नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का व्रत विशेष रूप से करने का विधान है। इन पूरे नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। वहीं नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा का पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और आयु, यश, बल की प्राप्ति होती है।
साथ ही व्यक्ति को मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो सकती है। अब ऐसे में नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा किस विधि से करने से लाभ हो सकता है।
नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा किस विधि से करें?
- मां कुष्मांडा का ध्यान करें और उनके मंत्र ‘या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’ का जाप करें।
- मां को हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां अर्पित करें।
- मां कुष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाएं। इसके अलावा, आप खीर, हलवा, और फलों का भोग भी लगा सकते हैं।
- मां को लाल फूल, गुड़हल का फूल और हरी इलायची बहुत पसंद है। इन्हें ये चीजें जरूर अर्पित करें।
- मां कुष्मांडा का पूजा करने के बाद आरती जरूर करें।
- उसके बाद दान-पुण्य करें। इससे उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है।
मां कुष्मांडा की पूजा के दौरान मंत्र जाप
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नम:।या देवी सर्वभूतेषु कूष्मांण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।दुर्गा कूष्माण्डा स्तुति: देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद, प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वम्, त्वमीश्वरी देवी चराचरस्य।
वन्दे वांछित कामर्थे चंद्रार्धकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्।।
दुर्गतिनाशिनीं दुर्गां कूष्माण्डां प्रणमाम्यहम्।
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
ऊं देवी कूष्माण्डायै नमः।।
मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। वह सिंह पर विराजमान हैं और उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला है। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के रोग, कष्ट और परेशानियां दूर होती हैं।







