कैथल। जिले के मेडिकल स्टोर संचालक अब दवा बेचने और उसका रिकॉर्ड रखने में किसी प्रकार की कोई धांधली नहीं कर पाएंगे। इसे लेकर जिला औषधि नियंत्रण विभाग अलर्ट हो गया है। सभी प्रकार की दवाइयों के पूरे रिकार्ड को ऑनलाइन करने के लिए साथी नाम से एक ऐप शुरू की गई है। प्रत्येक मेडिकल स्टोर संचालक को इसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर डाउनलोड करना जरूरी है।
दवा की आड़ में नशे के कारोबार पर लगे अंकुश
इस दौरान मेडिकल स्टोर संचालक ने किन-किन दवा का कितनी मात्रा में ऑर्डर दिया, कितना प्राप्त हुआ है और किस ग्राहक को बेचा। इसकी पूरी जानकारी ऐप पर अपलोड करनी होगी, ताकि दवा की आड़ में नशे के कारोबार पर अंकुश लग सके। प्रदेश सरकार नशे को रोकने के लिए काफी सक्रिय है।
इसके चलते मेडिकल स्टोर संचालकों सहित नशे की तस्करी करने वालों के खिलाफ पुलिस के सहयोग से जिला औषधि नियंत्रण विभाग अभियान चला रहा है। इसके अलावा मेडिकल स्टोर संचालकों को नशीली दवा एवं प्रतिबंधित दवा नहीं बेचने और दवा का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ऐप के बारे में ब्लॉक स्तर पर दी जा रही है ट्रेनिंग
जिला औषधि नियंत्रण विभाग की तरफ से इस ऐप को लेकर ट्रेनिंग दी जा रही है। अब तक चीका, ढांड, राजौंद, कौल में दवा विक्रेताओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। कैथल, सीवन व कलायत में भी जल्द ही दवा विक्रेताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।
जिले में 679 दवाई विक्रेता हैं। इस बारे में दवाई बेचने वाले केमिस्टों को जानकारी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि किस तरह से दवाइयों का रिकार्ड रखना है और किन दवाइयों की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
सीसीटीवी कैमरा भी लगाना जरूरी
कैंसर, मस्तिष्क सहित कई गंभीर बीमारियों की दवा एवं इंजेक्शन को रखने के लिए माइनस आठ डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। दवा को अनुकूल माहौल देने के लिए रेफ्रिजरेटर में रखा जाता है। कई बार देखने में आया है कि मेडिकल स्टोर संचालक रात में घर जाते समय लाइट के साथ रेफ्रिजरेटर भी बंद कर देते हैं। इसकी अब सीसीटीवी कैमरे द्वारा मानिटरिंग की जाएगी।
इसके लिए जिला औषधि नियंत्रण विभाग ने मेडिकल स्टोर संचालकों को नाइट विजन वाले सीसीटीवी कैमरा लगाने के आदेश दिए हैं। यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक रात में जाते समय सीसीटीवी कैमरा बंद करेगा तो वह कैमरे में रिकॉर्ड हो जाएगा और विभाग के निरीक्षण में यदि रिकार्डिंग में मेडिकल स्टोर संचालक रेफ्रिजरेटर बंद करता पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस रद किया जाएगा।
जिला औषधि नियंत्रक डा. चेतन वर्मा ने बताया कि साथी एप की शुरूआत विभाग ने की है। इसे लेकर दवा विक्रेताओं को जानकारी दी जा रही है। सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को यह ऐप डाउनलोड करना जरूरी है। इसमें दवा के थोक विक्रेता भी शामिल हैं।
सरकार रेफ्रिजरेटर में रखी जाने वाली दवा को लेकर भी गंभीर है। इसके चलते प्रत्येक के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाना भी आवश्यक है। इस ऐप के बारे में जागरूक करने के लिए खंड स्तर पर केमिस्टों की बैठक ली जा रही है।







