प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
कलकत्ता : कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को 5 जून 2025 को अंतरिम जमानत दे दी है। यह जमानत उनके खिलाफ “ऑपरेशन सिंदूर” से संबंधित एक वीडियो में कथित सांप्रदायिक टिप्पणी और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों के मामले में दी गई। कोलकाता पुलिस ने उन्हें 31 मई 2025 को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था और बाद में कोलकाता की एक अदालत ने 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
क्या हैं जमानत की शर्तें !
देश छोड़ने पर रोक: शर्मिष्ठा को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़ने की अनुमति नहीं है। उन्हें 10,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी। कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। कोलकाता पुलिस को शर्मिष्ठा द्वारा गिरफ्तारी से पहले अपनी सुरक्षा को लेकर दर्ज शिकायत पर उचित कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल
शर्मिष्ठा पर आरोप है कि उनके इंस्टाग्राम वीडियो में “ऑपरेशन सिंदूर” (पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की कार्रवाई) पर टिप्पणी करते हुए एक समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। कोलकाता के गार्डन रीच पुलिस थाने में 15 मई को उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, और शांति भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि शर्मिष्ठा को कई नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वह हर बार फरार रही। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, और उन्हें गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया। शर्मिष्ठा ने वीडियो हटाने के बाद 15 मई को सार्वजनिक माफी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई की।
सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर की !
3 जून 2025 को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस पार्थसारथी चटर्जी ने कहा कि “भारत जैसे विविध देश में सार्वजनिक मंच पर बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका को उस समय खारिज कर दिया था और पश्चिम बंगाल सरकार से केस डायरी पेश करने को कहा था। 5 जून को जस्टिस राजा बसु की बेंच ने सशर्त अंतरिम जमानत मंजूर की।
शर्मिष्ठा के वकील मोहम्मद समीमुद्दीन ने अलीपुर महिला सुधार गृह में स्वच्छता की कमी और बुनियादी सुविधाओं (जैसे अखबार, पत्रिकाएं) के अभाव की शिकायत की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि शर्मिष्ठा को किडनी स्टोन की समस्या है और जेल में उन्हें अन्य कैदियों से धमकियां मिल रही हैं। कोर्ट ने 4 जून तक इस पर रिपोर्ट मांगी थी।
भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और अन्य नेताओं ने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी को “तुष्टिकरण” की नीति का हिस्सा बताया और ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। वहीं, कोलकाता पुलिस ने इसे देशभक्ति से नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाएं आहत करने से जोड़ा। शर्मिष्ठा के खिलाफ शिकायत करने वाले वजाहत खान के खिलाफ भी कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज की गई, जिसमें उन पर मां कामाख्या और भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है। यह शिकायत अभी एफआईआर में तब्दील नहीं हुई है।
शर्मिष्ठा पनोली को अंतरिम जमानत मिलना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। कोर्ट ने उनकी सुरक्षा और जांच में सहयोग पर जोर दिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस को और तेज कर सकता है।







