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Home जुर्म

पेजर पहला नहीं है…जानलेवा हमलों को अंजाम देने में इजरायल का रहा है लंबा इतिहास

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 18, 2024
in जुर्म, विश्व
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नई दिल्ली: जगह – ईरान की राजधानी तेहरान. तारीख – 27 नवंबर 2020. हाई सिक्योरिटी जोन से 5 ब्लैक गाड़िया गुजरती है. तभी अचानक एक गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगती है. काफिले की गाड़ियां रूकती है. इसी वक्त कुछ ही दूरी पर मौजूद एक पिकअप वैन में जोरदार धमाका होता है. धूल और धुंआ जब छंटता है तो पता लगता है कि इस हमले ने ईरान के टॉप परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की जान ले ली.

ईरान के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं था. हमले का आरोप हमेशा की तरह ईरान ने इजरायल के सिर मढ़ दिया. इजरायल की जैसी अब आदत हो चुकी है. उसने इस हमले की न तो जिम्मेदारी ली और न ही अपनी भूमिका की बात को खारिज किया. आगे चलकर कुछ ठोस सबूत भी नहीं मिले. जो पुख्ता तौर पर कुछ कहा जाता. बस कुछ दावे, थियरी और खुलासे होते रहे.

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मालूम हुआ कि मिशन के लिए इजरायल लगभग एक साल से तैयारी कर रहा था. इजरायल से एक टन वजन वाली AI फीचर से लैस मशीनगन को स्मगलिंग के जरिए तेहरान में मौजूद एजेंट्स तक पहुंचाया गया. फिर पिकअप वैन खरीदी गई. इसके ऊपर मशीनगन फिट की गई. जो रिमोट से कंट्रोल की गई. और फिर जो हुआ वो अब इतिहास है.

इजरायल के अपने दुश्मनों को ठिकाने लगाने की ऐसी तमाम कहानियां है. 17 सितंबर 2024 को लेबनान में अचानक हजारों पेजर फटने की वजह से एक बार फिर शक की सूई इजरायल की तरफ है. इस धमाके में हिजबुल्लाह समूह के 9 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं करीब 3 हजार लोग घायल हैं. पर इजरायल ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इजरायल ने भले ही इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन दूसरे देशों में घुसकर ऑपरेशन को अंजाम देने का, अपने विरोधियों को मारने का उसका लंबा इतिहास है. कभी फोन बम, कभी कंप्युटर वायरस, कान में जहर का इंजेक्शन तो कभी महज टूथपेस्ट का इस्तेमाल.

2021, ईरान के परमाणु संयंत्र पर बम अटैक

इजरायल परमाणु शक्ति से लैस ईरान को अपने वजूद के लिए खतरा मानत है. जबकि ईरान इस परमाणु बम को हासिल करने के लिए किसी भी हद को पार करने के लिए तैयार दिखता है. तो बात 2021 की है. ईरान के नतांज परमाणु सयंत्र पर एक बड़ा धमाका हुआ. हमले की टाइमिंग को देखते हुए इजरायल को दोषी ठहराया गया. क्योंकि हाल ही में वहां अडवांस्ड सेंट्रीफ्यूज लगाए गए थे. सेंट्रीफ्यूज वो मशीन होती है जिसमें यूरोनियम का संवर्धन किया जाता है. बाद में परमाणु उर्जा बनाने के काम में लाया जाता है. सेट्रीफ्यूज के जरिए परमाणु बम भी बनाए जा सकते हैं. धमाके की वजह से सेंट्रीफ्यूजों को बिजली पहुंचाने वाला पावर सिस्टम पूरी तर बर्बाद हो गया.

2004 में हमास संस्थापक की मौत

हमास के आध्यात्मिक नेता अहमद यासीन की मौत का इल्जाम भी इजरायल पर लगा. 1987 में हमास के संस्थापकों में से था. उस पर हमले की दो बार कोशिश हो गई. पहला हमला सितंबर 2003 में हुआ जब इजरायली F-16 ने गाजा शहर में यासीन को निशाना बनाया. घायल हुआ लेकिन जीवित रहा. हालांकि मार्च 2004 को सुबह की अजान की दौरान एक इजरायली हैलीकॉप्टर हमले में नौ अन्य लोगों के साथ यासीन की जान चली गई. बताया गया कि व्हीलचेयर पर धक्का दिए जाने के बाद हुई. यासिन, बचपन में एक दुर्घटना में लकवाग्रस्त हो गया था. उसके उत्तराधिकारी, अब्देल अजीज रान्तिसी, एक महीने से भी कम समय के बाद इजरायली हवाई हमले में मारा गया था.

इजरायल ने जहर दिया फिर खुद ही बचाया

1997 में मोसाद के एजेंट्स ने हमास के प्रमुख खालिद मेशाल को मारने की कोशिश की. मेशाल उस वक्त जॉर्डन में ठहरा हुआ था. दो मोसाद के ऐजेंट नकली कनाडाई पासपोर्ट का इस्तेमाल कर जॉर्डन में दाखिल हुए. और मशाल के कान के पास एक उपकरण रखकर उसे जहर दे दिया. वहां से ऐजेंट भागने की तैयारी में थे ही कि उन्हें पकड़ लिया गया. तभी पता चला कि घटना में इजरायल का हाथ है. मेशाल मौत और जिंदगी के बीच लड़ रहा था. डॉक्टरों ने हाथ खड़े दिए और कहा कि जहर का एंटीडोट नहीं मिला तो मेशाल की जान नहीं बच पाएगी.

इसके बाद जॉर्डन किंग हुसैन ने इजराइल को धमकी दी कि अगर एंटीडोट नहीं भेजा गया तो वह इजरायल के साथ हुआ शांति समझौता तोड़ देंगे और एजेंट्स को फांसी पर लटका देंगे. पहले तो इजरायल ने हमेशा की तरह अपना हाथ होने से इनकार दिया लेकिन फिर परिस्थितियां ऐसी बनीं कि इजरायल को मजबूर होकर एंटिडोट भिजवाना पड़ा. मेशाल बच गया और नाम पड़ा- जिंदा शहीद.

2010 में कंप्यूटर वायरस से ईरान पर हमला

बात जनवरी 2010 की है. उस साल एक नए कंप्यूटर वायरस का पता चला था जिसने दुनिया के तमाम सरकारों को चिंता में डाल दिया था. इस वायरस का नाम था- स्टक्सनेट. बहुत ही जटिल किस्म का कंप्यूटर वायरस. इस वायरसे के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कंप्यूटरों पर हमला किया गया था. इससे हुआ कि योरोनियम गैस को एनरिच करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सेंट्रीफ्यूज लगातार फेल होन लगे. हमला किसने किया ये तो नहीं पता चला लेकिन संदेह इजरायल और अमेरीका की सरकारों पर गया.

मोबाइल फोन से हमास के ‘इंजीनियर’ की हत्या

इंजीनियर के नाम से मशहूर याह्या अब्द-अल-लतीफ अय्याश हमास का मुख्य बम निर्माता था. इजरायल के लिए ये सबसे ज़्यादा वांटेड व्यक्ति था. 1995 में यह पता चलने के बाद कि अय्याश गुप्त रूप से पश्चिमी तट से गाजा चला गया और हमास के लोगों के बीच रह रहा था. इजरायली खुफिया एजेंसियों ने एक ऑपरेशन प्लान किया, क्योंकि उसकी गिरफ्तारी या हवाई हमला नाकाम होने का डर था और इसमें दूसरे नागरिक हताहत हो सकते थे.

इजरायल की कमांडो टीम और जासूसी एजेंसी शिन बेट ने अय्याश के एक भरोसेमंद दोस्त को धोखा देकर उसे बम से भरा सेल फोन दिया. जब अय्याश ने इसका इस्तेमाल किया तो शिन बेट ने उसे विस्फोट कर दिया, जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई. जिस शख्स ने शिन बेट की फोन बदलने में मदद की उसको 1 मिलियन डॉलर और संयुक्त राज्य अमेरिका में शरण दी गई.

टूथपेस्ट से फिलिस्तीनी कमांडर की हत्या

1927 में फिलिस्तिनी शहर सफेद में पैदा होना वाल वादी हद्दाद आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबेरशन ऑफ फिलिस्तीन का प्रमुख था. 1963 के बाद से ही वादी हद्दाद इजरायल के खिलाफ हथियारों के जरिए लड़ने की तैयारी करने लगा. 1970 के दशक तक उसने कई विमानों को हाईजैक किया. इन सब घटनाओं के बाद से ही वो इजरायल के टॉप वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था. और 28 मार्च 1978 को वो मारा गया है. उसके मौत से जुड़ी दो थ्योरी हैं. पहला दावा किया जाता है कि हद्दाद को चॉकलेट में जहर देकर मारा गया तो तो दूसरा दावा है कि उसके टूथपेस्ट में जहर देकर मार डाला.

मैग्नेट बम से न्यूक्लियर साइंटिस्ट की हत्या

इजरायल के ऊपर एक और न्यूक्लियर साइंटिस्ट की हत्या का आरोप है. नाम- मुस्तफा अहमदी रोशन. ईरान का टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट. जिसे जनवरी 2012 में ईरान की राजधानी तेहरान में मारा गया. तो हुआ ये कि हर रोज की तरह मुस्तफा अहमदी रौशन अपने घर से दफ्तर के लिए निकला. तभी उत्तरी तेहरान के इलाके में एक मोटरबाइक पर सवार दो लोगों ने उसकी कार के दरवाजे पर एक मैग्नेट बम लगा दिया. इससे पहले कि वो कुछ भी समझ पाते, अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ और मौके पर मुस्तफा की मौत हो गई.

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