प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर के बीच हाल ही में एक विवाद सामने आया है। यह विवाद खड़गे के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने परोक्ष रूप से थरूर पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे लिए देश पहले है, लेकिन कुछ लोगों के लिए मोदी पहले हैं।” यह कटाक्ष थरूर के हालिया बयानों या व्यवहार को लेकर था, जिसे खड़गे ने पार्टी लाइन से अलग माना।
इसके जवाब में शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा “पंख आपके हैं, आसमान किसी का नहीं।” इस पोस्ट के जरिए थरूर ने खड़गे के तंज का जवाब देते हुए यह संदेश दिया कि वे अपनी स्वतंत्रता और विचारों को महत्व देते हैं और उन्हें किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। उनकी इस प्रतिक्रिया को कई लोगों ने आत्मविश्वास और स्वतंत्र रुख के रूप में देखा।
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) June 25, 2025
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का बयान
खड़गे ने यह टिप्पणी एक साक्षात्कार या सार्वजनिक मंच पर की, जिसमें उन्होंने पार्टी के भीतर एकता और देश को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका इशारा थरूर की ओर था, जिन्हें अक्सर पार्टी लाइन से हटकर अपनी राय रखने के लिए जाना जाता है।
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— Mallikarjun Kharge (@kharge) June 25, 2025
थरूर ने अपनी पोस्ट में न केवल खड़गे के बयान का जवाब दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने विचारों और कार्यों में स्वतंत्र रहेंगे। उनकी इस पोस्ट को समर्थकों ने सराहा, जबकि कुछ ने इसे पार्टी के भीतर मतभेद के रूप में देखा।
स्वतंत्रता और पार्टी अनुशासन के बीच तनाव
यह विवाद कांग्रेस पार्टी के भीतर विचारों की स्वतंत्रता और पार्टी अनुशासन के बीच तनाव को दर्शाता है। थरूर, जो अपनी बौद्धिक छवि और स्वतंत्र राय के लिए जाने जाते हैं, पहले भी कई बार पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों में रहे हैं।
खड़गे का बयान पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से एकता बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है, खासकर तब जब कांग्रेस विपक्ष में है और 2024 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। थरूर का जवाब उनकी व्यक्तिगत शैली को दर्शाता है, जहां वे साहित्यिक और दार्शनिक अंदाज में अपनी बात रखते हैं। हालांकि, यह पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सवाल भी उठाता है।
पार्टी की एकता और भविष्य की रणनीति
यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच चल रहे तनाव को उजागर करता है। खड़गे का तंज और थरूर का जवाब दोनों ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस के भीतर वैचारिक मतभेद अभी भी मौजूद हैं। इस मामले का पार्टी की एकता और भविष्य की रणनीति पर क्या असर होगा, यह देखना बाकी है।







