प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
मुंबई। महाराष्ट्र में मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में अब मेयर पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि किस शहर में महिला मेयर चुनी जाएगी और कहां अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), ओबीसी या सामान्य वर्ग के लिए मेयर पद आरक्षित होगा।
राज्य के शहरी विकास विभाग द्वारा आज आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यह प्रक्रिया ‘लॉटरी सिस्टम’ के जरिए तय की जा रही है, जिसके तहत यह निर्धारित होगा कि किस नगर निगम में मेयर पद किस वर्ग और किस जेंडर के लिए आरक्षित रहेगा। इसी लॉटरी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
लॉटरी सिस्टम से तय होगा मेयर का वर्ग
बीएमसी सहित सभी नगर निगमों में नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान से होगा। इसके लिए नवनिर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक (स्पेशल मीटिंग) बुलाई जाएगी। लेकिन उससे पहले यह तय होना जरूरी है कि मेयर पद किस वर्ग और किस श्रेणी के लिए आरक्षित रहेगा।
यह फैसला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा ‘लॉटरी सिस्टम’ से किया जा रहा है। जैसे ही लॉटरी का परिणाम सामने आएगा, उसी के आधार पर सभी नगर निगमों में मेयर चुनाव की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
उद्धव ठाकरे गुट ने जताई आपत्ति
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने लॉटरी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार मनमाने तरीके से आरक्षण तय कर रही है, ताकि सत्ता पक्ष को राजनीतिक फायदा मिल सके। उद्धव गुट का कहना है कि लॉटरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और संवैधानिक नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (UBT) और बीजेपी-शिंदे गुट के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है।
BMC में ST कैटेगरी को लेकर खास स्थिति
मुंबई महानगरपालिका में कुल 227 पार्षद हैं, जिनमें सिर्फ़ दो पार्षद ST (अनुसूचित जनजाति) वर्ग से हैं और दोनों ही शिवसेना (UBT) से जुड़े हुए हैं। अगर लॉटरी के जरिए मेयर पद ST कैटेगरी के लिए आरक्षित कर दिया जाता है, तो बैलेट पर वही दोनों पार्षद अकेले उम्मीदवार के तौर पर सामने होंगे। ऐसे में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं और सत्ता पक्ष के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
बीजेपी-शिंदे गुट की रणनीति
बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास SC और OBC कैटेगरी में कई मजबूत उम्मीदवार मौजूद हैं। अगर लॉटरी से यह तय होता है कि मेयर पद SC, OBC या महिला कोटे में जाता है, तो गठबंधन को फायदा मिलने की संभावना है। लेकिन ST कोटा आने की स्थिति में उद्धव गुट को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है।
राजनीतिक बवाल तेज
लॉटरी सिस्टम के नतीजों से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। सभी दल अपने-अपने फायदे-नुकसान का आकलन कर रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। अब सबकी निगाहें आज आने वाले लॉटरी के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मुंबई सहित महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिकाओं में मेयर किस वर्ग और किस जेंडर से चुना जाएगा।







