नई दिल्ली : दरअसल ई-सिम फिजिकल सिम कार्ड का ही डिजिटल वर्जन होता है. यानी ये वर्चुअल तरीके से डिवाइस को आइडेंटिफाई कर नेटवर्क कनेक्शन उपलब्ध कराता है. इसे सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोग्रमा किया जाता है और ये नए स्मार्टफोन्स में देखने को ज्यादा मिलता है.
ई-सिम को आपको किसी दुकान में जाकर खरीदने की जरूरत नहीं होती है. eSIM का इस्तेमाल टैबलेट, स्मार्टवॉच, ड्रोन और कार में भी किया जाता है. यानी ये बिना ज्यादा जगह लिए कनेक्टिविटी देने वाली चीज है. यानी ये किसी भी डिवाइस में दूसरे कंपोनेंट्स के लिए जगह बनाता है.
ई-सिम का फायदा ये है कि इसे फिजिकल तौर पर डैमेज नहीं किया जा सकता और ना ही गुम हो सकता है. साथ ही ये सेफ भी होते हैं. क्योंकि, इन्हें डुप्लीकेट नहीं किया जा सकता है. सबसे अच्छी बात ये है कि ई-सिम में कई सेल्युलर प्रोफाइल को स्टोर किया जा सकता है. ये संख्या 3 या 5 तक भी हो सकती है. इस फीचर की वजह से आपको कई फिजिकल सिम कार्ड रखने की जरूरत नहीं होती है. आप सीधे फोन के नेटवर्क सेटिंग से किसी भी दूसरे नेटवर्क में स्विच कर सकते हैं.
अगर आप ज्यादा ट्रैवल करते हैं तो भी ये आपके लिए सबसे काम की चीज हैय क्योंकि, जब आप ट्रैवल कर रहे हों तब आप किसी लोकल ऑपरेटर पर आसानी से eSIM के जरिए स्विच कर सकते हैं. ऐसे में आपको हर बार किसी नई जगह के लिए सिम खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसे केवल QR कोड स्कैन कर आसानी से रजिस्टर किया जा सकता है.
फिलहाल ई-सिम का फीचर ऐपल और सैमसंग जैसी कंपनियों के महंगे फोन में ही देखने को मिलता है. ये तो हो गई ई-सिम के फायदे. लेकिन, कुछ नुकसान भी हैं. जो हम आपको बताते हैं. अगर कभी इमरजेंसी में आपका फोन बंद हो जाए तो आप फिजिकल सिम को निकालकर दूसरे फोन में डाल सकते हैं. लेकिन, eSIM के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता. ई-सिम के लिए फोन के ऑप्शन भी लिमिट होते हैं. इसलिए इसे दूसरे डिवाइस में शिफ्ट करना भी आपको मुश्किल होगा.







