नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सेवा विभाग ने दिल्ली डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन (डीडीसीडी) के तीन गैर-आधिकारिक सदस्यों को दिए जाने वाले सचिव स्तर के वेतन पर सवाल उठाए हैं। सेवा विभाग ने वित्त और योजना विभागों से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने फरवरी 2015 में कुशल प्रशासन और समग्र विकास के लिए दिल्ली सरकार के थिंक-टैंक के रूप में डीडीसीडी की स्थापना थी।
अधिकारियों ने रविवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विशेष सचिव (सेवाएं) ने एक सितंबर को वित्त और योजना विभागों के प्रमुख सचिवों को लिखे एक पत्र में उनसे सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए भी कहा है, जो इस मामले में उठाए जा सकते हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने इस मामले को लेकर उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना पर दिल्ली सेवा अधिनियम, 2023 की आड़ में दिल्ली को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया है। सरकार ने एक बयान में कहा कि डीडीसीडी के वर्तमान गैर-आधिकारिक सदस्यों को 29 अप्रैल, 2016 के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार नियुक्त किया गया था, जिसे तत्कालीन उपराज्यपाल ने मंजूरी प्रदान की थी।
पत्र में इन अधिकारियों के नाम
सेवा विभाग के पत्र में जिन नामों का उल्लेख है उनमें- डीडीसीडी के तीन गैर-आधिकारिक सदस्य गोपाल मोहन और अश्वथी मुरलीधरन और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी विजया चंद्र वुप्पुतुरी थे। पत्र में कहा गया है कि मोहन और मुरलीधरन को भारत सरकार के एक सचिव के बराबर 3,80,250 रुपये का सकल मासिक वेतन मिलता था, और वुप्पुतुरी को 3,19,500 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जाता था।
फरवरी 2015 में की गई थी डीडीसीडी की स्थापना
डीडीसीडी की स्थापना कुशल प्रशासन और समग्र विकास के लिए दिल्ली सरकार के थिंक-टैंक के रूप में फरवरी 2015 में की गई थी। सेवा विभाग के पत्र में कहा गया है कि डीडीसीडी के गैर-आधिकारिक सदस्यों के वेतन का निर्धारण भारत सरकार के सचिव के बराबर ‘बिना किसी औचित्य या सक्षम प्राधिकारी, यानी मुख्यमंत्री की स्पष्ट मंजूरी के’ किया गया था।
‘आप’ सरकार ने आरोप लगाया कि ”एलजी और केंद्र सरकार दिल्ली के लोगों के लिए किए गए अच्छे काम को रोकना चाहते हैं। इससे पहले भी, उन्होंने डीडीसीडी के उपाध्यक्ष को अवैध रूप से हटा दिया था। डीडीसीडी ने दिल्ली के लोगों के हित में बहुत सारे काम किए हैं, इसलिए एलजी और केंद्र सरकार इसे पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।”
1 रुपये से बढ़ाकर 3.80 लाख किया मासिक वेतन
सेवा पत्र में कहा गया है कि दिल्ली कैबिनेट ने 2015 में डीडीसीडी के तीन गैर-आधिकारिक सदस्यों को 1 रुपये का मानदेय देने का फैसला किया था। हालांकि, फरवरी 2016 में, कैबिनेट ने निर्णय लिया कि गैर-आधिकारिक सदस्यों को भारत सरकार के सचिव के बराबर माना जाएगा।
सेवा पत्र में कहा गया है कि 24 फरवरी, 2016 के एक कैबिनेट फैसले ने गैर-आधिकारिक सदस्यों की मानद स्थिति को समाप्त कर दिया और एक निश्चित वेतन प्रदान किया जो भारत सरकार में सचिव के बराबर या मुख्यमंत्री द्वारा तय किया जा सकता है।







