Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

BJP छोटे दलों की क्यों कर रही मनुहार, समझिए NDA का मिशन 2024

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 17, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
BJP president JP Nadda
21
SHARES
687
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सभी दलों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. विपक्षी एकता और लखनऊ में महाजुटान के जवाब में बीजेपी (BJP) भी छोटे दलों को अपने साथ करने की तैयारी में जुट गई है. इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर को अपने साथ लाकर कर दी है. जेडीएस को भी मनाने के लिए संदेशा भिजवाया गया है. पूर्ण बहुमत से 2019 और 2024 में सरकार बनाने के बाद भी बीजेपी छोटी पार्टियों और क्षेत्रीय ताकतों को नजरअंदाज नहीं कर रही है. एनसीपी में फूट के बाद अजित पवार को भी खुले दिल से अपना लिया गया है. बीजेपी मिशन 2024 के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. 5 प्वाइंट में समझिए क्या है इसके पीछे की रणनीति.

1) छोटे दलों का सॉलिड वोट बैंक: असम से लेकर तमिलनाडु तक और बिहार से लेकर सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले प्रदेश उत्तर में जो छोटी पार्टियां हैं उनके पास आज भी अपना सॉलिड वोट बैंक है. बीजेपी की नजर उसी वफादार वोट बैंच को अपने साथ जोड़ने की है. चुनाव से पहले इन दलों को अपने साथ रखकर मोदी और शाह यह संदेश भी देना चाहते हैं कि संख्या बल में कम होने के बाद भी उनके सम्मान और महत्व को अनदेखा नहीं किया जाएगा.

इन्हें भी पढ़े

RSS

हिंदू धर्म के लिए RSS से बेहतर कोई नहीं!

August 31, 2025

विज्ञापन क्षेत्र का ‘अ से ज्ञ’ सिखाती है- विज्ञापन का जादू

August 31, 2025
india-us trade deal

ट्रंप की भारत से टक्कर, द इकोनॉमिस्ट ने खोली पोल, टैरिफ से अमेरिका की ‘गंभीर भूल’!

August 30, 2025
Jagdeep Dhankhar

फिर चर्चा में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विधायक पेंशन के लिए आवेदन किया!

August 30, 2025
Load More

2) बिहार-यूपी पर खास नजर: बिहार और उत्तर प्रदेश हिंदी पट्टी के दो ऐसे राज्य हैं जिनमें 120 लोकसभा सीटें हैं. इन दोनों ही प्रदेशों के क्षेत्रीय दल चाहे वह अपना दल हो या एलजेपी वह बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकते हैं. नीतीश कुमार से गठबंधन टूटने के बाद अब बीजेपी को बिहार में विश्वस्त सहयोगियों की जरूरत है. छोटे दलों की बात करें तो रालोसपा, वीआईपी, HAM और सीपीआई (एमएल) जैसी अन्य छोटी पार्टियों को कुल मतदान का 9 प्रतिशत वोट मिला था. यह वोट प्रतिशत ही इन दलों को उपयोगी बनाए हुए है.

3) दक्षिण में पकड़ मजबूत करने की कोशिश: बीजेपी की नजर एनडीए के कुनबे को दक्षिण भारत में मजबूत बनाने की है. देश के दक्षिणी हिस्से में मोदी की चमत्कारी छवि और शाह की कुशल रणनीति के बाद भी बीजेपी को अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है. ऐसे में यहां की क्षेत्रीय पार्टियों को अपने साथ जोड़कर बीजेपी की कोशिश अपने स्वरूप को विस्तार देने की है. दक्षिण में पांव जमाने के लिए इस वक्त बीजेपी को सहयोगियों की दरकार है.

4) महाराष्ट्र में छोटे दलों के पास बड़ी ताकत: छोटे दलों को अपने साथ साधने के पीछे बीजेपी के पास ठोस वजह है. अपने दम पर ये छोटे दल एक सीट भी नहीं जीत सकते लेकिन विपक्ष के वोट काटने का काम 2019 चुनाव में किया था. महाराष्ट्र में प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) कोई भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी थी. हालांकि इसके बावजूद उसे 7 प्रतिशत वोट मिले थे. जो पश्चिमी महाराष्ट्र की तीन लोकसभा सीटों पर यूपीए की हार की वजह बने. बीजेपी की कोशिश इन छोटी मछलियों के सहारे बड़ा जाल फैलाने की है.

5) सत्ता के साथ समावेशी छवि: बीजेपी इस वक्त अपने सबसे शक्तिशाली दौर में है और नजर केंद्र में सत्ता की हैट्रिक पर है. ऐसे में सत्ता के साथ अपनी छवि को समावेशी बनाने की जरूरत है. विपक्षी एकता और सत्ता के अहंकार जैसे आरोपों का काट भी बीजेपी इन छोटी पार्टियों को साथ लेकर सम्मान और सहयोग का आश्वासन दे सकती है. साथ ही, यह संघ और बीजेपी की कठोर छवि को धूमिल कर ज्यादा उदार और समावेशी बनाने का भी एक प्रोजेक्ट है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

अपने बुने जाल में उलझ गए नीतीश कुमार

March 7, 2023

एक राष्ट्र, एक संविधान फिर गरीब और सरमायदार पर कार्यवाही करने में भेदभाव क्यों..?

June 29, 2025
Sheikh Hasina

‘हसीना को हमें दे दो…’,बांग्लादेश ने भारत से मांगा पूर्व PM का प्रत्यर्पण, अब क्या करेगी मोदी सरकार?

December 25, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • भारी पड़ा Google से पंगा, प्ले स्टोर से हटाए 77 मैलवेयर ऐप्स
  • चीन लगाने जा रहा भारत पर ये प्रतिबंध!
  • हिंदू धर्म के लिए RSS से बेहतर कोई नहीं!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.