चंबा। हिमाचल प्रदेश में पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। पर्यटक तो बड़ी संख्या में वादियों का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें टैक्सी ड्राइवरों की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, हिमाचल के चंबा में टैक्सी किराया निर्धारित न होने से लोग टैक्सी चालकों के मनमाने किराए से काफी परेशान हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब व मुसीबत में फंसे लोगों को उठानी पड़ रही है।
रात के समय व देर-सवेर के अलावा आपात स्थिति में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने के लिए मजबूरन टैक्सी का ही सहारा लेना पड़ता है, लेकिन किराया निर्धारित न होने से टैक्सी चालक भी लोगों की मजबूरी का फायदा उठा कर मनमाना किराया मांगते हैं। जिसे चुका पाना कई गरीब लोगों के बस में नहीं हैं।
चंबा वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य ओमप्रकाश, दर्शन कुमार, सत्य प्रसाद, विजय ठाकुर, निक्कू राम, सुरेश कुमार, चैन लाल, धर्मपाल के अलावा महेंद्र कुमार, देस राज, हेम सिंह, शक्ति प्रसाद सहित अन्य का कहना है कि चंबा में न तो लोकल के लिए टैक्सी किराया निर्धारित है, ओर न ही टांडा, शिमला, चंडीगढ़, पठानकोट सहित किसी अन्य जिलों के लिए किराया फिक्स किया गया है।
मनचाहा पैसा वसूल रहे टैक्सी ड्राइवर
रात के समय व देर-सवेर नए बस अड्डे से मेडिकल कॉलेज व शहर सहित अन्य स्थानों पर पहुंचने के लिए शहर तक पहुंचने के लिए भी उन्हीं की मर्जी पर लोगों को निर्भर रहना पड़ रहा है। टैक्सी का किराया निर्धारित न होने से लोगों को परेशानियां उठानी पड़ रही है। देर शाम अल सुबह व रात के समय चंबा बस स्टैंड पहुंचने के बाद रात के शहर व मेडिकल पहुंचने के लिए सामान के साथ यात्रियों को को टैक्सी के सिवाय कोई भी सुविधा नहीं हैं।
टैक्सी के रेट निर्धारित करने की उठी मांग
चंबा से टांडा, शिमला व चंडीगढ़ के लिए रेफर मरीजों को ले जाने के लिए आपातकालीन स्थिति में रोगी सेवा न मिल पाने से स्वजनों को टैक्सी का ही सहारा लेना पड़ता है। लेकिन किराया फिक्स न होने से महंगे पेट्रोल व डीजल की बात कह कर टैक्सी चालक कई गुना किराया वसूल कर रहे हैं।
पर्यटकों की सहूलियत को देखते हुए पर्यटन स्थल खज्जियार, डलहौजी, साहो, जम्मुहार, चंडीगढ़, शिमला जैसे शहरों के लिए भी टैक्सी के रेट निर्धारित करना अनिवार्य है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि चंबा लोकल के अलावा टांडा, शिमला व चंडीगढ़ सहित अन्य स्थानों के लिए जायज दरों के हिसाब से टैक्सी किराया निर्धारित किया जाए। जिससे कि टैक्सी चालकों भी घाटे में न हो और गरीब लोगों को भी भारी भरकम किराया देने के लिए मजबूर न होना पड़े।







