Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

13 दिसंबर 2001: संसद हमला और ऑपरेशन पराक्रम की… भारत ने पीछे क्यों लिए कदम जानिए!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 13, 2025
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
Parliament
13
SHARES
421
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


नई दिल्ली: 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले ने भारत को गहरे सदमे में डाल दिया। इस हमले में पांच आतंकी घुसपैठिए मारे गए, जबकि सुरक्षा बलों और कर्मचारियों सहित 12 लोग शहीद हुए। भारत ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का कार्य माना, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे संगठनों से जुड़ा था। इन संगठनों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का समर्थन प्राप्त था, हालांकि पाकिस्तान ने इनकार किया। हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन पराक्रम’ शुरू किया, जो 1971 के युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य जुटाव था। लेकिन 10 महीने बाद, बिना युद्ध के भारत ने अपनी सेना को पीछे खींच लिया।

इन्हें भी पढ़े

chenab river

सिंधु जल संधि पर ताले के बाद चेनाब पर क्‍या है भारत का प्‍लान?

February 8, 2026
Shivraj singh

भारत-अमेरिका ट्रेड डील भारतीय अर्थव्यवस्था को देगी नई ऊंचाइयां और गति : शिवराज सिंह

February 8, 2026
budget

इस वित्त वर्ष बड़ी योजनाओं पर खर्च नहीं हो पाया आधा भी बजट, किसानों की इस स्कीम में सबसे कम खर्च

February 8, 2026
mohan bhagwat

संघ कहेगा तो पद से इस्तीफा दे दूंगा, पर कभी नहीं लूंगा रिटायरमेंट : मोहन भागवत

February 8, 2026
Load More

हमला और तत्काल प्रतिक्रिया

13 दिसंबर 2001 को दोपहर करीब 1:30 बजे पांच हथियारबंद आतंकी संसद परिसर में घुसे। उन्होंने कार बम और AK-47 से हमला किया, लेकिन दिल्ली पुलिस और CRPF की त्वरित कार्रवाई से बड़ा नुकसान टल गया। भारत ने पाकिस्तान से आतंकी नेताओं की गिरफ्तारी, उनके संगठनों पर प्रतिबंध और वित्तीय संपत्तियों जब्त करने की मांग की।

सैन्य जुटाव (ऑपरेशन पराक्रम)

18-19 दिसंबर को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने फैसला लिया। भारत ने 5-8 लाख सैनिकों को भारत-पाक सीमा और कश्मीर की LoC पर तैनात किया। पाकिस्तान ने भी 3-4 लाख सैनिक उतारे। जुटाव दिसंबर 2001 से शुरू हुआ, जिसमें तोपखाने की गोलीबारी, मिसाइल हलचल और कश्मीर में मोर्टार फायरिंग शामिल थी। भारत ने जनवरी 2002 के मध्य में हवाई हमले (टाइगर स्क्वाड्रन द्वारा) और स्पेशल फोर्सेस की ग्राउंड ऑपरेशन की योजना बनाई, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकी कैंपों को निशाना बनाते।

मई 2002 में कलूचक नरसंहार (14 मई) में 34 लोग मारे गए, ज्यादातर सैनिक परिवार। इससे भारत ने जून में बड़ा हमला प्लान किया, जिसमें पाकिस्तानी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया जाता। लेकिन युद्ध टल गया।

भारत ने कदम क्यों खींचे ?

भारत ने युद्ध न करने और जुलाई-अक्टूबर 2002 तक सैनिकों को पीछे हटाने का फैसला कई कारकों से लिया। यह ‘कोर्सिव डिप्लोमसी’ (दबाव डिप्लोमेसी) का हिस्सा था, लेकिन कई कमियां उजागर हुईं:अंतरराष्ट्रीय दबाव: अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और जापान ने परमाणु युद्ध की आशंका से भारत को रोका।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जापानी पीएम जुनिचिरो कोइजुमी ने संयम बरतने की अपील की। यूएस डिप्टी सेक्रेटरी रिचर्ड आर्मिटेज ने पाकिस्तान पर दबाव डाला। 6 जून 2002 को मुशर्रफ ने क्रॉस-बॉर्डर घुसपैठ रोकने का वादा किया, जिसे यूएस सेक्रेटरी स्टेट कोलिन पॉवेल ने घोषित किया। इससे भारत ने जून 2002 में प्लान रद्द कर दिया। पूर्व NSA ब्रजेश मिश्रा ने कहा, “अमेरिकियों ने कहा—’सर, मुशर्रफ को सुनिए’—हमने कहा ‘ओके’।”

मुशर्रफ के वादे

12 जनवरी 2002 को मुशर्रफ का भाषण, जिसमें उन्होंने आतंकवाद की निंदा की, LeT और JeM पर प्रतिबंध लगाया और कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का वादा किया। भारत संशय में था, लेकिन इसे मानकर हमला टाल दिया। 27 मई 2002 के दूसरे भाषण में भी वादे दोहराए गए। पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने कहा, “परमाणु आयाम तो अस्तित्व में ही नहीं था।”

उच्च लागत और हानि

जुटाव से भारत को 3-4 अरब डॉलर का खर्च हुआ (पाकिस्तान को 1.4 अरब)। 798 सैनिक शहीद हुए (ज्यादातर दुर्घटनाओं, माइन ब्लास्ट और फ्रेंडली फायर से), जो 1999 कारगिल युद्ध (527 शहीद) से ज्यादा था। 1,874 कुल हानि हुई। नागरिक प्रभाव 1,295 माइन से घायल, 1.55 लाख विस्थापित।

स्पष्ट उद्देश्यों की कमी

पूर्व नेवी चीफ सुशील कुमार ने इसे “दंडनीय गलती” कहा। कोई राजनीतिक मिशन या रूल्स ऑफ एंगेजमेंट नहीं थे। वाजपेयी ने जुटाव तो ऑर्डर किया, लेकिन युद्ध के नियम नहीं बताए। इससे पाकिस्तान को तैयारी का समय मिला, और भारत की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ क्षमता कमजोर पड़ी। कुमार ने कहा, “यह पाकिस्तान और चीन को साहस दे गया कि भारत निर्णायक प्रहार नहीं कर सकता।”

परमाणु जोखिम और आंतरिक बहस

दोनों देशों के परमाणु हथियारों से युद्ध की आशंका थी। CCS में मतभेद थे—मिश्रा पूर्ण युद्ध चाहते थे, जबकि सिंह जोखिम को कम आंकते थे। RAW चीफ विक्रम सूद ने “सीमित युद्ध” की संभावना बताई। लेकिन अंततः डिप्लोमेसी हावी हुई। भारत की सेना को 3 हफ्ते लगे, जबकि पाकिस्तान की कैंटोनमेंट सीमा के पास हैं। इससे आश्चर्य का तत्व गया।

रणनीतिक परिणाम और सबक उपलब्धियां

मुशर्रफ के वादों से कुछ दबाव पड़ा 2004 में भारत-पाक संयुक्त बयान में पाक ने आतंकवाद न सहने का वादा किया। भारत ने LoC पर पॉइंट 5070 (बलवान) पर कब्जा किया, जो पाकिस्तानी कमांड को प्रभावित करता। जुलाई-अगस्त 2002 में हवाई हमले किए। हालांकि कोई बड़ा सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं। परमाणु छत्रछाया में सीमित युद्ध संभव था, लेकिन डिप्लोमेसी ने इसे रोका। ‘कोल्ड स्टार्ट’ डॉक्ट्रिन विकसित हुई—तेज मोबिलाइजेशन के लिए। सर्दियों में ड्रिल बढ़ाईं। ऑपरेशन ने दिखाया कि जुटाव बिना स्पष्ट लक्ष्य के महंगा साबित होता है।

यह घटना भारत की ‘स्ट्रैटेजिक रिस्ट्रेंट’ नीति का उदाहरण है, लेकिन कई सवाल छोड़ गई। 2025 में, 24वीं वर्षगांठ पर, यह याद दिलाता है कि आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता जरूरी है, लेकिन युद्ध से पहले डिप्लोमेसी की भूमिका अहम।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

अमेरिका में लगातार बिगड़ती आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति

September 12, 2024
बगलिहार बांध

बगलिहार बांध: भारत का जल शक्ति हथियार, जिससे थर्राता है पाकिस्तान!

May 5, 2025
Minister Anil Bij

सर्वदलीय गौरक्षा मंच ने मंत्री अनिल बिज को दिया सीएम बनने का आशीर्वाद

December 18, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • सिंधु जल संधि पर ताले के बाद चेनाब पर क्‍या है भारत का प्‍लान?
  • माता वैष्णो देवी के आसपास भी दिखेगा ‘स्वर्ग’, मास्टर प्लान तैयार!
  • ग्रेटर नोएडा में चल रहा था धर्मांतरण का खेल, 4 गिरफ्तार

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.