प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
बरनाला (पंजाब)। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को पंजाब के बरनाला में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम रैली’ में पार्टी के अंदरूनी हालात पर खुलकर बात करते हुए प्रदेश कांग्रेस नेताओं को कड़ी चेतावनी दी। रैली का मुख्य फोकस केंद्र सरकार की नीतियों—विशेषकर मनरेगा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील—का विरोध था, लेकिन राहुल गांधी का पार्टी एकता पर दिया गया संदेश सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
टीम वर्क पर जोर, गुटबाजी पर सख्त रुख
राहुल गांधी ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि पार्टी में अनुशासन और टीम वर्क सर्वोपरि है। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए कहा, “काम टीम वर्क से होता है। एक अकेला खिलाड़ी खेल नहीं जीत सकता।” “टीम प्लेयर बनो, वरना हम तुम्हें रिजर्व में बैठा देंगे।” “तुम कितने भी बड़े क्यों न हो, पार्टी से बड़ा कोई नहीं है।” “अगर तुम टीम प्लेयर नहीं बने, तो खड़गे जी और मैं तुम्हें ठीक कर देंगे।”
उनका यह बयान मंच पर मौजूद पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं—प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वड़िंग—की ओर संकेत करता हुआ माना गया। पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से गुटबाजी और आपसी खींचतान की खबरें आती रही हैं। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को एकजुट करना पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकता माना जा रहा है।
मनरेगा और किसानों के मुद्दों पर केंद्र सरकार पर हमला
रैली के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए सुरक्षा कवच है और इसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का कांग्रेस विरोध करेगी। भारत-अमेरिका ट्रेड डील का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे किसानों के लिए “डेथ वारंट” करार दिया और आरोप लगाया कि यह समझौता देश के छोटे किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ है।
रैली के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि राहुल गांधी का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—“टीम को जीतना है, किसी एक व्यक्ति को नहीं। सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा।” वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी का प्रमाण बताया और कहा कि पार्टी पहले अपने संगठन को संभाले।
2027 की तैयारी का संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “यह चेतावनी केवल अनुशासनात्मक संदेश नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी का संकेत भी है। कांग्रेस नेतृत्व पंजाब में संगठन को मजबूत और एकजुट कर चुनावी रणनीति को धार देने की कोशिश में जुटा है। बरनाला की इस रैली ने जहां मनरेगा और किसानों के मुद्दों को राष्ट्रीय बहस में लाने की कोशिश की, वहीं पार्टी के भीतर एकजुटता का सख्त संदेश देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।







