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Home दिल्ली

(नई दिल्ली)नियुक्ति और खाली पद जैसे सवालों का जवाब देने से भी सर्विस विभाग का इन्कार : दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 5, 2022
in दिल्ली
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नई दिल्ली, 05 जुलाई ( आरएनएस) । दिल्ली विधानसभा में विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर राखी बिड़लान ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश की आड़ में दिल्ली विधानसभा के विधायकों की ओर से सर्विस विभाग से पूछे गए नियुक्ति और खाली पद जैसे सवालों का जवाब देने से इंकार कर रही है। विधायकों की तरफ से सर्विसेज विभाग से सवाल पूछे गए कि दिल्ली सरकार में ग्रेड 4 के कितने पद रिक्त पड़े हैं, कितने अधिकारियों को एसडीएम का कार्यभार सौंपा गया, दिल्ली सरकार के प्रत्येक विभाग में स्वीकृत पदों की कितनी रिक्तियां हैं? इन सवालों के जवाब में कहा कि सर्विसेज विभाग विधानसभा के प्रश्न के बारे में उत्तर नहीं दे सकता है। जब भी कोई विधायक इस तरह के सवाल पूछता है तो सर्विस डिपार्टमेंट लिख कर दे देता है कि मुझे यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि सर्विसेज का मामला एमएचए की ओर से  21/05/2015 को जारी अधिसूचना के तहत एक आरक्षित विषय है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह विभाग विधानसभा प्रश्न के बारे में उत्तर नहीं दे सकता है। राखी बिड़लान ने कहा कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर भी जो जानकारी ली जा सकती है वह जानकारी भी इस विधानसभा को केंद्र सरकार क्यों नहीं दे सकती है। सर्विस डिपार्टमेंट यानि कि कर्मचारियों की ट्रासंफर, पोस्टिंग, नियुक्ति आदि का मसला संविधान के तहत दिल्ली की चुनी हुई सरकार के अधीन आता है. सर्विस डिपार्टमेंट अन्य विभागों की तरह इस विधानसभा के प्रति जवाबदेह है। यह संवैधानिक व्यवस्थाओं, चुने हुए विधायकों और इस विधानसभा का अपमान है। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए विधायक राजेश गुप्ता, सोमनाथ भारती और आतिशी की तीन सदस्यीय समिति बनाती हूं, जो 48 घंटे में इस पूरे मामले पर एक रिपोर्ट बनाकर देंगे। इसमें 2015 से पहले इस तरह के सवालों पर सर्विस विभाग की ओर से दिए जाने वाले जवाब को भी शामिल किया जाएगा।

दिल्ली विधानसभा में विधायक राजेश गुप्ता ने  सर्विसेस विभाग की ओर से विधायकों के सवालों का जवाब ना देने का मुद्दा उठाया गया। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष के तौर पर राखी बिड़लान ने विधानसभा में कहा कि यह बहुत महत्तपूर्ण और गंभीर है। सर्विस डिपार्टमेंट यानि कि कर्मचारियों की ट्रासंफर, पोस्टिंग, नियुक्ति आदि का मसला संविधान के तहत दिल्ली की चुनी हुई सरकार के अधीन आता है। सर्विस डिपार्टमेंट अन्य विभागों की तरह इस विधानसभा के प्रति जवाबदेह है। यह विधानसभा दिल्ली के तमाम सरकारी कर्मचारियों का वेतन का बजट पास करती है। इस विधानसभा के एक-एक सदस्य के पास यह अधिकार है कि वह जान सके कि यहां से दिए गए बजट से कितने लोगों को वेतन मिल रहा है, वह क्या काम कर रहे हैं, कितने पद हैं,कितने खाली पड़े हैं आदि? उन्होंने कहा कि सर्विस डिपार्टमेंट जो कि केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी कर असंवैधानिक तरिके से अपने अधीन ले रखा है और इसका मसला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दिल्ली की विधानसभा यह भी नहीं पूछ सकती कि दिल्ली सरकार के किस विभाग में कितने कर्मचारी है? और कितने पद खाली है? जब भी कोई विधायक इस तरह के सवाल पूछता है तो सर्विस डिपार्टमेंट यह लिख कर दे देता है कि मुझे यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि सर्विसेज का मामला एमएचए की ओर से  21/05/2015 को जारी अधिसूचना के तहत एक आरक्षित विषय है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह विभाग विधानसभा प्रश्न के बारे में उत्तर नहीं दे सकता है।

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मैं दिल्ली के विभानसभा के अध्यक्ष के रूप में सर्विस डिपार्टमेंट के इस रूख को संविधान के खिलाफ उठाया गया कदम मानती हूं। इस सदन की जानकारी के लिए मैं पीछले 4 साल के दौरान इसी सदन के  माननीय विधायक सदस्यों द्वारा सर्विस डिपार्टमेंट से पूछे गए कुछ प्रश्नों का यहां जिक्र जरुर करना चाहती हूं। उदाहरण के लिए सुखवीर दलाल ने 2018 में पूछा था कि, दिल्ली सरकार में ग्रेड 4 के कितने पद रिक्त पड़े हैं और इन्हें भरने के क्या प्रयास किए जा रहे है? सर्विस डिपार्टमेंट ने फिर से इसके जवाब में भी वही लिख कर दे दिया। इसी तरह 2018 में जगदीश प्रधान ने पूछा कि दिल्ली सरकार में स्टेनो कैडर की रिस्ट्रक्चरिंग कमेटी की क्या सिफारिशें है और स्टेनों कैडर की कंट्रोलिंग अथॉरिटी कौन है? इस सवाल के जवाब में भी सर्विस डिपार्टमेंट ने वही जवाब लिख कर दे दिया। 2018 में विधायक कर्नल देवेंद्र सेहरावत ने प्रश्न पूछा था कि एसडीएम कापसहेड़ा में दो साल में कितने अधिकारियों को एसडीएम का कार्यभार सौंपा गया। सर्विस डिपार्टमेंट ने फिर से यही लिख के दे दिया।राखी बिड़लान ने कहा कि इसी तरह 2019 में सुखवीर दलाल ने पूछा विभिन्न विभागों द्वारा सर्विस डिपार्टमेंट को भेजे रिक्त पदों की जानकारी दें, जिनके बारे में अभी तक विज्ञापन नहीं दिया गया है और कब विज्ञापन दे रहें हैं। इसके बारे में भी सर्विस डिपार्टमेंट ने अपना रटा रटाया जवाब दोहरा दिया। इसी तरह से पंकज पुष्कर ने 2019 में पूछा कि 31 जुलाई 2019 तक सेवा विभाग से विभिन्न विभागों से रिक्तियों भरने की कितनी अनुमति प्राप्त हुई हैं। इसका जवाब भी सर्विस डिपार्टमेंट ने कह दिया कि इसका जवाब नहीं दिया जा सकता यह रिजर्व सब्जेक्ट है। सोमनाथ भारती ने 2021 में पूछा की दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्तियों का विवरण क्या है? विभागों की आवश्यकताओं के मूल्याकंन के लिए उठाए गए कदम क्या है। इस पर भी सर्विस डिपार्टमेंट ने कह दिया कि इसका जवाब नहीं दिया जा सकता क्योंकि रिजर्व सब्जजेक्ट है। इसी तरह से कई और सवाल हैं। विधायक प्रमिला धीरज टोकस ने 2022 में पूछा कि दिल्ली सरकार के प्रत्येक विभाग में स्वीकृत पदों की कितनी रिक्तियां हैं। ये पद कब स्वीकृत किए गए और कब से रिक्त पड़े हैं। सरकार द्वारा इन रिक्त पदों को भरने हेतु क्या कदम उठाए जा रहे हैं?विधायक राजेश कुमार ने दिल्ली सरकार के अंदर आने वाले विभागों के कर्मचारियों के साथ विवरण और 3 साल में खर्च का विवरण पूछा। दिल्ली सरकार के अंतर्गत कितने विभाग आते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का सूची सहित पूर्ण विवरण दें।

अनिल बाजपेयी ने पूछा कि सरकार के उनके अंदर पिछले 6 सालों से किन विभागों के कितने पद खाली पड़े हैं? उसके भरने के क्या उपाय हो रहे हैं? वर्ष 2014 से 2020 तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार कितने लोग बेरोजगार हैं। पिछले 5 वर्षों में कितने अनुबंधित कर्मचारियों को सरकारी विभाग में पक्का कर दिया गया है? 2022 में विधायक विजेंद्र गुप्ता ने पूछा कि इस समय दिल्ली सरकार में प्रधान व निजी सचिव के कितने पद रिक्त हैं। यदि रिक्त पड़े प्रधान निजी सचिव के पदों को निजी सचिव को पदोन्नत करके भर दिए जाएं तो दिल्ली सरकार के अंतर्गत निजी सचिव के कुल कितने पद रिक्त हो जाएंगे? उन्होंने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि एक विधायक विभानसभा में यह प्रश्न पूछे कि मेरे क्षेत्र में दो साल में कौन कौन व्यक्ति एसडीएम रहे है और सर्विस डिपार्टमेंट यह लिखकर दे दे कि विधायक को यह पूछने का अधिकार नहीं है। यह संविधान में कहां लिखा है। मैं समझती हूं कि यह संवैधानिक व्यवस्थाओं का अपमान है। चुने हुए विधायक और इस विधानसभा का अपमान है।यह विधायकों के बहुत समान्य सवाल है और जायज सवाल हैं। संविधान यह कहां कहता है कि यह विधानसभा बजट तो पास करेगी लेकिन यह नहीं पूछ सकेगी कि किस विभाग में कितने कर्मचारी है और कितने पद खाली हैं। हम यह मानते है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन सूचना के अधिकार के तहत भी एक समान्य आवेदन देकर जानकारी ले सकता है। यह विधानसभा, सरकार से यह जानकारी क्यों नहीं ले सकती

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