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Home राजनीति

पश्चिम बंगाल में SIR की शुरुआत, मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 29, 2025
in राजनीति, राज्य, राष्ट्रीय
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special intensive revision
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प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


पटना: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चले विवाद के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी इसकी तैयारी जोरों पर है। चुनाव आयोग (ECI) ने राज्य सरकार को निर्देश जारी कर दिए हैं और अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह कदम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने का प्रयास है, लेकिन राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इसका कड़ा विरोध कर रही है।

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SIR क्या है और पश्चिम बंगाल में क्यों शुरू हो रहा है ?

SIR मतदाता सूची का एक विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर वोटरों के दस्तावेजों की जांच करते हैं। इसका उद्देश्य फर्जी, मृत या अवैध नामों को सूची से हटाना है, ताकि चुनाव निष्पक्ष हों। बिहार में यह प्रक्रिया जुलाई 2025 में शुरू हुई थी, जहां करीब 65 लाख वोटरों के नाम काटे गए, मुख्य रूप से प्रवासी मजदूरों और सीमावर्ती जिलों से। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी निगरानी की है और आधार, वोटर आईडी व राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को मान्य बताया है।

पश्चिम बंगाल में SIR की शुरुआत का कारण

राज्य में 2026 विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए ECI ने इसे प्राथमिकता दी है। आयोग के सूत्रों के अनुसार, SIR सबसे पहले उन राज्यों में होगा जहां चुनाव नजदीक हैं, जैसे पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी। बंगाल में अवैध घुसपैठ (खासकर बांग्लादेश से) के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। पूर्व कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया है कि “ममता बनर्जी सरकार ने 30-40 लाख फर्जी वोट बनाए हैं। BJP इसे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने का माध्यम बता रही है। ECI ने 8 अगस्त 2025 को राज्य को पत्र भेजा, और 27-28 अगस्त को मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने मुख्य सचिव मनोज पंत को निर्देश दिए।

तैयारियां जोरों पर-अधिकारियों की भर्ती शुरू

चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं:24 घंटे के अंदर नियुक्तियां पूरी करें: निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO) की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से हो। ERO के लिए डिप्टी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी, और AERO के लिए SDO स्तर के। यदि उपलब्ध न हों, तो वरिष्ठ WBCS अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वर्तमान में ERO के 15-16 पद और AERO के 500+ पद रिक्त हैं।

आधिकारिक घोषणा अभी बाकी !

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भर्ती पहले से चल रही है, जिसे 29 अगस्त (शुक्रवार) तक पूरा करना है। राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या 80,000 से बढ़ाकर 95,000+ करने का लक्ष्य है। इसके लिए BLO पर्यवेक्षक और ‘रिजर्व’ पदों पर भी भर्ती होगी। 29 अगस्त शाम 5 बजे तक ECI को प्रभावी रिपोर्ट भेजनी है। जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और DM को पत्र भेजा गया है। SIR की पूरी प्रक्रिया अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकती है, लेकिन आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। ECI ने कहा है कि “राज्य सरकार से बिना चर्चा के प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई।”

राजनीतिक विवाद और विरोध

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR को ‘NRC का बहाना’ बताया और कहा, “जब तक मैं जिंदा हूं, किसी को लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।” उन्होंने BJP पर ‘भाषाई आतंक’ फैलाने का आरोप लगाया। TMC छात्र परिषद की सभा में ममता ने लोगों से फॉर्म न भरने की अपील की। अभिषेक बनर्जी ने भी ECI पर BJP के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। TMC का दावा है कि यह बंगालियों को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश है।

BJP का पक्ष

BJP नेता दिलीप घोष ने कहा, “SIR से 1 करोड़ फर्जी वोटर छंट जाएंगे, TMC सरकार गिर जाएगी।” सुवेंदु अधिकारी ने रोहिंग्या घुसपैठ का मुद्दा उठाया। BJP का कहना है कि TMC भ्रष्टाचार और घुसपैठ छिपाने के लिए विरोध कर रही है।

कांग्रेस और RJD ने बिहार में इसका विरोध किया, लेकिन बंगाल में TMC अकेले आगे है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “बंगाल में अभी SIR शुरू नहीं हुआ, लेकिन राज्य के वकील गोपाल शंकर नारायण ने ECI के पत्र का हवाला देकर चिंता जताई।

बिहार से तुलना और संभावित प्रभाव

बिहार में SIR से 65 लाख नाम कटे, लेकिन मुख्य रूप से पटना, पूर्वी चंपारण जैसे गैर-सीमावर्ती जिलों से। विपक्ष ने इसे ‘वोटर हटाने की साजिश’ कहा, लेकिन ECI ने इसे साफ किया। बंगाल में प्रभाव ज्यादा हो सकता है, क्योंकि सीमा राज्य होने से घुसपैठ के आरोप मजबूत हैं। पूर्व CM हिमंता बिस्वा सरमा ने असम से बंगाल के किसानों को NRC नोटिस भेजने का मुद्दा उठाया। यदि SIR पूरा हुआ, तो TMC के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, जो 2026 चुनाव को प्रभावित करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि “व्यापक नाम कटौती पर हस्तक्षेप करेगा।”

SIR की तैयारियां तेज

पश्चिम बंगाल में SIR की तैयारियां तेज हैं, और अधिकारियों की भर्ती 29 अगस्त तक पूरी होनी है। यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का प्रयास है, लेकिन राजनीतिक तनाव बढ़ा रही है। TMC विरोध रैली कर रही है, जबकि BJP इसे स्वागत योग्य बता रही है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यदि कोई अपडेट आता है, तो स्थिति बदल सकती है।

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