विशेष डेस्क/नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% तक टैरिफ (आयात शुल्क) थोप दिया है, जो पहले से लगे 25% टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त 25% का बोझ है। यह कदम भारत के रूस से कच्चे तेल खरीदने पर नाराजगी से प्रेरित है, जिसे ट्रंप यूक्रेन युद्ध को फंड करने का जरिया मानते हैं। लेकिन ब्रिटिश मैगजीन द इकोनॉमिस्ट की 27 अगस्त को प्रकाशित रिपोर्ट “Humiliation, vindication—and a giant test for India” में इसे अमेरिका की “गंभीर भूल” (grave mistake) बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने 25 साल की कूटनीति को बर्बाद कर दिया है और भारत को अलग-थलग करने से अमेरिका खुद को कमजोर कर रहा है। आइए, इस रिपोर्ट को विस्तार में एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।
ट्रंप की “गलती” क्या है ? रिपोर्ट की मुख्य आलोचना
द इकोनॉमिस्ट के लीडर आर्टिकल में ट्रंप की नीतियों को “व्यर्थ की फूट” (pointless rupture) कहा गया है। 25 साल की कूटनीति का नुकसान..अमेरिका ने क्लिंटन से लेकर बाइडेन तक की सरकारों में भारत को चीन के मुकाबले साझेदार बनाया। 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद के बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास और 2024 का रक्षा समझौता हुआ। लेकिन ट्रंप ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष (100+ विमानों वाली झड़प) के बाद पाकिस्तान से “दोस्ती” कर ली। व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर के साथ डिनर और नोबेल प्राइज का प्रस्ताव, साथ ही पाकिस्तान के साथ क्रिप्टो और तेल रिजर्व डील – यह सब भारत को अपमानित करने जैसा है।
टैरिफ का दोहरा अपमान
पहले 25% टैरिफ (जुलाई 2025 में लगाया), फिर रूस तेल खरीदने पर अतिरिक्त 25% (27 अगस्त 2025 से लागू)। रिपोर्ट कहती है कि भारत ने पश्चिम की ही प्राइस-कैप स्कीम से रूस तेल खरीदा है, जो यूरोप को रिफाइन करके बेचा भी जाता है। चीन समेत दुनिया के कई देश रूस तेल खरीदते हैं, लेकिन भारत को “खास सजा” दी गई। इससे अमेरिका का “दोहरा मापदंड” उजागर हुआ। रिपोर्ट में कहा गया, “ट्रंप को शायद अंदाजा नहीं था कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी (14 अरब+) और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश का क्या रिएक्शन होगा।” यह अमेरिका के हितों के खिलाफ है, क्योंकि भारत को अलग करने से चीन मजबूत हो जाएगा।
रिपोर्ट में ट्रंप को “ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी” (व्यापारिक कूटनीति) का दोषी ठहराया गया, जो लंबे समय की रणनीति को नजरअंदाज करती है।
भारत के लिए “अपमान, सिद्धि और बड़ा परीक्षण
“रिपोर्ट भारत को “सुपरपावर-इन-वेटिंग” बताते हुए कहती है कि यह संकट भारत के लिए तीन आयामों वाला है अपमान (Humiliation): पाकिस्तान को गले लगाना और चीन से भी ज्यादा टैरिफ (चीन पर 30%) – यह मोदी-ट्रंप की पुरानी “ब्रोमांस” को खत्म करता है। फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस विजिट के बाद ट्रंप ने भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” (dead economy) कहा, जो रिपोर्ट में खारिज किया गया।
सिद्धि (Vindication) भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” नीति (गैर-गठबंधन) सही साबित हुई। 1947 से भारत रूस से हथियार, पश्चिम से तकनीक और चीन से मैन्युफैक्चरिंग लेता रहा। ट्रंप का दबाव साबित करता है कि अमेरिका पर निर्भरता जोखिम भरी है। मोदी का शी जिनपिंग से मिलना (हिमालय विवाद के बाद पहली बार) दुनिया को संकेत देता है कि “भारत के विकल्प हैं”।
बड़ा परीक्षण (Giant Test) भारत को अब मजबूती दिखानी होगी। मोदी के 11 सालों में सड़कें, एयरपोर्ट, डिजिटल पेमेंट और मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम बने, लेकिन नौकरियां कम बनीं और शिक्षा कमजोर है। रिपोर्ट अनुमान लगाती है कि विकास 6%+ रहेगा, IMF के अनुसार 2028 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। लेकिन खतरा है कि अमेरिकी आक्रामकता से भारत “ऑटार्की” (आत्मनिर्भरता की अतिवादी नीति) की ओर मुड़े, जो सर्विस सेक्टर (अमेरिका पर 50% निर्भर) को नुकसान पहुंचाएगा।
‘द इकोनॉमिस्ट’ की सलाह
नुकसान सीमित करें, सुधार तेज करेंरिपोर्ट मोदी को सलाह देती है:ट्रंप के साथ नुकसान कम करें: रूस तेल कम खरीदें, अमेरिकी गैस ज्यादा आयात करें, टैरिफ घटाएं। अमेरिका-भारत के “स्थायी बंधन” हैं – बड़ा डायस्पोरा, डेमोक्रेसी। चीन और नए साझेदारों से जुड़ें मैन्युफैक्चरिंग के लिए चीन से करीबियां बढ़ाएं, ब्रिटेन-UAE जैसे देशों से ट्रेड डील करें। घरेलू सुधार तेज करें “नेक्स्ट जेन रिफॉर्म” में GST सरल बनाएं, इकोनॉमी डी-रेगुलेट करें। 11 साल बाद मोदी को “ज्यादा तेज और आगे” जाना होगा, क्योंकि वैश्विक शत्रुता में आंतरिक मजबूती ही बचाव है।
“अमेरिका के लिए भारत को अलग करना गंभीर भूल है। भारत के लिए यह अवसर है – सुपरपावर बनने का परीक्षण।” यह भारत को मजबूत, स्वतंत्र और गतिशील बनने की चुनौती देता है।
अन्य अमेरिकी अर्थशास्त्रियों की राय
“ट्रंप खुद को नुकसान पहुंचा रहेद इकोनॉमिस्ट के अलावा अन्य स्रोतों से भी ट्रंप की आलोचना हो रही है रिचर्ड वोल्फ (अमेरिकी अर्थशास्त्री) ने कहा “ट्रंप दुनिया का ‘टफ गाय’ बन रहा है, लेकिन यह चूहा-हाथी की लड़ाई जैसा है। भारत अब सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, वह अन्य जगह निर्यात बेच लेगा। रूस तेल न खरीदने का दबाव असफल रहा – इतिहासकार लिखेंगे कि दुनिया बदल रही है।” वोल्फ कहते हैं कि इससे BRICS मजबूत होगा।
जेफरी सैक्स (कोलंबिया यूनिवर्सिटी): “टैरिफ ‘स्टूपिड’ और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन। ट्रंप BRICS को एकजुट कर रहे हैं, अमेरिका अलग-थलग हो जाएगा।”
अलन ब्लिंडर (पूर्व फेड रिजर्व वाइस चेयर): “भारत की इकोनॉमी ‘डेड’ नहीं, तेजी से बढ़ रही। टैरिफ अमेरिका को ही नुकसान पहुंचाएंगे – कीमतें बढ़ेंगी, ग्रोथ धीमी होगी।”
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा “भारत को अलग करना ट्रंप की सबसे बड़ी विदेश नीति भूल।”
भारत का जवाब… आत्मनिर्भरता और नए बाजार
भारत ने ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी निर्यात पर 25% जवाबी शुल्क लगाया। मोदी ने स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2025) पर “अधिक आत्मनिर्भरता” पर जोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, भारत BRICS/SCO में सक्रिय है और जापान-चीन से डील कर रहा। अर्थव्यवस्था मजबूत: Q1 2025-26 में 7.8% GDP ग्रोथ। लेकिन चुनौतियां हैं – कपड़ा, ज्वेलरी, फार्मा जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि फार्मा को फिलहाल छूट।
‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट ट्रंप को चेतावनी देती है कि “भारत से दुश्मनी अमेरिका के लिए “ओन-गोल” (स्व-गोल) है। भारत के लिए यह “विंडिकेशन” है – अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमाण। अगर ट्रंप नहीं सुधरे, तो वैश्विक व्यापार का समीकरण बदल सकता है, जहां BRICS जैसे ब्लॉक मजबूत होंगे।