नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव के नतीजे आने पर आप की हार के कारणों की समीक्षा शुरू हो गई. आप प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ की ओर से कहा गया है कि वे बैठक कर समीक्षा करेंगे और अपनी कमियों पर काम करेंगे. इस बीच एक सर्वे एजेंसी की एक रिपोर्ट बता रही है कि आखिर कैसे 10 साल तक सत्ता में रहने वाली पार्टी को इस तरह करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ‘लोकनीति-सीएसडीएस’ ने 29 जनवरी और 6 फरवरी के बीच सर्वे कराया था जिसमें 28 विधानसभा सीटों पर 3137 लोगों से बात की गई थी. जिसमें यह बात सामने आई कि कैसे स्थानीय मुद्दे चुनाव में सबसे अहम रहे हैं. इसके अलावा वे आप के विधायकों से नाराज और सरकार से असंतुष्ट थे. चौंकाने वाली जानकारी यह है कि आधे से ज्यादा वोटरों ने चुनाव प्रचार से पहले ही अपना मन बना लिया था कि वे किसे वोट देंगे.
यमुना पर किए वादे पूरे ना करने से मिली हार?
यह चुनाव स्थानीय मुद्दे पर लड़े और जीते गए. दूसरा पीएम मोदी ने विजयी भाषण में यमुना मैया का जिक्र किया. जबकि 2020 में केजरीवाल ने यमुना की सफाई का वादा किया था और कहा था कि अगर वह ऐसा नहीं कर पाए तो जनता उन्हें सत्ता से हटा सकती है.
लोग इन मुद्दों से थे आप से नाराज
केजरीवाल ने चुनाव प्रचार में यहां तक दावा किया कि हरियाणा के पानी में जहर मिलाया गया जिससे जनता प्रभावित नहीं हुई. लोकनीति के सर्वे में 10 में से 8 लोगों ने यमुना नदी का मुद्दा उठाया. जबकि 10 में से गंदगी के मुद्दे पर नाराज थे. 10 में से आठ प्रदूषण और पेयजल की कमी की समस्या उठा रहे थे.
सीएम आवास भी बना मुद्दा
बीजेपी और कांग्रेस द्वारा आप पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी अपना काम किया. सर्वे में दो-तिहाई लोगों ने कहा कि आप सरकार भ्रष्ट है जबकि 28 प्रतिशत ने कहा कि यह बहुत भ्रष्ट है. 10 में चार ने कहा कि सीएम आवास पर बेवजह खर्च किया गया है. इसके साथ ही आप और इसका नेतृत्व विश्वसनीयता के संकट से भी गुजर रहा था. जिस वजह से ना केवल पार्टी बल्कि इसके बड़े नेता तक हार गए.







