प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि जब वह सत्ता में थी तो विपक्षी दलों की सरकारों को गिराने के लिए राज्यों में संविधान के आर्टिकल 356 का 90 बार दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अकेली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 50 बार राज्यों की चुनी हुई सरकारों को गिराने का काम किया। पीएम मोदी ने वामपंथी दलों और डीएमके के सांसदों को याद दिलाने की कोशिश की कि कैसे तमिलनाडु और केरल की सरकारों को कांग्रेस के जमाने में गिराया जाता रहा।
राज्यसभा में भी कांग्रेस पर हमलावर रहे पीएम मोदी
राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर खूब हमलावर रहे। हालांकि, इस दौरान विपक्ष के कुछ सांसद अडानी मुद्दे को लेकर लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। लेकिन, पीएम मोदी ने विपक्ष को आईना दिखाने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। पीएम मोदी ने सदन में बताया कि राज्यों में चुनी हुई सरकारों को कांग्रेस की सरकारों में किस तरह से गिराया जाता था।
आर्टिकल 356 के दुरुपयोग पर बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जो लोग आज विपक्ष में बैठे हैं, उन्होंने तो राज्यों के अधिकारों की धज्जियां उड़ा दी थीं….वो लोग कौन सत्ता में बैठे थे, जिन्होंने आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया…..90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया…..कौन हैं जिन्होंने किया ? एक प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 356 का 50 बार उपयोग किया…आधी सेंचुरी कर दी…..वो नाम है श्रीमती इंदिरा गांधी का….50 बार सरकारों को गिरा दिया।”
केरल और तमिलनाडु में क्या हुआ ?
फिर पीएम मोदी ने कांग्रेस के आज के सहयोगियों वामपंथी दलों और तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके पर भी तंज कसा। वो बोले, “केरल में वामपंथी सरकार चुनी गई….जिसे पंडित नेहरू पसंद नहीं करते थे, कुछ ही काल खंड के अंदर चुनी हुई पहली सरकार को घर भेज दिया….तमिलनाडु में एमजीआर और करुणानिधि जैसे दिग्गजों की सरकारें इन्हीं कांग्रेस वालों ने बर्खास्त कर दिया….. ”
विपक्ष के नारेबाजी के बीच पीएम मोदी का जवाब
एक दिन पहले पीएम मोदी ने लोकसभा में भी विपक्ष को खूब सुनाया था। दरअसल, विपक्ष अडानी मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। एक फरवरी को लोकसभा में साल 2023-24 का बजट पेश होने के बाद से इस मुद्दे पर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा है। उनकी ओर से इस मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग की जा रही है। जबकि, सरकार विपक्ष की मांग को गैर-जरूरी मान रही है।







