नई दिल्ली : पैकेज्ड फूड में चीनी की अधिक मात्रा और बच्चों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के खिलाफ Zee Business द्वारा शुरू की गई मुहिम को अब देश की सबसे बड़ी अदालत से बड़ा समर्थन मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले तीन महीनों के भीतर फूड पैकेट्स पर साफ चेतावनी वाले लेबल लगाने से जुड़े नियम लागू करे.
बच्चों के प्रोडक्ट्स को लेकर आया निर्देश
यह निर्देश उस समय आया है जब अदालत में एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें यह चिंता जताई गई थी कि किस तरह से बाजार में बिक रहे पैकेज्ड फूड उत्पाद, खासकर बच्चों के लिए बेचे जाने वाले, अत्यधिक मात्रा में शुगर (चीनी) से भरपूर होते हैं और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालते हैं, जैसे असामान्य वजन बढ़ना और पोषण की कमी.
Zee Business ने अप्रैल 2024 में यह मुहिम शुरू की थी, जब नेस्ले जैसे कई बड़े ब्रांड्स के उत्पादों में शुगर लेवल बहुत अधिक पाए गए थे. इस पर देशभर में बहस छिड़ गई थी कि आखिर क्यों उपभोक्ताओं को खासकर बच्चों के माता-पिता को स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि वो क्या खा रहे हैं.
फ्रंट लेबल में देनी होगी जानकारी
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक समिति गठित की गई है, जो फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग (पैकेट के सामने जरूरी जानकारी देने) के नियमों की समीक्षा कर रही है. अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुनवाई को फिलहाल टाल दिया है, लेकिन साफ कहा है कि समिति अपनी सिफारिशें तीन महीने के भीतर सरकार को सौंपे.
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की ओर से अदालत में बताया गया कि फ्रंट लेबल पर प्रमुख तत्वों की जानकारी अनिवार्य किए जाने पर विचार किया जा रहा है. FSSAI ने इस विषय पर व्यापक परामर्श किया है, जिसमें 14,000 से अधिक लोगों की प्रतिक्रियाएं और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं.







