मॉस्को: रूस ने कहा है कि वो भारत तो LNG सप्लाई के लिए तैयार है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस एलिपोप ने कहा है कि रूस ‘भारत को LNG सप्लाई देने के लिए तैयार है।’ उन्होंने कहा है कि प्रतिबंधों की वजह से पिछले कॉन्ट्रैक्ट में रूकावट आई थी। रूस की न्यूज एजेंसी आरटी न्यूज को दिए गये एक इंटरव्यू में रूसी राजदूत ने कहा कि ‘कुछ साल पहले भारत को LNG सप्लाई के लिए इंतजाम और कॉन्ट्रैक्ट्स हुए थे लेकिन प्रतिबंधों की वजह से उनमें रुकावट आ गई थी।’ रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव का यह बयान संकेत देता है कि रूस अब भारत को सीधे LNG सप्लाई करने का नया रास्ता तलाश रहा है।
आपको बता दें कि भारत की कंपनी GAIL ने रूस की सरकारी तेल और गैस कंपनी गजप्रोम के साथ साल में 2.5 मिलियन टन LNG खरीदने के लिए 20 सालों का एक लंबा करार किया था। लेकिन यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर भारी भरकम प्रतिबंध लगा दिए। रूसी कंपनी गजप्रोम की जर्मन यूनिट Gazprom Germania को जर्मनी ने अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद रूस ने उस इकाई को गैस देना बंद कर दिया जिससे भारत की सप्लाई रुक गई।
भारत के दोस्त ने खोजा नया कूटनीतिक रास्ता
रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने इससे पहले बुधवार को भारत की तरफ से रूसी कच्चे तेल की खरीद का ज़ोरदार तरीके से बचाव किया था। उन्होंने जोर देकर कहा था कि नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। रूसी न्यूज चैनल RT India से बात करते हुए अलीपोव ने कहा कि भारत का रुख विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले ही साफ कर चुके हैं। राजदूत ने कहा कि “मुझे लगता है कि भारतीय अधिकारियों ने इसका जवाब पहले ही दे दिया है। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस पर जवाब दिया था कि भारत को किसी से भी किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है।’
भारत ने गजप्रोम के साथ जो समझौता किया था उसके मुताबिक रूस भारत को लगातार 20 सालों तक गैस की सप्लाई करता। इस समझौते के तहत रूसी कंपनी हर साल 25 लाख टन एलएनजी की सप्लाई भारत को करती। इसे दुनिया के सबसे सस्ते एलएनजी सौदों में से एक माना गया था जिसकी अनुमानित कीमत पूरे अनुबंध काल यानि पूरे 20 सालों के लिए करीब 25 बिलियन डॉलर थी। लेकिन पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए गये प्रतिबंधों की वजह से इस डील पर असर पड़ा।
भारत को गैस सप्लाई में रूसी कंपनी को थी परेशानी
साल 2022 में गजप्रोम की सिंगापुर यूनिट पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से बंद हो गई। जिसका हवाला देकर रूसी कंपनी नमे भारत को शिपमेंट भेजने में असमर्थता जताई थी जिससे उस समय कई कार्गो की सप्लाई रुक गई थी। लेकिन ईरान युद्ध शुरू होने के बाद जब भारत में गैस-सिलवेंडर के लिए मारा-मारी हो रही है तो रूस एक संकटमोचक के तौर सामने आया है। रूस से गैस की आपूर्ति भारत के नागरिकों को काफी राहत दे सकती है।







