प्रकाश मेहरा
बिहार विशेष
भोजपुर : बिहार में विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से चल रही ‘वोटर अधिकार यात्रा’ इस समय भोजपुर जिले के आरा में पहुंच चुकी है। यात्रा के तहत वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव मुख्य वक्ता होंगे। लेकिन इस कार्यक्रम से पहले ही एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
कुर्सियों पर क्यों लिखा था एनडीए नेताओं का नाम ?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा गया कि “सभा स्थल पर जो कुर्सियाँ लगाई गई हैं, उनमें से कई पर एनडीए नेताओं के नाम चिपके हुए हैं। यानी जिन सीटों पर विपक्षी गठबंधन के नेताओं, कार्यकर्ताओं या समर्थकों को बैठना चाहिए था, उन पर सत्ताधारी एनडीए के नेताओं के नाम दिखाई दिए- जैसे कि कुछ स्थानों पर ‘भाजपा जिला अध्यक्ष’, ‘जेडीयू विधायक’ आदि नाम।
इस असमंजस ने आयोजकों को भी चौंका दिया और विपक्षी नेताओं ने इसे “साजिश” या “सिस्टम के भीतर सेंधमारी” करार दिया है।
क्या कह रहे हैं INDIA गठबंधन के नेता ?
राजद और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि “यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिससे कार्यक्रम को बदनाम किया जाए या भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जाए। उन्होंने आशंका जताई है कि प्रशासन या कार्यक्रम से जुड़ी एजेंसियों के कुछ हिस्सों ने जानबूझकर यह गड़बड़ी की है।
तेजस्वी यादव के करीबी एक नेता ने कहा “यह सिर्फ नाम की गलती नहीं है, यह दर्शाता है कि सिस्टम के अंदर से कोई इस यात्रा को विफल करने की कोशिश कर रहा है।”
प्रशासन की सफाई क्या है ?
स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कुर्सी सप्लाई करने वाले ठेकेदार या इवेंट मैनेजमेंट टीम की गलती हो सकती है, जिसने पहले किसी एनडीए कार्यक्रम में उपयोग हुई कुर्सियाँ बिना साफ किए यहां भेज दीं।
यदि यह महज लापरवाही है, तो भी यह एक बड़ी प्रशासनिक चूक मानी जा रही है, खासकर इतने बड़े और संवेदनशील राजनीतिक आयोजन में।
राजनीतिक माहौल गर्म
बिहार में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच यह घटना और भी अहम हो जाती है। विपक्ष इसे सरकार पर हमला करने के नए मौके के तौर पर देख रहा है, वहीं सत्ताधारी एनडीए इसे “विपक्ष की नौटंकी” बता सकता है।
एक छोटी चूक या सुनियोजित चाल ?
INDA गठबंधन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना और मतदाताओं को जागरूक करना है। लेकिन ऐसे में यदि कार्यक्रम स्थल पर विपरीत राजनीतिक दल के नेताओं के नाम वाली कुर्सियाँ दिखाई दें, तो यह निश्चित रूप से एक गंभीर मामला बन जाता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इसकी जांच कराता है या नहीं, और यह मुद्दा चुनावी विमर्श का हिस्सा बनता है या नहीं।