केप’ यानि प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता बढ़ गई है। इसका मतलब है कि मौजूदा Covid-19 वैक्सीन या पिछले संक्रमण से बनी एंटीबॉडीज वायरस को बेअसर करने में कम प्रभावी साबित होती हैं। लेकिन इसके बाद भी ये शरीर पर ज्यादा असर नहीं डाल पा रहा है।
वैज्ञानिकों ने कहा है कि पूरी तरह से इस वायरस को समझने के लिए दुनिया के अलग अलग हिस्सों में इसके असर संबंधित डेटा का अभी विश्लेषण करना बाकी है।
‘सिकाडा’ वेरिएंट के लक्षण क्या हो सकते हैं?
इसके लक्षण कोविड के दूसरे लहर के बाद आए ओमिक्रॉन वेरिएंट की तरह ही देखने को मिले हैं। जैसे- गले में तेज खराश इसका सबसे प्रमुख लक्षण है। हल्का बुखार आना और तेज ठंड लगना, सूखी खांसी और थकान, नाक बहना या बंद होना। इसके अलावा एक नया लक्षण भी पता चला है। कुछ मामलों में पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे मतली या दस्त भी देखे गए हैं। US Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के मुताबिक यह पैटर्न इस बात का संकेत हो सकता है कि नियमित जीनोमिक निगरानी में पकड़े जाने से पहले यह वेरिएंट कम स्तर पर ही फैल रहा था।
अमेरिका में BA.3.2 का पहला मामला 27 जून 2025 को सामने आया था जब सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नीदरलैंड से आए एक यात्री के श्वसन सैंपल में इस वेरिएंट की पहचान की गई। इसके बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग और सीवेज के पानी की निगरानी करने वाले नेटवर्क जैसे कई सर्विलांस सिस्टम के जरिए और भी मामले सामने आए हैं। अमेरिका में इस वेरिएंट से संक्रमित पहले तीन मरीजों की पहचान दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच की गई।






