नई दिल्ली। मरीजों की यह सर्जरी पूरी तरह से निशुल्क की गई। रोबोट की मदद से सर्जरी में सटीकता बढ़ी, कम चीर-फाड़ और खून का रिसाव बेहद कम देखने को मिला है। एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन्स विभाग के सर्जिकल ब्लॉक में 2024 में पांच नवंबर को पहली बार दा विंची रोबोट की मदद से रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की गई थी।
इस संबंध में एम्स में मंगलवार को प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। एम्स में रोबोटिक सर्जरी के लिए चौथी जेनरेशन के आठ रोबोट है। जिसमें दो रोबोट का इस्तेमाल प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा है। सर्जिकल डिसिप्लिन्स विभाग प्रमुख डॉ. सुनील चंबर ने कहा कि रोबोटिक सर्जरी से चीरफाड़ कम और मरीज जल्दी से ठीक होता है।
सर्जरी की मदद से डॉक्टरों को ऑपरेशन के दौरान थ्री-डायमेंशनल विजन मिलता है। जिससे मुश्किल सर्जरी भी ज्यादा आसान तरीके से हो जाती है। खासतौर ऐसे मामलों में जहां ओपन सर्जरी के दौरान सर्जरी करनी में दिक्कत आती है, वहां पर रोबोटिक सर्जरी काफी कारगर है।
डॉ. सुनील चंबर ने बताया कि विभाग ने 13 महीने में एक हजार सर्जरी कर कामयाबी हासिल की है। देश के किसी दूसरे संस्थान में इतनी तादाद में सर्जरी नहीं की गई है। सर्जरी आमतौर पर ओपन और लेप्रोस्कोपी होती है। गॉल ब्लैडर की ओपन सर्जरी कराने वाले मरीज को पांच से सात दिन में डिस्चार्ज किया जाता है। जबकि लेप्रोस्पोपी से सर्जरी करने पर दो दिन में और रोबोट से सर्जरी कराने पर एक दिन में छुट्टी मिल जाती है।







