अमेठी। गैस रीफिल वितरण में अनियमितता के मामले में अब उपभोक्ताओं की शिकायतें पुलिस विवेचना का हिस्सा बनेंगी। गैस एजेंसी संचालक के खिलाफ प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। बीते पखवाड़े भर से रीफिल के लिए परेशान उपभोक्ताओं को अब जांच से राहत की उम्मीद जगी है।
मामले में सबसे बड़ी गड़बड़ी यह सामने आई है कि 1300 से अधिक उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बिना सिलिंडर मिले ही डिलीवरी की रिपोर्ट दर्ज हो गई।
इससे शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन और ग्रामीण उपभोक्ताओं को नया डीएसी नंबर 45 दिन बाद मिलने की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में परिवार रसोई गैस संकट से जूझ रहे हैं।
उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने प्रकाश गैस एजेंसी पर छापामारी कर जांच की। जांच में बड़े पैमाने पर सिलिंडर की कालाबाजारी एवं अनियमितता मिली थी।
जिलाधिकारी संजय चौहान के निर्देश पर गैस वितरक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब पुलिस पूरे मामले की गहन विवेचना शुरु की है। पूर्ति निरीक्षक शुभम चौधरी ने बताया कि बिना गैस रीफिल दिए उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डिलीवरी रिपोर्ट आना गलत है। इसकी पूरी जिम्मेदारी एजेंसी संचालक की है। कंपनी की ओर से इसमें कोई त्रुटि नहीं होती।
संचालक की ओर से वैध प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद ही कंपनी डिलीवरी रिपोर्ट भेजती है। बताया कि जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बिना सिलिंडर मिले ही डिलीवरी का संदेश आया है, उनकी शिकायतों को चिह्नित किया जा रहा है। कई उपभोक्ताओं ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है।
सभी शिकायतों की रिपोर्ट तैयार कर विवेचक को भेजी जाएगी, ताकि अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।







