ऋषिकेश: उत्तराखंड की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले ऋषिकेश की पहचान सिर्फ गंगा घाटों या योग केंद्रों से नहीं है, बल्कि यहां मौजूद कई प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिरों से भी है. इन्हीं में से एक है गौरी शंकर महादेव मंदिर (Gauri Shankar Mahadev Mandir), जिसे संतान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है. यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों से जुड़ा हुआ है. देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत लेकर पहुंचते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.
गौरी शंकर महादेव मंदिर की मान्यता
ऋषिकेश स्थित इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा की जाती है. मंदिर के महंत गोपाल गिरी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि जो भी दंपत्ति संतान की इच्छा के साथ इस मंदिर में विशेष विधि से पूजा करता है, उन्हें मनचाहा फल प्राप्त होता है. यहां की मान्यता है कि गृहस्थ जीवन में सुख, संतुलन और संतान सुख पाने के लिए यह स्थान अत्यंत प्रभावी है.
क्या है “चिल्ला” व्रत की परंपरा?
इस मंदिर में पूजा का एक विशेष नियम है जिसे “चिल्ला” व्रत कहा जाता है. “चिल्ला” का अर्थ है लगातार 41 दिनों तक एक ही नियम और अनुशासन का पालन करते हुए पूजा करना. इस व्रत के दौरान भक्त को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है, सात्विक भोजन ग्रहण करना होता है और जीवन को पूरी तरह धार्मिक आचरण में ढालना होता है.
इन 41 दिनों में श्रद्धालु प्रतिदिन मंदिर आकर भगवान शिव का जल, दूध और शहद से अभिषेक करते हैं, जबकि माता गौरी को हल्दी, चूड़ी और सिंदूर अर्पित किए जाते हैं. पूजा का समापन संतान प्राप्ति की प्रार्थना के साथ किया जाता है. इस दौरान श्रद्धा, संयम और मानसिक शुद्धता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है.
कई श्रद्धालुओं की मन्नतें हुईं पूरी
महंत गोपाल गिरी बताते हैं कि मंदिर में पूजा करने वाले कई दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति हुई है. वे लोग जो वर्षों से उपचार या अन्य प्रयासों के बाद भी निराश हो चुके थे, उन्होंने यहां आकर “चिल्ला” व्रत किया और कुछ ही समय में उन्हें संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिला. यह स्थान उन लोगों के लिए आस्था का मजबूत केंद्र बन चुका है, जो ईश्वर में विश्वास रखते हैं.
गौरी शंकर महादेव मंदिर का शांत वातावरण, गंगा नदी की निकटता और चारों ओर फैली आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को आंतरिक शांति और दिव्यता का अनुभव कराती है. यहां आने वाले भक्त सिर्फ उत्तराखंड या ऋषिकेश से ही नहीं, बल्कि देशभर से अपनी मन्नतों के साथ यहां पहुंचते हैं.
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